महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे (Tukaram Mundhe) फिर से चर्चा में हैं. उन्होंने 20 अगस्त को पूरे राज्य में खुले तेल की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है. एफडीए चीफ ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खाने के तेल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर नागरिकों की सेहत से जुड़ा है. इस स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
खाने के तेल में मिलावट की तो खैर नहीं! FDA चीफ तुकाराम मुंडे ने दिए सख्त निर्देश
महाराष्ट्र में अब खुला खाने का तेल बेचने पर पाबंदी लगा दी गई है. FDA चीफ Tukaram Mundhe ने पूरे राज्य के लिए नए निर्देश जारी किए हैं. सरसों के तेल में मिलावट, गलत लेबलिंग, घटिया पैकेजिंग और इस्तेमाल किए तेल को दोबारा बेचने पर कार्रवाई होगी.

उन्होंने आगे कहा कि गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. मुंडे ने आम नागरिकों से अपील की है कि कहीं से भी खुला तेल नहीं खरीदेंं. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने बिना रजिस्ट्रेशन वाली खाने के तेल की कंपनियों की पहचान की है. उनमें मिलावट के मामले भी पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि तेलों में मिलावट की जा रही थी और लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी.
खुले में तेल बेचने पर पाबंदीखाने के तेल को खुले रूप में बेचने पर पहले से ही रोक है. लेकिन फिर भी ऐसा तेल मार्केट में बिक रहा है. मुंडे ने दुकानदारों से ऐसा न करने को कहा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने जोर देकर कहा कि सरसों का तेल 100% शुद्ध सरसों के तेल के तौर पर ही बेचा जाना चाहिए. उसमें कोई मिलावट नहीं होनी चाहिए. सिर्फ पैकेट वाला खाने का तेल ही बेचा जाना चाहिए. उन्होंने कहा,
अभी बड़े पैमाने पर खुला तेल बेचा जा रहा है. लेकिन यह पता नहीं है कि वह कहां से आ रहा है. यह खाने के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है. इसके अलावा, तलने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है. होटलों में ऐसा अक्सर होता है.
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाईइन हालात को देखते हुए, महाराष्ट्र FDA के चीफ ने एक आदेश जारी किया है. उन्होंने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' के तहत खाने के तेल और फैट सेक्टर के लिए पूरे राज्य में लागू होने वाला एक विस्तृत नियम जारी किया है. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह सिर्फ रिटेलर्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर लागू होता है. तेल निकालने वाली यूनिट्स से लेकर ऑनलाइन सेलर्स तक, सभी को इसे मानना होगा.
यह कदम महाराष्ट्र FDA की जांच के बाद उठाया गया है. जांच में खाने के तेल की सप्लाई चेन में बड़े पैमाने पर और लगातार नियमों का उल्लंघन पाया गया. जैसे
- बिना वैध लाइसेंस के या गलत 'बिज़नेस के प्रकार' (KoB) कैटेगरी के तहत काम करना.
- बताए गए तेल में सस्ते और बिना बताए गए तेलों की मिलावट करना.
- तय एसिड वैल्यू और इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट लिमिट से अधिक खराब क्वालिटी का तेल बेचना.
- सरसों के तेल की अनाधिकृत ब्लेंडिंग (मिलावट).
- प्रोडक्ट्स के असली सोर्स और तारीख को छिपाने के लिए उन पर दोबारा लेबल लगाना.
- एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुके तेल की दोबारा पैकेजिंग करना.
- नॉन-फूड-ग्रेड पैकेजिंग का इस्तेमाल करना.
इन्हीं हालातों को देखते हुए FDA चीफ ने ये आदेश जारी किया है. आदेश के तहत पूरे महाराष्ट्र में नियमों के पालन के लिए एक समान और स्पष्ट व्यवस्था बनेगी.
FDA चीफ ने मिनरल ऑयल, लुब्रिकेंट, पेंट या केमिकल्स वाले कंटेरनों के दोबारा इस्तेमाल करने पर चिंता जताई. स्पॉट-वेल्डेड वाले डिब्बों के इस्तेमाल बंद करने की भी बात की. उन्होंने कहा कि खाने की पैकेजिंग के लिए सिंगल-यूज टिन के डिब्बे का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. जंग लगे, टूटे हुए या गलत तरीके से डिब्बाबंद बर्तन में खाना नुकसानदायक हो सकता है.
तेल को दोबारा गर्म करना खतरनाकप्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंडे ने तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल करने पर भी बात की. उन्होंने कहा कि बार-बार तेल गर्म करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने से हानिकारक 'टोटल पोलर कंपाउंड्स' (TPC), ट्रांस-फैटी एसिड, एल्डिहाइड और दूसरे कंपाउंड्स बनते हैं. इनके सेवन से डिस्लिपिडेमिया (खून में कोलेस्ट्रॉल या फैट बढ़ना), एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों की रुकावट), हाइपरटेंशन, लिवर और किडनी को नुकसान और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
उन्होंने कहा कि 25% से ज्यादा TPC वाले तेल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वहीं ताजे तेल में TPC 15% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इस्तेमाल किए गए तेल को अधिकृत 'रीपरपज यूज्ड कुकिंग ऑयल' (RUCO) कलेक्शन करने वालों को सौंपना होगा. किसी भी हालत में इसे दोबारा खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. साथ ही उन्होंने बताया कि नियमों की अनदेखी करने पर सजा भी हो सकती है. इसके तहत,
- असुरक्षित खाना: धारा 59 के तहत जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना.
- घटिया क्वालिटी का तेल: 5 लाख रुपये तक का जुर्माना.
- गलत लेबल वाला तेल: 3 लाख रुपये तक का जुर्माना.
- मिलावट की चीज़ें पास रखना: 10 लाख रुपये तक का जुर्माना.
- बिना सही लाइसेंस के काम करना: 10 लाख रुपये तक का जुर्माना.
- गुमराह करने वाले विज्ञापन: 10 लाख रुपये तक का जुर्माना.
कंपनियों से जुड़े मामलों में, नियमों का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार डायरेक्टर, पार्टनर और मैनेजर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. जरूरत पड़ने पर सुधार के नोटिस जारी करने, और लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
उठाए जा रहे जरूरी कदमFDA ने सभी फील्ड के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश लागू करना सुनिश्चित करें. मिलावट, असुरक्षित भोजन, कंटामिनेशन और घटिया तेल से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जाए. सुनवाई के दौरान, उल्लंघन की गंभीरता के हिसाब से सजा तय करने के लिए सभी जरूरी तथ्य और सबूत पेश किए जाएं.
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FDA ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे खुला खाने का तेल न खरीदें और लेबल, बैच नंबर, पैकेजिंग की तारीख और 'बेस्ट बिफोर' (इस्तेमाल की आखिरी तारीख) की जांच करने के बाद ही सीलबंद तेल खरीदें. यह भी कहा गया है कि वे पुराने, जंग लगे या दोबारा इस्तेमाल किए गए डिब्बों में बेचे जाने वाले तेल को न लें. हमेशा खरीद की रसीद या टैक्स इनवॉइस मांगें. कई स्रोतों से बने खाने के तेल के मामले में, उपभोक्ताओं को AGMARK लोगो और उसमें मौजूद चीजों की मात्रा (परसेंटेज) की जांच करनी चाहिए. सुपर-रिफाइंड या डबल-रिफाइंड जैसे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
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