जब भी महिलाओं के ब्रेस्ट में किसी तरह का बदलाव आता है, और वो कई दिनों तक बना रहता है तो उनका ध्यान सबसे पहले कैंसर की ओर ही जाता है. अब कुछ महिलाएं तो सतर्क होकर तुरंत जांच करा लेती हैं. लेकिन कुछ इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं. ये ज़रूरी नहीं है कि ब्रेस्ट में हुआ वो बदलाव कैंसर का ही संकेत हो. पर फिर भी रिस्क क्यों लेना?
ब्रेस्ट कैंसर की गांठ कैसे पहचानें? इन लक्षणों को भी इग्नोर न करें
ब्रेस्ट कैंसर का शक होने पर सबसे पहले मैमोग्राफी करानी चाहिए. ये ब्रेस्ट के लिए एक खास तरह का एक्स-रे होता है. इससे ब्रेस्ट में मौजूद गांठ का पता लगाने में मदद मिलती है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO की एक एजेंसी है- इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC). इसके Globocan डेटाबेस के मुताबिक, साल 2024 में भारत में ब्रेस्ट कैंसर के 2,37,231 नए मामले सामने आए थे और 96,100 महिलाओं की जान गई थी. अभी ‘ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ’ भी चल रहा है. तो हमने सोचा क्यों न आपको ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी कुछ खास जानकारी दें.
इसलिए आज डॉक्टर से जानेंगे कि ब्रेस्ट कैंसर के क्या लक्षण होते हैं. ये आमतौर पर किस स्टेज में दिखते हैं. क्या ब्रेस्ट में होने वाली हर गांठ कैंसर की होती है. ये कैसे पता चलेगा कि गांठ कैंसर वाली है या नहीं. ब्रेस्ट कैंसर का शक होने पर कौन-सी जांचें करानी चाहिए और ब्रेस्ट कैंसर का इलाज क्या है.
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण किस स्टेज में दिखते हैं?
ये हमें बताया डॉक्टर कुणाल शर्मा ने.

ब्रेस्ट कैंसर के सबसे आम लक्षण हैं:
- ब्रेस्ट या निप्पल के आसपास गांठ महसूस होना.
- ब्रेस्ट के आकार में बदलाव दिखना.
- निप्पल से खून या कोई तरल पदार्थ निकलना.
- ब्रेस्ट की स्किन का लाल होना.
- ब्रेस्ट पर संतरे के छिलके जैसी बनावट दिखाई देना.
आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर का पता एडवांस स्टेज में चलता है. इसलिए महिलाओं को अपने ब्रेस्ट और निप्पल में होने वाले बदलावों पर ज़रूर ध्यान देना चाहिए.
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क्या ब्रेस्ट में हर गांठ कैंसर का संकेत होती है?
ब्रेस्ट में होने वाली करीब 80% गांठें कैंसर वाली नहीं होतीं. इनमें से कुछ गांठें सिस्ट यानी तरल पदार्थ से भरी थैली हो सकती हैं. वहीं, कुछ गांठें हॉर्मोनल बदलावों के कारण भी हो सकती हैं, जैसे फाइब्रोएडीनोमा. लेकिन अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ तेज़ी से बढ़ रही है. अगर इस गांठ में दर्द नहीं हो रहा है. वो गांठ दबाने पर अपनी जगह से हिलती नहीं है, तो ये तेज़ी से बढ़ने वाली कैंसर की गांठ हो सकती है.

ब्रेस्ट कैंसर का शक होने पर कौन-सी जांचें कराएं?
ब्रेस्ट कैंसर का शक होने पर सबसे पहले मैमोग्राफी करानी चाहिए. ये ब्रेस्ट के लिए एक खास तरह का एक्स-रे होता है. इससे ब्रेस्ट में मौजूद गांठ का पता लगाने में मदद मिलती है. ब्रेस्ट का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. अगर मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड से कैंसर का शक होता है. तब डॉक्टर बायोप्सी कराने की सलाह दे सकते हैं. इसमें सुई की मदद से गांठ से टिशू का एक छोटा-सा नमूना लिया जाता है. इस नमूने को जांच के लिए ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट के पास भेजा जाता है. वो माइक्रोस्कोप और ज़रूरी टेस्ट करके पता लगाते हैं कि गांठ कैंसर वाली है या नहीं.
अगर कैंसर है तो किस तरह का कैंसर है, वो तेज़ी से बढ़ने वाला है या नहीं. ब्रेस्ट कैंसर के सेल्स में हॉर्मोन्स के रिसेप्टर्स की जांच भी की जाती है. इनसे ये तय करने में मदद मिलती है कि मरीज़ का इलाज किस तरह से होगा.
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ब्रेस्ट कैंसर का इलाज क्या है?
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के कई तरीके हैं. कौन-सा इलाज किया जाएगा, ये कैंसर के प्रकार और उसकी स्टेज पर निर्भर करता है. इलाज में सर्जरी की जा सकती है, जिसमें ट्यूमर को निकाल दिया जाता है. कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल भी किया जाता है. टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी में ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो कैंसर सेल्स को मार देती हैं. ये दवाएं नसों के ज़रिए (IV) दी जा सकती हैं.
वहीं, हॉर्मोन थेरेपी की दवाएं अक्सर मुंह से खाने के लिए दी जाती हैं. टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी बहुत आधुनिक तरीके के इलाज हैं. इनसे कैंसर सेल्स खत्म होते हैं और इनके साइड इफ़ेक्ट्स भी कम होते हैं. मरीज़ों को रेडिएशन थेरेपी भी दी जा सकती है. इसमें हाई-एनर्जी किरणों की मदद से कैंसर सेल्स को नष्ट किया जाता है.
अगर ब्रेस्ट कैंसर का जल्दी पता चल जाए, तो मरीज़ के पूरी तरह ठीक होने का चांस काफी बढ़ जाता है. स्टेज-1 में मरीज़ के ठीक होने की संभावना 90% से ज़्यादा होती है. स्टेज-2 में ये संभावना 80 से 90% और स्टेज 3 में 50 से 65% के आसपास हो सकती है. वहीं, स्टेज-4 में कैंसर को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है. लेकिन इलाज से बीमारी को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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