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पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, सिख दंगा मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया. वो पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. साल 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दोषी थे. साल 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनको इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वे दिल्ली से तीन बार सांसद चुने गए थे.

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कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है. (इंडिया टुडे)

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  • कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार, जो 1984 सिख दंगों के दोषी थे और तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे, का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है।
  • 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों में शामिल होने के आरोपों के कारण सज्जन कुमार को अदालतों ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके मामलों और सजा संबंधी कानूनी प्रक्रियाओं का प्रभाव सामने आएगा और मामले में आगे की जांच या कार्रवाई पर ध्यान दिया जाएगा।

तिहाड़ जेल में बंद कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है. उनकी उम्र 80 साल थी. वो काफी समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे. सज्जन कुमार को 20 अगस्त को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया. सज्जन कुमार 1984 सिख दंगों के दोषी थे. दंगे से जुड़े दो मामलों में उनको कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिली थी. एक केस में उनको बरी कर दिया गया था. वे तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे.

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सज्जन कुमार कौन थे?

सज्जन कुमार कांग्रेस के नेता रहे. वो 1970 के दशक से दिल्ली की राजनीति में एक्टिव थे. उन्होंने सबसे पहले साल 1977 में दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद बने. फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव चुने गए. इसके बाद साल 1980 में चौधरी ब्रह्म प्रकाश को हराकर पहली बार सांसद बने. सज्जन कुमार को संजय गांधी का करीबी माना जाता था.

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साल 1984 में उन पर सिख दंगों में शामिल होने का आरोप लगा, जिसके चलते लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काट दिया गया. साल 1991 में पार्टी ने उनको फिर से टिकट दिया, और वो सांसद चुने गए. लेकिन इसके बाद उनको टिकट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. साल 2004 में कांग्रेस ने उनको एक बार फिर टिकट दिया. इस बार वे बाहरी दिल्ली सीट से चुनाव लड़े और तीसरी बार सांसद बने.

साल 2018 में सिख विरोधी दंगा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से उम्रकैद मिलने के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस छोड़ दी. फरवरी 2025 में उनको सिख दंगों के एक और मामले में भी उम्रकैद की सजा हुई.

सज्जन कुमार के खिलाफ क्या मामले थे?

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31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिक्योरिटी गार्ड्स ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे. सज्जन कुमार से जुड़ा पहला मामला दिल्ली छावनी इलाके में पांच सिखों की हत्या से जुड़ा था.

दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में पांच सिखों केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी. इस मामले की एक प्रमुख शिकायतकर्ता और चश्मदीद जगदीश कौर थीं. दंगों में उनके पति केहर सिंह और बेटे गुरप्रीत सिंह की हत्या कर दी गई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सज्जन कुमार को 17 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई.

सितंबर 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. इस मामले में गवाह चाम कौर ने उन पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया था.

1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या हुई थी. 12 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया गया. 25 फरवरी को इस मामले में भी उनको उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

ये भी पढ़ें - 1984 सिख दंगे: वो केस क्या है जिसमें पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार दोषी साबित हुए हैं?

सिख दंगों में लगभग 3500 लोगों की मौत

31 अक्टूबर, 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई. इसके अगले ही दिन 1 नवंबर से दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के. इस दंगे में दिल्ली में करीब 2700 और पूरे देश में लगभग 3500 लोगों की मौत हुई. मई 2000 में इसकी जांच के लिए जीटी नानावटी कमीशन बना. इसकी सिफारिश के आधार पर CBI ने केस दर्ज किया. साल 2010 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने सज्जन कुमार समेत बाकी अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. 

वीडियो: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार समेत 4 दोषियों को सिख दंगे में सजा मिली है

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