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महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से 48 लाख नाम साफ? 25 सीटों पर 10 में से 4 वोटर छूट गए

Maharashtra की 288 विधानसभा सीटों में से 25 शहरी सीटों पर बड़ी गड़बड़ी हुई है. यहां 40 प्रतिशत से ज्यादा वोटरों के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) फॉर्म जमा नहीं हो पाए. अब 31 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम शामिल नहीं हो पाएंगे. क्या है वजह?

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महाराष्ट्र की 25 सीटों पर 48 लाख वोटरों के SIR फॉर्म जमा नहीं हो पाए हैं. (सांकेतिक फोटो: इंडिया टुडे)

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  • महाराष्ट्र की 25 शहरी सीटों पर करीब 48 लाख वोटरों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) फॉर्म जमा नहीं हो पाए हैं, जिससे उनके नाम 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होंगे।
  • घनी आबादी और ऊंची इमारतों वाले इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर वेरिफिकेशन करने में असमर्थ रहे, जिसके कारण वोटरों तक सही तरीके से फॉर्म नहीं पहुंच सके।
  • 31 अगस्त को ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद योग्य वोटर फॉर्म 8 से करेक्शन और फॉर्म 6 से नाम शामिल करने का दावा कर सकते हैं, जबकि फाइनल वोटर लिस्ट 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगी।

महाराष्ट्र की 25 शहरी सीटों पर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. यहां के लगभग 48 लाख वोटरों के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) फॉर्म जमा नहीं हो पाए हैं. इस वजह से 31 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में इनके नाम शामिल नहीं होंगे. कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) शहरी इलाकों में वोटरों तक पहुंचने में होने वाली मुश्किलों को इसकी वजह बताते हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 25 सीटों में से 17 मुंबई मेट्रोपॉलिटन इलाके में, सात पुणे में और एक नागपुर में है. इन 25 सीटों पर कुल 1.10 करोड़ वोटर हैं. इनमें से 48.17 लाख (यानी 43.7 प्रतिशत) का पता नहीं चल पाया. राज्य में जमा न हो पाए कुल फॉर्मों में से लगभग एक-चौथाई इन्हीं सीटों से हैं. 

महाराष्ट्र के 9.78 करोड़ वोटरों में से 2.07 करोड़ (यानी 21.16%) के फॉर्म जमा नहीं हो पाए. ऐसे वोटरों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाएंगे और उन्हें अपना नाम लिस्ट में वापस जुड़वाने के लिए दावा (क्लेम) करना होगा.

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क्या है वजह?

घनी आबादी वाले इलाकों और ऊंची इमारतों की वजह से घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना मुश्किल हो जाता है. मुंबई, ठाणे और पुणे में लोगों ने बताया है कि BLO हर घर तक नहीं पहुंचते. इसके बजाय बिल्डिंग के गेट पर ही फॉर्म छोड़ देते हैं. महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकलिंगम ने कहा, 

"लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं और उनके चुनावी रिकॉर्ड हमेशा अपडेट नहीं होते. एक और बात जिस पर ध्यान देने की जरूरत है, वह यह है कि यह बड़ा सुधार 24 साल से ज्यादा समय के बाद किया जा रहा है. पिछली बार ऐसा सुधार (SIR) 2002 में हुआ था और तब से वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट नहीं किया गया है. हमें लगभग 34 लाख मृत वोटरों के नामों को भी ध्यान में रखना होगा."

चोकलिंगम ने यह भी कहा कि ड्राफ्ट रोल, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं है. योग्य वोटर क्लेम और ऑब्जेक्शन के समय फॉर्म 8 के जरिए करेक्शन मांग सकते हैं. इसके अलावा वे फॉर्म 6 के जरिए नाम शामिल करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

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क्या कहता है डेटा?

वोटर लिस्ट की यह गड़बड़ी किसी एक वर्ग, पार्टी या इलाके तक सीमित नहीं है. इसे तीन प्वाइंट्स से समझा जा सकता है:

1. राजनीतिक नुकसान सबको: प्रभावित सीटों में BJP, शिवसेना, अजित पवार की अगुवाई वाली NCP और समाजवादी पार्टी सभी के मजबूत गढ़ शामिल हैं. इसलिए इसका नुकसान किसी एक दल को नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों को होगा.

2. अमीर-गरीब का भेद नहीं: यह समस्या जितनी झुग्गी-झोपड़ियों और मुस्लिम/दलित बहुल इलाकों (जैसे मानखुर्द और भिवंडी) में है, उतनी ही वीआईपी और अमीर इलाकों (जैसे मालाबार हिल और कोलाबा) और मध्यम-वर्गीय क्षेत्रों (जैसे कोथरूड) में भी है. यानी, पॉश सोसायटियों से लेकर बस्तियों तक के वोटर छूटे हैं.

3. आरक्षित सीटों पर भी असर: अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित तीन प्रमुख सीटें- अंबरनाथ, पिंपरी और पुणे छावनी- भी इस संकट की चपेट में हैं. यहां 40% से ज्यादा वोटरों के फॉर्म जमा नहीं हो पाए हैं.

घर-घर जाकर सर्वे 30 जून से 18 अगस्त तक चला. 31 अगस्त को ड्राफ्ट रोल पब्लिश होने के बाद क्लेम और ऑब्जेक्शन शुरू होंगे. फाइनल रोल 19 अक्टूबर को जारी किया जाएगा.

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