क्या आप डेस्क जॉब करते हैं? 8-10 घंटों तक एक ही जगह पर जमे रहते हैं? लगातार घंटों बैठे रहने से सिर्फ़ कमर, गर्दन या पीठ में दर्द नहीं होता. सिर्फ़ तोंद नहीं निकलती. बल्कि कई गंभीर बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. ये बीमारियां प्रोस्टेट, ब्लैडर, किडनी और दिल से जुड़ी हुई हैं.
डेस्क जॉब वालों की किडनी, प्रोस्टेट और ब्लैडर को खतरा, डॉक्टर ने सब बताया
लगातार घंटों बैठे रहना शरीर के किसी भी अंग के लिए अच्छा नहीं है. इससे मांसपेशियों में अकड़न और रीढ़ की हड्डी की डिस्क से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. हिप्स यानी कूल्हों की मांसपेशियां कमज़ोर हो सकती हैं, कमर में भी कमज़ोरी आ सकती है.

लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से खास प्रोस्टेट, ब्लैडर और किडनी पर क्या और क्यों असर पड़ता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि घंटों एक ही जगह पर बैठे रहने के दूसरे नुकसान क्या हैं. जो लोग रोज़ 8-9 घंटे बैठकर काम करते हैं, वो कौन-से लक्षण इग्नोर न करें और किन बातों का ध्यान रखें.
लगातार बैठे रहने से प्रोस्टेट, ब्लैडर और किडनी पर क्या असर पड़ता है?
ये हमें बताया डॉक्टर प्रशांत सी. धीरेंद्र ने.

जब हम रोज़ 8-9 घंटे तक लगातार बैठे रहते हैं, तो पेल्विस की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है. पेल्विस के इसी हिस्से में प्रोस्टेट और ब्लैडर मौजूद होते हैं. मांसपेशियों पर बढ़ते तनाव का इन दोनों अंगों पर भी असर पड़ सकता है.
लगातार घंटों बैठे रहने से प्रोस्टेट में सूजन यानी प्रोस्टेटाइटिस का ख़तरा बढ़ सकता है. प्रोस्टेट में सूजन होने पर पेशाब को कंट्रोल करने में परेशानी हो सकती है. प्रोस्टेट में होने वाला इंफेक्शन शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है. जैसे हड्डियों में, कभी-कभी ये दिल पर भी असर डाल सकता है . प्रोस्टेट का इंफेक्शन बहुत ख़तरनाक है और इसका इलाज काफी लंबा चलता है.
प्रोस्टेटाइटिस का एक लक्षण पेशाब में पस जैसा पदार्थ आना है. प्रोस्टेटाइटिस के साथ पेशाब में इंफेक्शन भी हो सकता है. इससे बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ सकता है. पेशाब को रोकने में परेशानी हो सकती है. पेशाब आने पर तुरंत बाथरूम जाने की ज़रूरत महसूस होती है. पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां ब्लैडर को भी सहारा देती हैं. जब इन मांसपेशियों में कमज़ोरी आ जाती है या तनाव बढ़ जाता है. तब ब्लैडर के काम करने पर भी असर पड़ सकता है.
लगातार बैठे रहने से ब्लैडर की संवेदनशीलता यानी उसके भरने का एहसास कम हो सकता है. अगर कोई सालों तक रोज़ 8-10 घंटे बैठा रहता है. तब ब्लैडर के काम करने की क्षमता घट सकती है. इससे यूरिनरी रिटेंशन यानी पेशाब को शरीर से बाहर निकालने में दिक्कत हो सकती है. ऐसे में अलग से इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है. घंटों बैठे रहने से शुगर लेवल और बीपी बहुत ज़्यादा बढ़ सकता है. इससे किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. गंभीर मामलों में किडनी फेलियर का ख़तरा भी बढ़ सकता है. इसलिए लंबे समय तक बैठना प्रोस्टेट, ब्लैडर और किडनी, तीनों के लिए अच्छा नहीं है.
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लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के दूसरे नुकसान
लगातार घंटों बैठे रहना शरीर के किसी भी अंग के लिए अच्छा नहीं है. इससे मांसपेशियों में अकड़न और रीढ़ की हड्डी की डिस्क से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. हिप्स यानी कूल्हों की मांसपेशियां कमज़ोर हो सकती हैं, कमर में भी कमज़ोरी आ सकती है.
आजकल एक कहावत प्रचलित है- Sitting is the new smoking. यानी लंबे समय तक बैठना, सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदेह है. घंटों बैठे रहने से दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ सकता है, जैसे हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर. लंबे समय तक बैठे रहना किडनी की सेहत के लिए भी अच्छा नहीं है. लगातार बैठने से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. अगर पहले से डायबिटीज़, हाई बीपी हो तो इन्हें कंट्रोल में लाना बहुत मुश्किल होता है. इसलिए लंबे समय तक लगातार बैठे रहना शरीर के किसी भी अंग के लिए अच्छा नहीं है.

घंटों बैठकर काम करने वाले किन लक्षणों को गंभीरता से लें?
घंटों बैठने वालों को पेल्विक एरिया में होने वाले दर्द को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. पुरुषों में पेल्विक एरिया में दर्द प्रोस्टेटाइटिस का लक्षण हो सकता है. महिलाओं में ये दर्द ब्लैडर स्टोन या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से हो सकता है. इसलिए पेल्विक एरिया में दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें. अगर पेशाब करते समय जलन हो रही है, तो इसका मतलब यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो गया है. अगर वज़न धीरे-धीरे बढ़ रहा है, तो उसे कम करने की कोशिश करें. वज़न बढ़ने से डायबिटीज़, हार्ट अटैक और किडनी फ़ेलियर का रिस्क बढ़ सकता है. पेशाब करते समय दर्द होने पर ब्लैडर स्टोन समेत दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं.
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घंटों बैठने वाले किन बातों का ध्यान रखें?
- हर एक घंटे में उठकर 5 मिनट टहलें.
- हल्की एक्सरसाइज़ भी कर सकते हैं.
- बैठते समय अपनी पीठ सीधी रखें.
- आगे या पीछे झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी और पेल्विस पर ज़्यादा दबाव पड़ सकता है.
- एक पैर को दूसरे पैर के ऊपर रखकर न बैठें.
- इस तरह बैठने से मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है.
- अगर आप दिन में 8-10 घंटे बैठकर काम करते हैं, तो बाकी समय में एक्टिव रहें.
- कम से कम एक घंटा कोई फिज़िकल एक्टिविटी करें.
- रोज़ 10 हज़ार कदम चलना भी सेहत के लिए अच्छा हो सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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