अभिजीत दिपके. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक. उनके आंदोलन ने देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर किया. अब उनके निशाने पर महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री हैं. दिपके ने राज्य के स्कूलों की बदतर हालात को लेकर राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भूसे के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर तंज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के सरकारी स्कूल के छात्रों से बेहतर सुविधाएं नेताओं के कुत्तों को मिलती हैं.
'छात्रों से बेहतर सुविधाएं नेताओं के कुत्तों को मिलती हैं', अभिजीत दिपके ने एक और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अब महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. दरअसल उन्होंने महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान के तहत वे एक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे. स्कूल की हालत देख कर उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए.

बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठाए सवाल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP के संस्थापक दिपके ने 20 अगस्त को लातूर की औसा तहसील के उजानी गांव के एक जिला परिषद स्कूल का दौरा किया. स्कूल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने कहा,
कई स्कूलों में आज भी पक्की क्लासेज, बैठने के लिए बेंच, पीने का पानी, सुरक्षित रास्ते और साफ टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं. टीन की छतों से बारिश का पानी टपक रहा है. कुछ स्कूलों में तो छात्रों की पढ़ाई के लिए जानवरों से भी बदतर हालात हैं. यह छात्रों के जीवन का सवाल है.
CJP ने पिछले हफ्ते ही राज्य में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है, इसका मकसद ग्राउंड जीरो पर जाकर स्कूलों की असली हालत सामने लाना है. अभिजीत दिपके ने कहा कि स्कूलों की स्थिति के लिए चुने गए प्रतिनिधियों और मंत्रियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने लोगों से कहा कि वे नेताओं पर शिक्षा को प्राथमिकता देने का प्रेशर डालें. दिपके ने कहा,
जब नेता छात्रों के लिए कुछ नहीं कर रहे तो लोग उन्हें वोट ही क्यों दें? क्या सिर्फ हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए? नेता कहते हैं कि धर्म खतरे में है. इतने सालों में धर्म खत्म नहीं हुआ और न होगा. लेकिन इन बदहाल स्कूलों में हमारे बच्चों का भविष्य जरूर खत्म हो रहा है.
शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए
अभिजीत दिपके ने आह्वान किया कि जैसे लोग धर्म और जाति का झंडा लेकर निकलते हैं, वैसे ही उन्हें अब अपने बच्चों के स्कूलों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरना चाहिए. मीडिया ने दिपके से पूछा कि क्या दादा भूसे को शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहना चाहिए. इसके जवाब में उन्होंने कहा,
स्कूलों की हालत देखकर मुझे लगता है कि उनको अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
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इसके साथ ही उन्होंने एक और मांग कर डाली. दिपके ने कहा कि अगर सरकार सरकारी स्कूलों में सुधार की जरूरत को महसूस करना चाहती है, तो मंत्रियों और चुने हुए प्रतिनिधियों को अपने बच्चों को इन्हीं स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजना चाहिए.
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