शेयर बाजार में एचडीएफसी ग्रुप (HDFC Group) की कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल में काफी खराब रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक साल में शेयर बाजार में लिस्टेड एचडीएफसी समूह की चार कंपनियों के शेयर्स का मार्केट कैप करीब 4.38 लाख करोड़ रुपये गिर गया है. शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल वैल्यू को मार्केट कैप कहते हैं.
HDFC ग्रुप ने साल भर में 4.4 लाख करोड़ डुबाए, जानें निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भारी गिरावट पिछले कुछ समय में देखने को मिली है. पिछले एक साल में बैंक के शेयर 26% लुढ़के हैं, जिससे निवेशकों को भी तगड़ा नुकसान हुआ है. सबसे ज्यादा गिरावट बैंक के शेयरों में ही रही.

सबसे ज्यादा गिरावट एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई है . एक साल में इस बैंक के शेयर 26% गिर गए हैं. साथ ही इसका मार्केट कैप 3.73 लाख करोड़ रुपये घट गया है. इसका मार्केट कैप एक साल पहले 15 लाख करोड़ रुपये था, जो घटकर करीब 11 लाख करोड़ रुपये रह गया है. परसेंट के हिसाब से देखें, तो HDFC लाइफ इंश्योरेंस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है.
एक साल में इसके शेयर 29% गिर गए हैं. इससे इस कंपनी का मार्केट प्राइस 47 हजार 261 करोड़ रुपये गिर गया. इसका मार्केट कैप लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.2 लाख करोड़ रुपये रह गया है .
वहीं, इस दौरान एचडीबी फाइनेंशियल के शेयरों में 13% की गिरावट आई है. इसके कंपनी के शेयरों के बाजार मूल्य में 8,458 करोड़ रुपये की कमी आई है. इसी तरह HDFC AMC के शेयरों में 7% की गिरावट आई है और इस कंपनी के शेयरों की मार्केट वैल्यू में 8,649 करोड़ रुपये की कमी आई है.
ये भी पढ़ें: निफ्टी में इस साल 7% की गिरावट, शेयर बाजार में फायदा कमाने का समय आ गया?
HDFC ग्रुप के शेयर्स की क्यों गिर रही मार्केट वैल्यू?एचडीएफसी बैंक के शेयर्स में गिरावट की सबसे बड़ी वजह HDFC विलय को बताया जा रहा है. इसका असर बैंक पर लंबे समय से पड़ रहा है. एचडीएफसी के विलय से एचडीएफसी बैंक की बैलेंस शीट काफी बड़ी हो गई है. लेकिन इसके साथ ही कम रिटर्न देने वाले एसेट्स और बैलेंस शीट की फंडिंग कॉस्ट बढ़ी है. जून तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.26% रहा, जो 2023 में मूल कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय से पहले के 4% के स्तर से कम है.
निवेशकों को उम्मीद थी कि इस विलय से एक नई मजबूत कंपनी बनेगी. लेकिन इसके उलट मार्जिन में सुधार में अनुमान से भी ज्यादा समय लगने से शेयर की कीमत गिर गई है. विश्लेषकों का कहना है कि विलय के कारण एचडीएफसी बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात काफी बढ़ गया है. इस वजह से बैंक को महंगे डिपॉजिट और उधार पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
कम लागत वाली डिपॉजिट्स का बढ़ना भी चिंता का विषय बना हुआ है. आमतौर पर भारतीय बैंक कम लागत वाली जमा राशि जुटाने में पापड़ बेल रहे हैं. लोग अपना अधिक पैसा इक्विटी और म्यूचुअल फंड में लगा रहे हैं. इससे एचडीएफसी बैंक जैसे बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन पर असर पड़ा है.
वीडियो: IIT Delhi के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद क्या पता चला?












