दिल्ली में पुलिसवालों ने अपने ही पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. वजह थी अपने दो साथियों का ट्रांसफर. इस प्रदर्शन को लीड करने वाले असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (ACP) मनस्वी वशिष्ठ अब खुद सस्पेंड हो गए हैं. मामला पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है. आखिर, एक वकील को लगी चोट से शुरू हुआ मामला दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन और ACP के सस्पेंशन तक कैसे पहुंचा?
ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड, वकीलों से विवाद के बाद पुलिस मुख्यालय के बाहर किया था प्रोटेस्ट
2 नवंबर की सुबह करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 पर जमा हो गए. इनमें महिला पुलिसकर्मी भी थीं. वे ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार का ट्रांसफर वापस लेने और उन्हें पुरानी पोस्टिंग पर भेजने की मांग कर रहे थे.

इस विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के शाहदरा पुलिस स्टेशन से हुई. यहां एक झगड़े के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लग गई. इस मामले में अमूल्य रतन नाम के वकील ने शिकायत दी. इसके बाद कुछ वकील आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर शाहदरा थाने पहुंचे.
वकीलों का आरोप है कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने उन्हें भरोसा दिया कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. लेकिन अगले दिन वकीलों को पता चला कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया. उनका आरोप था कि कुछ लोगों को छोड़ भी दिया गया.
इसके बाद वकील दोबारा थाने पहुंचे. यहां उनकी पुलिस अधिकारियों से बहस हो गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर उन्हें धमकाया. वकीलों का कहना था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की और कार्रवाई करने के बजाय उन्हें डराने की कोशिश की.
पुलिस की तरफ से भी वकीलों पर गंभीर आरोप लगाए गए. ACP की शिकायत के आधार पर करीब 15 से 20 वकीलों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. पुलिस का आरोप था कि वकीलों ने पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की, सरकारी काम में बाधा डाली और SHO को खींचने की कोशिश की, जिसका एक CCTV फुटेज भी वायरल है.
वकीलों की हड़ताल, पुलिसवालों पर कार्रवाईथाने में हुए इस विवाद के बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकील एकजुट हो गए. उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. वकीलों की मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ, SHO अरुण कुमार और दूसरे जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए. साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो.
वकीलों ने अदालतों में काम करना बंद कर दिया. इससे दिल्ली की जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ. आखिरकार 28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया.
ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) भेज दिया गया. वहीं, SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को शाहदरा थाने से हटाकर सिक्योरिटी यूनिट में भेज दिया गया. इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी.
नाराज पुलिसवालों का प्रदर्शनवकीलों की हड़ताल तो खत्म हो गई, लेकिन पुलिस विभाग के अंदर नाराजगी बनी रही. पुलिसकर्मियों के एक धड़े का मानना था कि वकीलों के दबाव में उनके दो अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया. उन्हें लगा कि इस कार्रवाई में पुलिस का पक्ष ठीक से नहीं सुना गया.
इसके बाद पुलिसकर्मियों के व्हाट्सऐप ग्रुप में मैसेज फैलने लगे. इनमें 2 नवंबर को सुबह 8 बजे दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचने की अपील की गई. 2 नवंबर की सुबह करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 पर जमा हो गए. इनमें महिला पुलिसकर्मी भी थीं. उनके हाथों में पोस्टर थे. वे दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर वापस लेने और उन्हें पुरानी पोस्टिंग पर भेजने की मांग कर रहे थे.
दिल्ली पुलिस वाले आमने-सामने आएACP मनस्वी वशिष्ठ भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि ये पुलिसकर्मियों की अपनी आवाज है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस थाने ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे होगी?
इस बीच, नई दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे. उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे अनुशासन बनाए रखें. पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए. DCP ने उन्हें मुख्यालय के अंदर चलकर अपनी बात रखने को भी कहा. लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस कमिश्नर से सीधे बातचीत की मांग पर अड़े रहे. काफी देर बाद प्रदर्शनकारी पुलिस मुख्यालय के अंदर गए. वहां पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दूसरे सीनियर अफसरों से उनकी बातचीत हुई.
पुलिसकर्मियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर वापस लिया जाए. इसके अलावा पुलिस थानों और अदालतों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं. उनका कहना था कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी होती है. ऐसे मामलों में उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने प्रदर्शनकारी पुलिसवालों को भरोसा दिलाया कि पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए तेज और उचित कार्रवाई की जाएगी. ACP मनस्वी वशिष्ठ ने भी कहा कि पुलिसकर्मियों की शिकायतों को उचित मंच पर उठाने का भरोसा दिया गया है.
ACP मनस्वी वशिष्ठ का सस्पेंशनइस प्रोटेस्ट के एक दिन बाद यानी 3 नवंबर की सुबह खबर आई कि ACP मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. गृह मंत्रालय ने बताया गया कि मंत्रालय ने पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन और उसमें ACP की भूमिका को गंभीरता से लिया. एक अनुशासित बल के अधिकारी का अपने ही विभाग के फैसले के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन में शामिल होना अनुशासन का उल्लंघन माना गया.
इस पूरे मामले में दो पक्षों के आरोप हैं. वकीलों का कहना है कि पुलिस ने उनके साथी पर हमले के मामले में ठीक से कार्रवाई नहीं की. वहीं, पुलिसकर्मियों का आरोप है कि वकील थानों में आकर पुलिस पर दबाव बनाते हैं और उनके साथ बदसलूकी करते हैं.
इस विवाद ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या पुलिसकर्मियों को अपने विभाग के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है? अगर है, तो उसकी सीमा क्या होगी?
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फिलहाल, एक वकील को लगी चोट से शुरू हुआ विवाद पुलिस और वकीलों के बीच टकराव में बदल चुका है. अब पुलिस विभाग के अंदर भी असंतोष सामने आ गया है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही बता पाएगी कि गलती किसकी थी और कार्रवाई कितनी सही हुई.
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