महंगी हवाई यात्रा का मामला लेकर एक वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. वकील ने दावा किया कि फ्लाइट का किराया 700 फीसदी तक बढ़ गया है. वकील ने सर्वोच्च अदालत से इस पर दखल देने की अपील की. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने मामले की सुनवाई की. उन्होंने याचिकाकर्ता वकील से कहा- ‘हवाई यात्रा मत करिए.’ वकील को ऐसा रिस्पॉन्स देने वाले जस्टिस विक्रम नाथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बाद अगले CJI बनने की कतार में पहले नंबर पर हैं.
'मी लॉर्ड! फ्लाइट्स का किराया 700% तक बढ़ गया', सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हवाई यात्रा नहीं करें'
वकील ने सुप्रीम कोर्ट के सामने संविधान के आर्टिकल 14 का हवाला देते हुए महंगी हवाई यात्रा का हवाला दिया. हालांकि, कोर्ट ने इसके जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता को हवाई जहाज से सफर करने के बजाय दूसरे विकल्प आजमाने चाहिए.

वकील ने आर्टिकल 14 का हवाला देते हुए 'बराबरी' की दलील दी. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर हवाई सफर ना करने की बात दोहरा दी, और अगला केस सुनने के लिए बुला लिया.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?सोमवार, 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में महंगे हवाई किराए से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर गौर करने को लेकर बहस हुई. हवाई यात्रा के दाम बढ़ने पर जस्टिस विक्रम नाथ की एयर ट्रैवल ना करने की टिप्पणी आई. इस पर याचिकाकर्ता ने एक और दलील पेश की, लेकिन मामला कुछ जमा नहीं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील ने हवाई यात्रा को एसेंशियल सर्विस बताया. सुप्रीम कोर्ट के सामने संविधान के आर्टिकल 14 का हवाला दिया, और 'बराबरी' की दुहाई दी. वकील ने दावा किया कि इस तरह हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी आर्टिकल 14 के तहत समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है.
लेकिन, वकील का ये दांव भी काम नहीं आया. इस दलील पर जस्टिस विक्रम नाथ ने वकील से कहा,
"'ठीक है, यात्रा मत करिए. अगला केस."
सुप्रीम कोर्ट में हुई ये वार्तालाप ऐसे समय पर हुई, जब भारत सरकार ने हवाई किराया तय करने पर नए नियम जारी किए. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 को नोटिफाई कर दिया है. इसके तहत, खास हालात (जैसे आपदा) और जरूरत पड़ने पर सरकार फ्लाइट किराए में दखल दे सकती है. इससे एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लगेगी. ये नियम 1 जनवरी 2027 को लागू होंगे.
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अक्सर देखा जाता है कि आपदा और कुछ खास मौकों पर एयरलाइंस फ्लाइट टिकट बहुत महंगा कर देती हैं. नए नियम सरकार को जनता के हित में एयरलाइन टैरिफ पर निर्देश जारी करने की इजाजत देते हैं. हालांकि, ये नियम हवाई किराए पर कोई परमानेंट लिमिट नहीं लगाते हैं. माने, एयरलाइंस मार्केट के हालात के आधार पर टिकट की कीमतें तय करती रहेंगी.
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