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यूपी में लेखपाल का पेपर भी लीक हुआ था? यूपी सरकार ने इसका जवाब दे दिया

UP Lekhpal Paper Leak मामले पर Uttar Pradesh के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर किया गया, जिसमें पेपर लीक होने और गड़बड़ी होने के दावों को खारिज कर दिया गया.

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यूपी लेखपाल पेपर लीक केस पर सरकार का बयान आ गया. (फोटो- इंडिया टुडे)

उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से कराई गई लेखपाल भर्ती परीक्षा के बाद पेपर लीक और गड़बड़ी की बात सामने आने लगी थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर लोग पेपर लीक का दावा करने लगे थे. अब इस मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक बयान सामने आया है. बयान में पेपर लीक की बात को साफतौर पर खारिज कर दिया गया.

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लेखपाल पेपर लीक मामले पर उत्तर प्रदेश के सूचना और जनसंपर्क विभाग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया गया, जिसमें परीक्षा के लीक होने और गड़बड़ी होने के दावों को खारिज कर दिया गया. विभाग ने अपनी पोस्ट में लिखा,

लेखपाल मुख्य परीक्षा-2026 उत्तर प्रदेश के 44 जनपदों के 861 परीक्षा केंद्रों पर दिनांक 21 मई 2026 को पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और बिना किसी रुकावट के शांतिपूर्वक कराई गई. परीक्षा के लिए 3 लाख 66 हजार 712 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 3 लाख एक हजार 756 (82.29%) अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया.

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यूपी सरकार का बयान.

विभाग ने अपने पोस्ट में बताया कि लेखपाल परीक्षा के लीक की जानकारी मिलने पर अधिकारियों ने फौरन इसका संज्ञान लिया. साथ ही संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच भी शुरू कर दी. जांच में पाया गया कि लेखपाल परीक्षा लीक की बात पूरी तरह से भ्रामक और झूठी है. पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि लेखपाल परीक्षा (2026) को निष्पक्ष, पारदर्शी और सफलतापूर्वक कराया गया है. 

बता दें कि सूबे में 21 मई 2026 को करीब 44 जिलों के 861 एग्जाम सेंटर्स पर परीक्षा कराई गई थी. इसके बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर कई फोटो और वीडियो वायरल होने लगे थे, जिनमें पेपर लीक होने का दावा किया जा रहा था. UNI की रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने के बाद ही कुछ लोगों ने लखनऊ के ऐशबाग इलाके में गोपीनाथ लक्ष्मण दास रस्तोगी इंटर कॉलेज में पेपर लीक की अफवाहें फैलाने का प्रयास किया. 

इसकी सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन एक्शन में आ गया. साथ ही आयोग और मॉनिटर करने वाली टीमों ने फौरन इसकी जांच शुरू कर दी. टीम की जांच में यह बात साफ हुई कि क्वेश्चन पेपर और ओएमआर शीट पूरी तरह से सीलबंद और सुरक्षित थे.

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