The Lallantop

बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर 9 किमी दूर पेंशन लेने पहुंची महिला, लोग बोले- 'कागज पर डिजिटल इंडिया'

Chhattisgarh News: यह घटना Chhattisgarh के सरगुजा जिले की है. स्थानीय लोगों ने बताया कि सुखमनिया बाई नाम की एक महिला ने अपनी बुजुर्ग सास को अपनी पीठ पर लादकर करीब 9 किलोमीटर का सफर तय किया, ताकि उनकी सास बैंक से अपनी पेंशन ले सकें. क्या है पूरा मामला?

Advertisement
post-main-image
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. (फोटो: ITG)
author-image
सुमित सिंह

छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला. चिलचिलाती धूप. जंगल के पथरीले और दुर्गम रास्ते. इन्हीं रास्तों से नंगे पैर गुजरते हुए एक महिला अपनी 90 साल की बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर आगे बढ़ती जा रही है. यह दृश्य देखकर स्मृति में विक्रम-बेताल की कहानियां उभर आती हैं. लेकिन यह कोई लोककथा नहीं है. इसमें बोझ के साथ-साथ दुख और बेबसी भी है. यह 21वीं सदी के भारत की तस्वीर है, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
क्या है पूरा मामला?

यह घटना सरगुजा जिले के मैनपाट इलाके की है. इंडिया टुडे से जुड़े सुमित सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने बताया कि सुखमनिया बाई नाम की एक महिला ने अपनी बुजुर्ग सास को अपनी पीठ पर लादकर करीब 9 किलोमीटर का सफर तय किया, ताकि उनकी सास बैंक से अपनी पेंशन ले सकें. लोगों का कहना है कि जंगल वाले इलाके में खराब ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी की वजह से गांव वालों को अक्सर बुनियादी सुविधाएं पाने के लिए भी ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.

स्थानीय लोगों ने आगे दावा किया कि सुखमनिया बाई महीनों से ऐसे ही चक्कर लगा रही हैं क्योंकि पेंशन नियमों के मुताबिक, पेमेंट जारी होने से पहले लाभार्थियों को फिंगरप्रिंट या पहचान वेरिफिकेशन के लिए बैंक में खुद मौजूद रहना होता है. हालांकि, जिस बात ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है, वह है वीडियो में सुनाई देने वाली बातचीत.

Advertisement
क्या बताया महिला ने?

वीडियो रिकॉर्ड कर रहे एक आदमी को लोकल भाषा में सुखमनिया से पूछते हुए सुना जा सकता है कि वे अपनी बुजुर्ग सास को इतनी लंबी दूरी तक क्यों ले जा रही हैं. जवाब में वे कहती हैं कि पेंशन का पैसा तभी मिलता है जब लाभार्थी खुद बैंक जाए. महिला आगे बताती है कि इस इलाके में आने-जाने के लिए कोई साधन नहीं है और इस सफर में कई छोटी नदियां और ऊबड़-खाबड़ जंगली रास्ते पार करने पड़ते हैं.

बातचीत के दौरान सुखमनिया बताती है कि उनके परिवार को पेंशन के तौर पर करीब 1,500 रुपये प्रति महीना मिलते हैं, जो कभी-कभी कई महीनों का एक साथ दिया जाता है. वे यह भी बताती हैं कि पहले पेंशन का पैसा स्थानीय स्तर पर ही मिल जाता था या लाभार्थियों तक आसानी से पहुंच जाता था, लेकिन अब वो सिस्टम काम नहीं कर रहा है. इसकी वजह से उनके जैसे परिवारों को बुनियादी सरकारी मदद पाने के लिए भी ऐसा मुश्किल सफर करना पड़ रहा है.

ये भी पढ़ें: बहन का कंकाल लेकर बैंक जाने वाले जीतू मुंडा अब उनसे माफी क्यों मांगते रहते हैं?

Advertisement

इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. 

Chhattisgarh Woman video viral
(फोटो: X)
Chhattisgarh Woman video viral
(फोटो: X)

कई यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि 'डिजिटल इंडिया' और सरकारी सेवाओं की 'घर-घर डिलीवरी' के दावों तो किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बुजुर्ग और बिस्तर पर पड़े पेंशनभोगियों को आज भी अपनी पहचान साबित करने के लिए इतनी लंबी यात्राएं क्यों करनी पड़ रही हैं?

वीडियो: झारखंड में पत्नी और कुत्ते को एक ही कब्र में दफन करने वाले के साथ क्या हुआ?

Advertisement