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40 विला के बदले IAS-IPS दंपती ने क्या डील की थी? इन 3 बातों की जांच करेगी ACB

राजस्थान के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर आरोप है कि उन्होंने करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 6.16 करोड़ रुपये के 40 विला खरीदे और फिर उन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया.

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राजस्थान के अफसरों की जांच एसीबी कर रही है. (फोटो - Aaj Tak)

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  • राजस्थान के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर ने करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 प्रॉपर्टीज खरीदकर उन्हीं को लीज पर दिया है, जिसकी कुल कीमत 6.16 करोड़ रुपये है।
  • राजस्थान सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) इस मामले में पद के दुरुपयोग, कीमतों में गड़बड़ी तथा कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच कर रहा है।
  • सरकार ने दोनों अधिकारियों को एपीओ पर रखा है और ACB मामले की जांच करके खरीद के स्रोत, कीमत तथा पद प्रयोग की संभावना का विश्लेषण कर आगे कार्रवाई करेगा।

राजस्थान में एक IAS अधिकारी और उनकी IPS पत्नी की करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि दोनों ने करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला खरीदे और फिर उन्हीं विला को उसी कंपनी को लीज पर दे दिया. इन 40 प्रॉपर्टीज की कुल कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि इनसे हर साल करीब 1.80 करोड़ रुपये की लीज इनकम होने की बात सामने आई है. यानी जिस कंपनी से प्रॉपर्टी खरीदी, उसी को किराए पर देकर मोटी कमाई का इंतजाम कर लिया. अब इस पूरे मामले की जांच राजस्थान का एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कर रहा है.

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क्या मामला है?

मामला राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर से जुड़ा है. शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में इंडस्ट्रीज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रह चुके हैं. वहीं, उनकी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर भी सीनियर पुलिस अधिकारी हैं. सरकार ने दोनों को एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है. इसका आसान मतलब है कि दोनों अधिकारियों को उनकी मौजूदा पोस्ट से हटा दिया गया है, लेकिन अभी नई पोस्टिंग नहीं दी गई है.

अब सवाल है कि इस खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी क्या है?

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इंडिया टुडे से जुड़े रिपोर्टर शरत कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB को शुरुआती जांच में कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनके आधार पर पद के दुरुपयोग और कंपनी को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है. ACB के मुताबिक, शिखर अग्रवाल के परिवार ने राजस्थान के दो अनंता रिसॉर्ट्स में ये 40 प्रॉपर्टीज खरीदी थीं.

पहली खरीद सितंबर 2023 में उदयपुर के बूझड़ा स्थित रिसॉर्ट में हुई. यहां परिवार ने 20 कॉटेज खरीदे. इसके बाद मार्च 2026 में अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 और विला खरीदे गए. यानी करीब ढाई साल के भीतर एक ही कंपनी से कुल 40 प्रॉपर्टीज. इन सभी प्रॉपर्टीज की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है. एसीबी अब ये भी जांच रही है कि क्या इनमें से कुछ प्रॉपर्टीज को उनकी असल बाजार कीमत से काफी कम कीमत पर खरीदा गया था?

अब सवाल है कि इन 40 प्रॉपर्टीज का बंटवारा कैसे हुआ? 

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उदयपुर में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर ने 10-10 कॉटेज खरीदे. हर कॉटेज की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है. वहीं, अलवर में दोनों के नाम 8-8 विला दर्ज हुए, जिनकी कीमत करीब 16.5 लाख रुपये प्रति विला बताई गई. इसके अलावा दोनों बेटों के नाम 4-4 विला और प्रशाखा माथुर के माता-पिता के नाम भी 4 प्रॉपर्टीज दर्ज होने की बात सामने आई है. यानी ये सभी 40 प्रॉपर्टीज सिर्फ अधिकारी दंपती के नाम पर नहीं, बल्कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं.

प्रॉपर्टीज खरीदने के बाद परिवार ने इन्हें अपने पास खाली नहीं रखा. इन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया, जिससे खरीदा गया था. बताया गया कि उदयपुर के हर कॉटेज से सालाना करीब 4 लाख रुपये और अलवर के हर विला से करीब 5 लाख रुपये की लीज इनकम होती है. इस हिसाब से उदयपुर के 20 कॉटेज से हर साल करीब 80 लाख रुपये और अलवर के 20 विला से हर साल करीब 1 करोड़ रुपये मिलते हैं. यानी इन 40 प्रॉपर्टीज से कुल सालाना लीज इनकम करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है.

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इस मामले में ACB किन पहलुओं की जांच कर रही है?

– एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) इस बात की जांच कर रहा है कि ये सामान्य कारोबारी सौदे थे या अधिकारी के पद और प्रभाव का इस्तेमाल करके कंपनी को कथित तौर पर फायदा पहुंचाया गया.

– शुरुआती जांच में कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे शिखर अग्रवाल और कंपनी के डायरेक्टर्स के बीच कथित मिलीभगत और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका सामने आई है.

– जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण से जुड़े नियमों में रियायतें मिलीं. कुछ जरूरी प्रमाणपत्रों की पर्याप्त जांच किए बिना मंजूरियां दी गईं और अनुकूल शर्तों पर विशेष वित्तीय पैकेज भी दिया गया.

एक अहम बात 27 मार्च 2026 की है. इसी दिन कंपनी को खास वित्तीय पैकेज मिला और परिवार ने अलवर की 20 विला रजिस्टर कराईं. ACB अब इन दोनों घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रही है.

राजस्थान सरकार ने Prevention of Corruption Act की Section 17A के तहत शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तार से जांच की अनुमति दे दी है. एसीबी अब ये देखेगी कि 40 प्रॉपर्टीज की खरीद में पैसा कहां से आया. कीमत बाजार से कम थी या नहीं. अधिकारी ने अपने पद का इस्तेमाल किया या नहीं और कंपनी को बदले में क्या फायदा मिला. फिलहाल अभी ये सारे आरोप है. जांच आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

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