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राजकीय सम्मान के साथ हुआ मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार, इसमें होता क्या-क्या है?

State Honors to Manmohan Singh: भारत सरकार ने 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया.

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राजकीय सम्मान के साथ मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर, निगमबोध घाट की ओर. (तस्वीर: PTI)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया. दिल्ली के निगमबोध घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. पूर्व प्रधानमंत्री का 26 दिसंबर को दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया था. इसके बाद भारत सरकार ने 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. इस कॉपी में राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय शोक के बारे में जानेंगे.

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राष्ट्रीय शोक होता क्या है?

हर देश में राष्ट्रीय शोक का तरीका अलग-अलग होता है. लेकिन इसकी प्रक्रिया लगभग एक जैसी ही होती है. भारत में ये पूरे देश के दुख को व्यक्त करने का एक सांकेतिक तरीका है. इसकी घोषणा किसी व्यक्ति की मौत या पुण्य तिथि पर की जाती है. 

  • फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के मुताबिक, राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में और विदेश स्थित भारतीय संस्थानों (जैसे एंबेसी आदि) में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं.
  • कोई औपचारिक एवं सरकारी काम नहीं किया जाता है और इस अवधि के दौरान कोई आधिकारिक काम भी नहीं होता.
  • समारोहों और आधिकारिक मनोरंजन पर भी प्रतिबंध रहता है.

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के देहांत के वक्त सात दिनों तक दूरदर्शन पर केवल ‘नृत्य का अखिल भारतीय कार्यक्रम’, ‘संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम’ और समाचार ही दिखाए जाते थे. समाचार से पहले बजने वाला संगीत भी म्यूट कर दिया जाता था.

  • दिवंगत व्यक्ति की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाती है.
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में क्या होता है?

नियम-कानून की मानें, तो केवल वर्तमान और पूर्व प्रधानमंत्री, वर्तमान और पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान और पूर्व राज्यमंत्री का ही इस तरह से अंतिम संस्कार किया जाता है. समय के साथ नियमों में बदलाव हुए हैं. लिखित रूप से नहीं बल्कि कार्यरूप में. अब ये राज्य सरकार के विवेक पर है कि किसे ये सम्मान देना है. यानी इसका कोई निर्धारित दिशा-निर्देश नहीं है.

राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने या तिरंगे से शव को ढकने के लिए सरकार कुछ विशेष बातों का ध्यान रखती है. राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और सिनेमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दिवंगत व्यक्ति द्वारा किए गए योगदान को ध्यान में रखा जाता है. इसके लिए संबंधित राज्य का मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों के परामर्श के बाद निर्णय लेता है.

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फैसले के बाद, डिप्टी कमिश्नर, पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाती है. ताकि राजकीय अंतिम संस्कार के लिए सभी व्यवस्थाएं हो सकें.

  • राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को तिरंगे में में लपेटा जाता है.
  • दिवंगत को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया जाता है. इसमें मिलिट्री बैंड द्वारा ‘शोक संगीत’ बजाना और इसके बाद बंदूकों की सलामी देना आदि शामिल है.
  • स्वतंत्र भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला ‘अंतिम संस्कार’ महात्मा गांधी का हुआ था.
  • गैर राजनीतिज्ञों और गैर आर्मी पर्सनल्स में– मदर टेरेसा, सत्य साईं बाबा, श्रीदेवी आदि का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा चुका है.

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यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि सार्वजनिक अवकाश, राष्ट्रीय शोक और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं. श्रीदेवी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था. लेकिन उनके समय बाकी दो चीजें नहीं थीं. राजकीय सम्मान के मामले में भी केवल उनका पार्थिव शरीर तिरंगे से लपेटा गया था.

1997 में जारी केंद्र सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार, केवल वर्तमान प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के निधन की स्थिति में सार्वजनिक अवकाश दिया जा सकता है.

इस स्टोरी के लिए इंडिया टुडे हिंदी के साथी ‘सुमित’ ने मदद की है.

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