The Lallantop

हड्डियां खोखली हो गई हैं कैसे पता चलेगा? कमज़ोर होने से बचाने का तरीका समझ लीजिए

डॉक्टर से समझेंगे कि ऑस्टियोपोरोसिस क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. इसकी जांच व इलाज कैसे होता है और ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे बच सकते हैं.

Advertisement
post-main-image
खाने-पीने में कैल्शियम और विटामिन D होना ज़रूरी है (फोटो: Magnific)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों में कैल्शियम की कमी होने से वे कमजोर हो जाती हैं और हल्की चोट पर भी टूट सकती हैं, जिससे दर्द और फ्रैक्चर की समस्या होती है।
  • यह बीमारी मुख्य रूप से उम्र बढ़ने, महिलाओं में हॉर्मोनल बदलाव, कैल्शियम और विटामिन D की कमी, कम शारीरिक गतिविधि तथा शराब और सिगरेट के सेवन के कारण होती है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस का उपचार कैल्शियम व विटामिन D की मात्रा बढ़ाने, नियमित व्यायाम करने और गंभीर मामलों में बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स जैसी दवाइयों के उपयोग से किया जाता है।

हमारी हड्डियां पूरे शरीर को सहारा देती हैं. हड्डियां मज़बूत हों, तो रोज़ का हर काम आसानी से हो जाता है. पर कई बार हड्डियां इतनी कमज़ोर हो जाती हैं कि हल्की-सी चोट लगने पर ही टूट जाती हैं. उनमें दर्द भी रहने लगता है. इस बीमारी को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां अंदर ही अंदर खोखली होने लगती हैं. लेकिन ऐसा होता क्यों हैं, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि ऑस्टियोपोरोसिस क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. इसकी जांच व इलाज कैसे होता है और ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे बच सकते हैं. 

Advertisement

ऑस्टियोपोरोसिस होने के कारण 

ये हमें बताया डॉक्टर अश्विनी मैचंद ने. 

dr ashwani maichand
डॉ. अश्विनी मैचंद, डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स, सी.के.बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली

ऑस्टियोपोरोसिस का मतलब है हड्डियों में कैल्शियम की कमी. यानी हड्डियों का कमज़ोर हो जाना. ऑस्टियोपोरोसिस होने का सबसे आम कारण उम्र है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों में कैल्शियम कम होने लगता है. दूसरी वजह हॉर्मोनल बदलाव हैं. महिलाओं में 45 साल की उम्र के आसपास मेनोपॉज़ होने लगता है. इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा घट जाती है. इससे हड्डियों में कैल्शियम जमा होना कम हो जाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है. 

Advertisement

एक वजह खाने-पीने में कैल्शियम और विटामिन D की कमी होना है. फिज़िकल एक्टिविटी न करना भी एक बड़ी वजह है. अगर लाइफस्टाइल या किसी बीमारी की वजह से चलना-फिरना कम है. तब भी ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है. शराब और सिगरेट पीने से भी हड्डियों में कैल्शियम कम होता है.

ये भी पढ़ें: डबल चिन गायब कर देंगे फेस लिफ्टिंग मास्क? डॉक्टर ने बताया वायरल दावे का सच

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण 

ऑस्टियोपोरोसिस को आमतौर पर साइलेंट डिज़ीज़ कहते है. इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. लेकिन अगर हल्की-सी चोट या गिरने से ही फ्रैक्चर टूट जाए. हर वक्त शरीर में दर्द रहे. धीरे-धीरे कमर झुक जाए. किसी बुज़ुर्ग की लंबाई धीरे-धीरे कम होती लगे. तब ये ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत हो सकते हैं. अक्सर लोग जोड़ों में दर्द को ऑस्टियोपोरोसिस समझ लेते हैं. लेकिन ये दोनों अलग समस्याएं हैं. जोड़ों में दर्द होना ऑस्टियोअर्थराइटिस होता है. वहीं, हड्डियों का कमज़ोर होना ऑस्टियोपोरोसिस कहलाता है.

Advertisement
osteoporosis
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां ऐसी ही दिखने लगती हैं (फोटो: Magnific)

ऑस्टियोपोरोसिस की जांच और इलाज

ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए DEXA स्कैन किया जाता है. अगर स्कैन में आपका स्कोर -2.5 या उससे कम आता है. तब मान लीजिए कि आपको ऑस्टियोपोरोसिस है. ये भी जानना ज़रूरी है कि पहले फ्रैक्चर हुआ है या नहीं. ऐसी दवाएं तो नहीं ले रहें, जिनसे कैल्शियम कम हो सकता है. साथ ही, ब्लड टेस्ट भी किए जाते हैं. इनसे कैल्शियम, विटामिन D, किडनी और थायरॉइड की स्थिति देखी जाती है. अगर गिरने के बाद बहुत दर्द हो रहा है, तो एक्स-रे भी किया जाता है. 

अब बात इलाज की. ऑस्टियोपोरोसिस होने पर अपनी डाइट सुधारें. आपके खाने में कैल्शियम और विटामिन D ज़रूर हो. रोज़ एक्सरसाइज़ करें. आप वॉकिंग, योगा, बैलेंसिंग एक्सरसाइज़ या वेट ट्रेनिंग कर सकते हैं. आपकी उम्र और वज़न के हिसाब से जो भी एक्सरसाइज़ सबसे सही हो, उसे रोज़ करें. ज़रूरत पड़ने पर विटामिन D और कैल्शियम के सप्लीमेंट ले सकते हैं. जिन मरीज़ों में ऑस्टियोपोरोसिस ज़्यादा गंभीर है. उन्हें बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स जैसी दवाइयां दी जा सकती हैं.

ये भी पढ़ें: कमर-गर्दन का ये वाला दर्द आपकी रीढ़ की हड्डी को तबाह कर सकता है

ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे बचें? 

कैल्शियम से भरपूर चीज़ें ज़्यादा लें. यानी दूध और दूध से बनी चीज़ें खूब लें. रोज़ थोड़ी देर धूप में बैठें, इससे विटामिन D मिलता है. खाने में प्रोटीन होना भी ज़रूरी है. साथ ही, रोज़ एक्सरसाइज़ करें. जैसे रनिंग, जॉगिंग, जिम और योगा. अपनी पसंद और उम्र के हिसाब से सही एक्सरसाइज़ करें. स्मोकिंग और शराब से दूर रहें. घर में फिसलन वाली जगहों पर सावधानी बरतें. ऐसी जगहों पर बुज़ुर्गों को गिरने का ख़तरा रहता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: रीढ़ की हड्डी को हेल्दी कैसे रखें?

Advertisement