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'मोदी सरकार का सिरदर्द...', INDIA-ब्लॉक की रैली को US से लेकर पाकिस्तान के मीडिया की नजर

Rahul Gandhi rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए INDIA ब्लॉक की रैली को विदेशी मीडिया में भी अच्छी कवरेज मिली है. दिलचस्प बात यह है कि 4 अलग-अलग प्रमुख मीडिया संस्थानों ने रैली को एक दूसरे से अलहदा नजरिए से कवर किया है.

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रामलीला मैदान में हुए रैली को विदेशी मीडिया ने अलग-अलग नज़रिए से देखा है. (courtesy: ITG)

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  • दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक की रैली हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और बीजेपी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक विरोध व्यक्त किया गया।
  • रैली का आयोजन मुख्यतः वोटर लिस्ट में बदलाव और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच राजनीतिक चेतावनी के रूप में हुआ, जिसमें विभिन्न आंदोलनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई।
  • विदेशी मीडिया रिपोर्टों में इस रैली को बढ़ती राजनीतिक चुनौती और भारत में लोकतांत्रिक असंतोष का संकेत माना गया, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई।

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA ब्लॉक की रैली को विदेशी मीडिया ने भी कवर किया. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि चार बड़े मीडिया संस्थानों ने एक ही रैली को चार अलग-अलग नजरियों से देखा. एक संस्थान ने इसे नरेंद्र मोदी सरकार के सामने बढ़ती राजनीतिक चुनौती बताया. किसी दूसरे मीडिया हाउस ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठते सवालों को प्रमुखता दी. वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में रैली की भीड़ और विपक्ष की एकजुटता का भी विश्लेषण किया गया.

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रैली में भीड़ कितनी जुटी? क्या विपक्ष अलग-अलग आंदोलनों को एक मंच पर लाने में कामयाब रहा? और क्या ये मोदी सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत है? विदेशी मीडिया की नज़र से समझते हैं. 

द न्यू यॉर्क टाइम्स ने राहुल गांधी के भाषण को दी प्रमुखता

अमेरिकी मीडिया संस्थान द न्यू यॉर्क टाइम्स की हेडलाइन थी, “मोदी और वोट रोल में बदलाव के विरोध में आए सैंकड़ों लोग”. इसमें राहुल गांधी के भाषण को प्रमुखता दी गई. राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की आत्मा चुरा ली है. रिपोर्ट में वोटर लिस्ट के रिवीजन के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने का आंकड़ा भी दिया गया है.

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लेकिन इस रिपोर्ट की खास बात सिर्फ नेताओं के बयानों का जिक्र नहीं है. इसमें आम प्रदर्शनकारियों के अनुभव भी शामिल किए गए हैं. माया जोशी नाम की एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उनकी बहन का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. वहीं, रामाकांत साहू ने देश के लोकतंत्र को लेकर चिंता जाहिर की.

जापान टाइम्स की हेडलाइन

द जापान टाइम्स की हेडलाइन थी, 'भारत में बढ़ता लोगों का विरोध, मोदी का सिरदर्द बन गया है.' भारत के अलग-अलग आंदोलन एकजुट होकर मोदी के लिए नई चुनौती बन रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक INDIA ब्लॉक की 'Save the Vote, Save the Country' रैली का मकसद मोदी सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश करना था. इसमें राहुल गांधी और मोदी सरकार दोनों का पक्ष रखा गया है.  

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इस रिपोर्ट की एक और खासियत इसका ऐतिहासिक संदर्भ है. इसमें 1975 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन, 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, CAA के खिलाफ प्रदर्शनों और किसान आंदोलन का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट का संकेत है कि अलग-अलग मुद्दों पर हुए ये आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक विरोध का हिस्सा बनते दिख रहे हैं.

ये भी पढ़ें: ‘दिल्ली में लॉकडाउन’, ‘मोदी की नई चुनौती’… CJP प्रोटेस्ट पर विदेशी मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

अल जज़ीरा और द गार्डियन में भी छपी रिपोर्ट

द गार्डियन की पहली रिपोर्ट की हेडलाइन थी, ‘भारत में विपक्ष के प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी.’जैसा कि हेडलाइन से साफ है, रिपोर्ट का शुरुआती फोकस रैली से पहले दिल्ली में की गई सुरक्षा तैयारियों पर था. इसमें पुलिसकर्मियों की तैनाती, उनके हाथों में डंडे और शील्ड, दंगा नियंत्रण गाड़ियों और ट्रैफिक व्यवस्था का जिक्र किया गया.

इसके बाद एक दूसरी रिपोर्ट छापी, ‘नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली में हज़ारों लोगों का प्रदर्शन.’ इसमें रैली में जुटी भीड़ का आकलन किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, हजारों की संख्या में लोग रामलीला मैदान पहुंचे, लेकिन ये संख्या कांग्रेस के 10 लाख लोगों के जुटने के दावे से काफी कम थी.

अब बात कतर के मीडि‍या संस्थान अल-जज़ीरा की. अल-जज़ीरा की हेडलाइन थी, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हज़ारों लोगों का दिल्ली में विरोध.’ इसमें रिपोर्ट का पूरा फोकस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर है.

अल-जज़ीरा ने सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और BJP के जवाब को भी जगह दी. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रैली को लोकतंत्र के सम्मान के बजाय देश में अराजकता फैलाने की साजिश बताया.

वहीं, पाक‍िस्तान के मीडि‍या हाउस द डॉन की हेड‍लाइन थी- ‘वोटर लिस्ट को लेकर हज़ारों लोग दिल्ली में इकट्ठा हुए’. रिपोर्ट में बताया गया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हजारों लोग वोटर लिस्ट में बदलाव के खिलाफ सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.

रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की आलोचना और CJP आंदोलन की भूमिका का भी जिक्र है. डॉन ने CJP को वोटर लिस्ट विवाद के खिलाफ चल रहे अभियान का अहम हिस्सा बताया है.  

वीडियो: IDBI Bank: राहुल गांधी ने बैंक एम्प्लॉईज को लिखी चिट्ठी, मोदी सरकार पर क्या कहा?

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