उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में धांधली पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर शिंकजा कसता जा रहा है. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने जिले के दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. शनिवार, 31 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने दोनों सरकारी अफसरों को सस्पेंड करने का भी आर्डर दिया. आयोग ने उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) नवदीप रिणवा को लेटर लिखकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए.
चुनाव आयोग ने यूपी के 2 अधिकारियों पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया, वोटर लिस्ट में धांधली पकड़ी गई
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में धांधली के मामले ने तब तूल पकड़ा, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया. 22 अक्टूबर को CEO नवदीप रिणवा ने खुद अपने बयान में वोटर लिस्ट में धांधली को माना.

चुनाव आयोग ने पत्र में यूपी CEO नवदीप रिणवा को बताया कि उनकी भेजी गई रिपोर्ट की जांच गई गई. इसके आधार पर ERO मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ कानूनी और निलंबन की कार्रवाई का फैसला किया गया. दोनों अधिकारियों के अलावा, एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया.
ECI ने क्या आदेश दिया?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के CEO को आदेश दिया,
"127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) श्री मयंक गोस्वामी और श्री हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए. आगे की जांच के लिए उनकी चार्जशीट आयोग को सौंपी जाए. आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन दोषी अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा."
मामले ने तब तूल पकड़ा, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया. 22 अक्टूबर को CEO नवदीप रिणवा ने खुद अपने बयान में वोटर लिस्ट में धांधली को माना, और दोनों जिम्मेदार EROs के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही.
वोटर लिस्ट में धांधली पकड़ी गईCEO ने कबूल किया कि एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने 31 मई 2026 और 29 अगस्त 2026 के बीच 13,779 'Form 8' की एंट्री की, जबकि ऑफिस में कोई असली फॉर्म या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट नहीं मिले. 'Form 8' का इस्तेमाल इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC), यानी मतदाता पहचान पत्र में अपडेट या सुधार करने के लिए किया जाता है.
चुनाव आयोग ने यूपी CEO को कानून का अनादर करने वाले लोकसेवक से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता(BNS) की धारा 198 को दो अधिकारियों और संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ FIR में जोड़ने का निर्देश दिया. चुनाव आयोग ने कहा,
“इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए संबंधित अदालत में इन केसों की सख्ती से पैरवी की जानी चाहिए.”
चुनाव आयोग ने एक हफ्ते के अंदर पीलीभीत की वोटर लिस्ट की स्क्रूटनी की भी रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यूपी के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (EROs) को अपने-अपने क्षेत्र की वोटर लिस्ट की दोबारा गहराई के साथ जांच करने के लिए कहा.
आयोग ने खासकर, 'Form 6', 'Form 7' और 'Form 8' के तहत वोटर लिस्ट में मतदाताओं के जुड़ने, हटने या उनकी जानकारी में बदलाव को जांचने का आदेश दिया है. रविवार, 1 नवंबर को यूपी CEO नवदीप रिणवा ने भी बड़ा फैसला किया. उन्होंने यूपी के सभी ERO ऑफिस के कंप्यूटर ऑपरेटर की लॉगइन आईडी और पासवर्ड को तुरंत डिएक्टिवेट करने का आदेश दिया.
जांच के बाद हुआ था एक्शनवोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर यूपी CEO नवदीप रिणवा ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) अलोक कुमार को मामले की जाच करने का आदेश दिया. आलोक कुमार पीलीभीत के जिलाधिकारी (DM) हैं.
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उनकी जांच के बाद पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के SDM मयंक गोस्वामी और अमरिया इलाके के SDM हेमंत चौधरी को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया. वहीं, वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की नौकरी खत्म कर दी गईं.
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