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फर्जी IAS बनकर नौकरी का झांसा, भाई-बहन ने 9.8 लाख रुपये ठगे

Fake IAS Officer Scam: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में पुलिस ने भाई-बहन को कथित तौर पर फर्जी IAS अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 9.8 लाख रुपये ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने खुद को बड़े सरकारी पदों पर तैनात बताकर लोगों से पैसे और दस्तावेज लिए थे.

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IAS अफसर होने का दावा, सरकारी नौकरी का लालच (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में चंदेरी पुलिस ने त्रिप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु राजपूत को फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों से 9.8 लाख रुपये ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया।
  • आरोपितों ने सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये लिए और लोगों को अच्छी सैलरी वाली नौकरियां दिलाने का वादा किया, जिससे कई लोग ठगी के शिकार हुए।
  • पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनके मोबाइल फोन और कार बरामद की है, और यह जांच अभी जारी है कि आरोपी नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल हैं।

सरकारी नौकरी का नाम सुनते ही बहुत से लोगों को लगता है कि शायद अब करियर की गाड़ी पटरी पर आ जाएगी. लेकिन इसी उम्मीद को निशाना बनाकर मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में कथित ठगी का एक मामला सामने आया है. चंदेरी पुलिस ने भाई-बहन को कथित तौर पर फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों से 9.8 लाख रुपये ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान त्रिप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु राजपूत के तौर पर हुई है. आरोप है कि दोनों लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देते थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिप्ति खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की Additional Director और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की प्रमुख बताती थी. इसी पहचान के आधार पर नौकरी का भरोसा दिया जाता था.

हर उम्मीदवार से 3 लाख रुपये की मांग

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अच्छी सैलरी वाली सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये मांगे थे. ठगी का शिकार हुए लोगों ने 7 अप्रैल 2025 को चंदेरी में आरोपियों को 9.8 लाख रुपये नकद और अपने दस्तावेज सौंपे थे. उनसे बाद में 2 लाख रुपये और देने का वादा भी किया गया था.

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मामला करीब तीन महीने पहले शिकायत के बाद पुलिस तक पहुंचा. इसके बाद अशोकनगर SP राजीव मिश्रा के निर्देश पर पुलिस ने जाल बिछाया. कथित पीड़ितों से आरोपियों से बातचीत जारी रखने और नए नौकरी उम्मीदवारों का झांसा देकर उन्हें दोबारा चंदेरी बुलाने को कहा गया.

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जाल में ऐसे फंसे दोनों आरोपी

पुलिस के मुताबिक, त्रिप्ति जब इस जाल में फंसकर चंदेरी पहुंची तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसके भाई सुधांशु को भी गिरफ्तार किया गया. मामले में दो कथित सहयोगियों, तनुज बैश्य और अंजलि सिंह, के नाम भी सामने आए हैं.

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जांच के दौरान पुलिस ने त्रिप्ति के पास से महंगे मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है. पुलिस आरोपियों को पूछताछ के लिए भोपाल स्थित उनके कथित ठिकानों पर भी ले गई है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों और संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटा रही है.

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