हैदराबाद में शनिवार 31 अक्तूबर को पुलिस ने एग डोनेशन के नाम पर चल रहे एक कथित रैकेट का पर्दाफाश किया है. पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह में सात राज्यों की महिलाएं शामिल थीं. इन महिलाओं के एग (अंडे) उन महिलाओं को देते थे, जो गर्भधारण नहीं कर सकती हैं. ऐसी महिलाओं के गर्भाशय में IVF के जरिए किसी दूसरी महिला का एग प्लांट किया जाता है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि, कपल अपनी पसंद बताते थे. इसमें एग बेचने वाली महिला की जाति, धर्म, रंग, लंबाई से लेकर पढ़ाई लिखाई से जुड़ी मांग होती थी. इसके बाद गिरोह के लोग डोनर की तलाश करते थे, जो कपल की इन सारी मांगों को पूरा करें.
हैदराबाद में IVF रैकेट का भंडाफोड़, जाति, धर्म, रंग देखकर होती थी एग डोनर की तलाश
हैदराबाद में पुलिस ने IVF प्रक्रिया के लिए एग डोनेशन का नेटवर्क चलाने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने बताया कि इस रैकेट में 7 राज्यों की महिलाएं शामिल थीं और ये कपल्स की पसंद को देखते हुए एग (गर्भधारण के लिए) बेचती थीं.

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का मुख्य आरोपी अमित शर्मा है. उसके साथ कई और लोग भी शामिल थे. ये लोग व्हाट्सऐप ग्रुप और दूसरे तरीकों से देशभर में अपने एजेंट्स से जुड़े रहते थे. जब कोई कपल एग डोनर की तलाश में इनके पास आता, तो उनकी डिमांड एजेंट्स को भेज दी जाती थी. फिर एजेंट ऐसी महिलाओं को ढूंढते, जो बताई गई शर्तों और डिमांड को पूरा करती हों. बेगमपेट थाने के इंस्पेक्टर पी. सैदुलु ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि, आरोपी उन महिलाओं को टारगेट करते थे जिन्हें पैसों की ज़रूरत होती थी.
सात राज्यों की महिलाएं नेटवर्क में शामिलजांच में पता चला कि, आरोपी पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा से महिलाओं को लाए थे. पुलिस को शक है कि, महिला हॉस्टल चलाने के नाम पर आरोपी ये नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे. इन हॉस्टलों में उन महिलाओं को रखा जाता था, जिन्हें एग डोनर बनाया गया था. ऐसी महिलाओं को भी रखा जाता था, जो भविष्य में डोनर बन सकती हैं. बाद में उन्हें IVF सेंटर ले जाया जाता था, जहां उनके अंडे निकालने का मेडिकल प्रोसेस होता था.
पुलिस के मुताबिक, महिलाओं को कितने पैसे मिलेंगे, ये उनके एग खरीदने वाले कपल्स की मांग पर निर्भर करता था. कुछ महिलाओं को 20 से 30 हजार रुपये देने का वादा किया गया था. वहीं, कुछ महिलाओं को 50 हजार रुपये तक देने की बात कही गई थी. मतलब ये रकम इस बात पर निर्भर करती थी कि कपल को कैसी महिला के अंडे चाहिए.
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने TOI को बताया कि, कपल डोनर महिला के रंग, जाति और लंबाई को लेकर अपनी डिमांड बताते थे. कुछ जोड़े यह भी बताते थे कि महिला किस इलाके की रहने वाली हो. अधिकारी के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा मांग महिला के रंग और उसके इलाके को लेकर होती थी. इसके बाद एजेंट ऐसी महिलाओं की तलाश करते थे, जो इन शर्तों पर खरी उतरें. उन्होंने बताया कि कपल जितनी ज्यादा डिमांड रखते थे, उनसे उतने ही ज्यादा पैसे लिए जाते थे.
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पुलिस के मुताबिक, पहले एग डोनेट कर चुकी महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी इस काम के लिए लाती थीं. यानी महिलाओं के जरिए ही नई महिलाओं की भर्ती की जा रही थी. अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में IVF सेंटरों की क्या भूमिका थी. मलकाजगिरी के डीसीपी सी. श्रीधर ने बताया कि, पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि IVF सेंटरों की ये जिम्मेदारी कैसे तय होती है कि एग डोनर की पहचान और उससे जुड़े दस्तावेज सही हैं या नहीं. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
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