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130 शहरों का प्रदूषण कम करने में ₹12000 करोड़ लग गए, पता है कितनी जगह कम हुआ?

सरकार ने 2019 में तय किया कि देश भर के उन शहरों की एक लिस्ट बनाई जाए, जो 5 साल से प्रदूषण के राष्ट्रीय मानकों पर फेल हैं. इन शहरों पर खास ध्यान देकर हालात सुधारने की कोशिश की जाएगी. देश भर में 130 ऐसे शहरों की पहचान की गई, जहां 5 साल से प्रदूषण कंट्रोल नहीं हो रहा था. नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत सात साल में जारी 16,824 करोड़ रुपये में से 12,087 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.

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12 हजार करोड़ खर्च करके भी 130 शहरों में हवा की हालत नहीं सुधरी. (फोटो- India today)

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  • सरकार ने 2019 में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) शुरू किया, जिसके तहत 130 शहरों में पांच वर्षों से प्रदूषण नियंत्रण न होने के कारण PM10 प्रदूषण के स्तर को 30-40% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया।
  • देश के 130 शहरों में लगातार पांच वर्षों तक प्रदूषण राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहा, और इसके चलते हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए NCAP के तहत विशेष नियंत्रण एवं बजट आवंटित किया गया।
  • NCAP के तहत अब तक 12 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन तकरीबन 90% शहरों में प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं हुआ है और 23 शहरों में प्रदूषण में वृद्धि भी दर्ज की गई है।

प्रदूषण देश के लिए एक बड़ी चुनौती है. मतलब ये कहने में क्या ही जाता है! लाखों-करोड़ों खर्च हो जाते हैं. लेकिन, हवा है कि साफ नहीं होती. हर साल वही ‘ढाक के तीन पात’ वाले हालात हो जाते हैं. इससे निपटने के लिए ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (NCAP) के तहत सरकार ने 2019 में तय किया कि देश भर के उन शहरों की एक लिस्ट बनाई जाए, जो 5 साल से प्रदूषण के राष्ट्रीय मानकों पर फेल हैं. इन शहरों पर खास ध्यान देकर हालात सुधारने की कोशिश की जाएगी. 

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देश भर में 130 ऐसे शहरों की पहचान की गई, जहां 5 साल से प्रदूषण कंट्रोल नहीं हो रहा था. 2017-18 के साल को आधार बनाया गया. टारगेट रखा गया कि इस साल के मुकाबले चुने गए शहरों में हवा में PM10 के स्तर को 30 से 40 फीसदी तक कम किया जाएगा. बजट तय किया गया 16 हजार 824 करोड़ रुपये.

हिंदुस्तान टाइम्स ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एनालिसिस के हवाले से बताया है कि 7 सालों में इस प्लान के लिए 12 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन कायदे से 20 शहर भी प्रदूषण घटाने के टारगेट को पूरा नहीं कर पाए. 130 में 117 शहर PM10 का लेवल 40 फीसदी कम करना तो दूर राष्ट्रीय मानक तक पहुंचने में भी मशक्कत कर रहे हैं. राष्ट्रीय मानक ये है कि हवा में PM10 की सालाना औसत सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए. लेकिन इन शहरों में हवा में प्रदूषक तत्वों का स्तर इससे काफी ज्यादा रहा. 

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इन 130 में सिर्फ 21 शहर ऐसे रहे जो 2025-26 तक हवा में PM10 के स्तर को 40 फीसदी कम करने में सफल हो पाए. 22 शहरों में 20 से 30 फीसदी तक कमी दर्ज की गई. जबकि 23 शहरों में 30 से 40 फीसदी तक प्रदूषण घटा.

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NCAP के तहत 130 शहरों के लिए कुल 16 हजार 824 करोड़ रुपये जारी किए गए. इनमें से शहर अब तक 12 हजार 87 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं. यानी कुल जारी रकम का करीब 72 फीसदी इस्तेमाल हो चुका है, लेकिन तकरीबन 90 फीसदी शहरों में हालात नहीं बदले. 23 शहरों में तो प्रदूषण पहले के मुकाबले बढ़ गया. इन शहरों में जयपुर, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं. जिन शहरों में प्रदूषण बढ़ा, उनमें चेन्नई ने सबसे ज्यादा 449 करोड़ रुपये खर्च किए थे. 

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क्या है NCAP?

साल 2019 में शुरू की गई NCAP का मकसद देश के उन 130 शहरों की हवा सुधारना था, जो लगातार 5 सालों तक प्रदूषण के राष्ट्रीय मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे. यानी यहां की हवा की क्वालिटी लगातार कई सालों से खराब ही चल रही थी. तय किया गया कि इन शहरों को टारगेट करके यहां हवा में PM10 के स्तर को 40 फीसदी कम करने की कोशिश की जाएगी. या कम से कम PM10 के राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के आसपास तो लाया ही जाएगा.  

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