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DU कॉलेज की प्रिंसिपल ने क्लास में गोबर लगाया, DUSU अध्यक्ष ने उनका ऑफिस गोबर से पोत दिया

Delhi University में गोबर विवाद छाया रहा. लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल ने गर्मी से बचाव के लिए क्लासरूम में गोबर लगाया, तो विरोध में DUSU अध्यक्ष रौनक खत्री ने उनके ऑफिस में जाकर गोबर पोत दिया. जानिए पूरा मामला.

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15 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 16 अप्रैल 2025, 11:33 AM IST)
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DUSU प्रेसिडेंट रौनक खत्री (बाएं) ने लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्रिंसिपल रूम में गोबर लगाया. (PTI/X)
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दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में गोबर को लेकर एक बार फिर हंगामा हो गया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के अध्यक्ष रौनक खत्री ने लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल के ऑफिस में गोबर पोत दिया. लेकिन ये गोबर-पुताई यूं ही नहीं हुई, इसके पीछे प्रिंसिपल मैडम की 'कूलिंग थ्योरी' और कुछ स्टूडेंट्स का गुस्सा शामिल है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बात तब शुरू हुई जब लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल प्रत्युष वत्सला का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में प्रिंसिपल क्लासरूम की दीवारों पर गोबर लेप रही थीं. उनका दावा था कि ये देसी जुगाड़ गर्मी भगाने का अच्छा तरीका है. प्रिंसिपल ने स्टाफ के साथ मिलकर C ब्लॉक की क्लासरूम में गोबर की लिपाई की और कहा कि ये 'इंडिजनस मेथड' है. लेकिन स्टूडेंट्स को ये जुगाड़ कुछ खास रास नहीं आया.

DUSU अध्यक्ष रौनक खत्री ने इसे 'बेतुका और अवैज्ञानिक' करार दिया. मंगलवार, 15 अप्रैल को गुस्से में आकर खत्री और कुछ स्टूडेंट्स प्रिंसिपल के ऑफिस पहुंचे. प्रिंसिपल मैडम उस वक्त वहां थीं नहीं, तो खत्री ने वाइस प्रिंसिपल से बहस की और फिर ऑफिस की दीवारों और वॉशरूम तक में गोबर पोत डाला.

खत्री ने वाइस प्रिंसिपल से कहा,

रिसर्च प्रोजेक्ट का ज्ञान आप मुझे मत दीजिए. अगर आपको रिसर्च करना है, तो आप वो रिसर्च अपने घर पर कीजिए. जिसको बुलाना चाहो आप बुलाओ. हम मैडम के आज रूम में, जो रिसर्च उन्होंने की है, वो रिसर्च यहां भी लागू होनी चाहिए. यहां होगी लागू, पूरी तरह से लागू होगी. बुला लो जिसको बुलाना है.

खत्री आगे कहते हैं,

ये एक ही दिन में गोबर साफ करा देंगे अपने रूम में से. मैडम होती, तो उनसे बात की जाती, मैडम हैं ही नहीं.

खत्री ने पूछा कि मैडम और कहां बैठती हैं? वाइस प्रिंसिपल जवाब देती हैं, तो खत्री कहते हैं,

मैडम काम में बिजी हैं, गोबर लगाने का समय मिल जाता है. आपके रूम में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनर, स्टूडेंट्स पढ़ें गोबर की क्लासरूम में.

इसके बाद खत्री प्रिंसिपल के वाशरूम में जाते हैं और कहते हैं-

बच्चों के लिए यहां वॉशरूम की हालत इतनी त्रस्त है, इतनी त्रस्त है. स्टूडेंट्स को साफ टॉयलेट भी नसीब नहीं है.

इसके बाद खत्री वॉशरूम में भी गोबर फेंकते नजर आते हैं.

कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन (NSUI) के छात्र नेता रौनक खत्री ने कहा कि प्रिंसिपल ने जो 'गर्मी से बचने के लिए' क्लासरूम को गाय के गोबर से लीपा, उसके विरोध में उन्होंने यह काम किया है.

 

वहीं क्लासरूम की दीवारों पर गोबर से लिपाई करने पर प्रिंसिपल वत्सला ने सफाई दी थी. उनके मुताबिक, ये सब एक रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा था, जिसका नाम 'स्टडी ऑफ हीट स्ट्रेस कंट्रोल बाय यूजिंग ट्रेडिशनल इंडियन नॉलेज’ है. उनका कहना है कि वो सिर्फ एक पोर्टा कैबिन में टेस्ट कर रही थीं और गोबर को छूने में कोई हर्ज नहीं है.

प्रिंसिपल प्रत्युष वत्सला ने रौनक खत्री के प्रिंसिपल ऑफिस में गोबर लगाने पर कहा,

हां, स्टूडेंट्स के साथ चर्चा हुई थी. मैं वहां (कॉलेज) नहीं थी. मुझे किसी ने वॉट्सऐप पर मैसेज किया कि मुझसे मिलने रौनक खत्री आने वाले हैं, लेकिन मेरा पहले से प्रोग्राम तय था. जब वो आए तो मैं वहां नहीं थी. स्टूडेंट्स कभी-कभी जोश में कुछ कर जाते हैं. मैं पहले अपने स्टाफ से बात करूंगी, फिर देखते हैं क्या करना है.

प्रिंसिपल ने ये भी कहा कि वे रिसर्च की पूरी जानकारी एक हफ्ते बाद दे पाएंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना पूरी बात जाने गलतफहमी फैला रहे हैं. वहीं, कई स्टूडेंट्स ने ऐसे रिसर्च का कोई साइंटिफिक आधार ना होने की वजह से अपनी सेहत को लेकर चिंता जताई है.

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