आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर साइंस के बढ़ते दौर में जहां एजुकेशन का फोकस टेक्नोलॉजी और बढ़िया नौकरी हासिल करने पर है, वहीं IISc बेंगलुरु के प्रोफेसर प्रतोष एपी ने पारंपरिक भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने बताया कि IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भी उनके साथ संस्कृत और शास्त्रों की पढ़ाई कर रहे हैं. उनका मानना है कि शास्त्रों की स्टडी सिर्फ धार्मिक या आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे इंसान की सोचने, तर्क करने और चीजों को समझने की क्षमता भी डेवलप होती है.
'AI के दौर में IIT के छात्र शास्त्र पढ़ रहे', IISc प्रोफेसर ने वजह बता दी
IISc बेंगलुरु के प्रोफेसर प्रतोष एपी मॉडर्न साइंस समझने कि लिए शास्त्रों की पढ़ाई पर जोर देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर AI जैसी पावरफुल टेक्नोलॉजी ऐसे लोगों के हाथ में होगी, जिन्हें धर्म और सही-गलत की समझ नहीं है, तो इसके नतीजे चिंताजनक हो सकते हैं.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु के प्रोफेसर प्रतोष एपी ने अपने X अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया. इसमें उन्होंने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के कुछ स्टूडेंट्स और IIT में एडमिशन के लिए जरूरी जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) में भी शानदार परफॉर्म करने वाले छात्र उनसे संस्कृत और शास्त्रों की पढ़ाई की अहमियत समझने आए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर प्रतोष एपी ने एक स्टूडेंट का उदाहरण देते हुए बताया कि वो पिछले पांच साल से उनसे न्याय शास्त्र पढ़ रहा है. स्टूडेंट ने उनसे कहा कि वो 10 साल तक उनके साथ शास्त्र की पढ़ाई करेगा, ताकि ये साबित कर सके कि प्रोफेसर जो बातें कहते हैं, वे गलत हैं.
इस पर प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है. अगर छात्र तर्क और बुद्धि के आधार पर चार्वाक दर्शन को भी सही मानते हैं, तो उन्हें खुशी होगी. कम से कम वे एक अच्छे तार्किक चार्वाक तो बनेंगे. चार्वाक वो दर्शन है, जो भोगवाद को स्वीकार करता है. माने, फुल मैटेरियलिस्टिक.
AI के इस्तेमाल में भी काम आएंगे शास्त्रप्रोफेसर प्रतोष ने कहा कि आज IIT के स्टूडेंट्स के लिए सफलता का मतलब अच्छे स्टडी इंस्टीट्यूट में दाखिला, अच्छी नौकरी और पैसा कमाना बन गया है. लेकिन शास्त्रों का अध्ययन उन्हें इससे आगे सोचने की क्षमता देता है.
उन्होंने AI के बढ़ते इन्फ्लुएंस का जिक्र करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी कितनी पावरफुल होगी, ये तो हम देख रहे हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में होना चाहिए, ये समझना भी जरूरी है.
उन्होंने महाभारत का उदाहरण दिया. कहा कि एल्गोरिदम ऐसे बनाए जाने चाहिए, जिनसे इंसान की जिंदगी बेहतर हो. दलील दी कि अगर पावरफुल टेक्नोलॉजी ऐसे लोगों के हाथ में होगी, जिन्हें धर्म और सही-गलत की समझ नहीं है, तो इसके नतीजे टेंशन देने वाले हो सकते हैं.
1 साल में सीख सकेंगे क्वांटम फिजिक्सप्रोफेसर ने शास्त्रों की पढ़ाई के तीन पहलू बताए. इनमें बौद्धिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पहलू शामिल हैं. उन्होंने कहा कि न्याय शास्त्र का लंबे समय तक अध्ययन करने से तर्क करने की क्षमता इतनी मजबूत हो सकती है कि 12 साल तक इसे पढ़ने वाले शख्स को एक साल में क्वांटम फिजिक्स और मैथ्स सिखाई जा सकती है. उन्होंने कहा अपने इस दावे की सपोर्ट में उन्होंने एक्सपेरिमेंट भी किए हैं.
उन्होंने बृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी की कन्वर्सेशन का भी जिक्र किया. इसमें धन, सुख और अमरत्व जैसे सवालों पर चर्चा की गई है.
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प्रोफेसर ने कहा कि प्राचीन ग्रंथों को सिर्फ इसलिए नहीं पढ़ना चाहिए कि उनमें मॉडर्न साइंस की बातें खोजी जा सकें. उनका असली मकसद इंसान की समझ और इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी को डेवलप करना है. प्रोफेसर ने कहा,
"आप खरपतवार के लिए फसल नहीं उगाते, आप फसल सिर्फ फसल पाने के लिए उगाते हैं."
प्रोफेसर प्रतोष एपी ने अपनी बात रखते हुए आगे कहा, "शास्त्र आपको सीखना सिखाते हैं." उनके मुताबिक सवाल यह नहीं होना चाहिए कि शास्त्र क्यों पढ़ें, बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि आखिर इन्हें पढ़ा क्यों नहीं जा रहा है.
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