रामदास आठवले को अपनी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) में ‘जेन जी’ लोग चाहिए. उन्हें इसके लिए सबसे बेहतर कैंडिडेट अभिजीत दिपके लगे. ये अलग बात है कि 30 साल के अभिजीत दिपके ‘जेन जी’ वाली कैटेगरी में नहीं आएंगे. लेकिन जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट का मंच सजाकर उन्होंने जेन-जी मूवमेंट को ‘हवा-पानी’ तो दिया ही था.
पीएम मोदी के मंत्री ने अभिजीत दिपके को अपनी पार्टी जॉइन करने का न्योता दिया
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को अपनी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) में शामिल होने का न्योता दिया है.

अब आठवले का दावा है कि उन्होंने आंबेडकरवादी दिपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दिया है. उन्होंने इसे अभी मंजूर नहीं किया है, लेकिन अगर दिपके उनकी पार्टी में आते हैं तो वो उनका स्वागत करेंगे.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आठवले ने कहा कि उन्होंने अभिजीत दिपके से इसलिए संपर्क किया क्योंकि उनकी रिपब्लिकन पार्टी बाबासाहेब आंबेडकर के सिद्धांतों पर बनी थी. पार्टी को अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए Gen-Z समेत युवाओं के भागीदारी की जरूरत थी. आठवले ने कहा,
अभिजीत दिपके भी आंबेडकरवादी हैं. मैंने उनसे कहा था कि बाबासाहेब की पॉलिटिकल पार्टी को मजबूत करने के लिए युवाओं की जरूरत है. अच्छा होगा अगर वो हमारे साथ आ जाएं. अगर वह आते हैं तो मैं उनका स्वागत करूंगा.
बता दें कि रामदास आठवले जिस रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (आर) के संस्थापक हैं, वो केंद्र की मोदी सरकार की सहयोगी पार्टी है. वह खुद केंद्र सरकार में मंत्री हैं. दिपके का पूरा प्रोटेस्ट मोदी सरकार के खिलाफ था. उन्हीं दिपके को आठवले अपनी पार्टी में बुलाना चाहते हैं.
आठवले को दिपके तो अपनी पार्टी में चाहिए लेकिन प्रोटेस्ट को लेकर उनके विचार थोड़े विरोधाभासी हैं. आठवले का कहना है कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों से सरकारें नहीं बदली जा सकतीं. उन्होंने तर्क दिया कि संविधान में लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए ही सरकार बदलने का प्रावधान है.
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आठवले कौन हैं?रामदास आठवले राज्यसभा सांसद हैं और अपने अनोखे अंदाज, मजाकिया बातें और बेबाकी से बयान देने के लिए जाने जाते हैं. उनकी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का प्रभाव महाराष्ट्र में है. खासतौर पर प्रदेश के बौद्ध दलित वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. आठवले का सियासी सफर 1970 के दशक में दलित पैंथर्स आंदोलन से जुड़ने के साथ शुरू हुआ. हालांकि, उन्हें पहली बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी 1990 में मिली, जब वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने. इसके बाद वो महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने.
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