फ़ैटी लिवर. आजकल ये बहुत ही आम समस्या बन गई है. जो टेस्ट करवा रहा है, उसका फ़ैटी लिवर निकल रहा है. फ़ैटी लिवर में लिवर के ऊपर बहुत ज़्यादा चर्बी जमा हो जाती है. इससे लिवर के काम करने की क्षमता घट जाती है.
शराब न पीने वालों को भी क्यों होता है फ़ैटी लिवर? डॉक्टर से समझ लीजिए
शराब को कभी हाथ न लगाने वालों को भी फ़ैटी लिवर क्यों हो रहा है, ये बताएंगे आज. डॉक्टर से ये भी जानेंगे कि फ़ैटी लिवर होने पर क्या लक्षण दिखते हैं. इसके स्टेजेस से क्या पता चलता है और फ़ैटी लिवर का इलाज क्या है.

अब तक ऐसा माना जाता था कि जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें ही फ़ैटी लिवर होता है. लेकिन अब ऐसा नहीं है. आजकल जो लोग शराब नहीं भी पीते, उन्हें भी फ़ैटी लिवर हो रहा है. इसे नॉन एल्कोहॉलिक फ़ैटी लिवर डिज़ीज़ कहते हैं. इसका एक दूसरा नाम ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिज़ीज़’ यानी MASLD भी है.
लेकिन शराब को कभी हाथ न लगाने वालों को भी फ़ैटी लिवर क्यों हो रहा है, ये बताएंगे आज. डॉक्टर से ये भी जानेंगे कि फ़ैटी लिवर होने पर क्या लक्षण दिखते हैं. इसके स्टेजेस से क्या पता चलता है और फ़ैटी लिवर का इलाज क्या है.
शराब नहीं पीते, फिर भी फ़ैटी लिवर क्यों?
ये हमें बताया डॉक्टर रणदीप राणा ने.

फ़ैटी लिवर होने का इकलौता कारण शराब नहीं है. ये एक बहुत आम गलतफहमी है. ऐसे कई कारण हैं, जिनसे फ़ैटी लिवर की बीमारी हो सकती है. आज भारत में फ़ैटी लिवर डिज़ीज़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
फ़ैटी लिवर के पीछे डायबिटीज़, प्री-डायबिटीज़, प्री-हाइपरटेंशन और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां बड़ी वजह हो सकती है. लगभग एक-तिहाई आबादी में इनमें से कोई न कोई समस्या पाई जाती है. इसलिए इन लोगों में बाकी लोगों की तुलना में फ़ैटी लिवर होने का रिस्क ज़्यादा रहता है.
हमारी लाइफस्टाइल भी फ़ैटी लिवर की वजह बन सकती है. जैसे शारीरिक गतिविधि कम करना, एक्सरसाइज़ न करना, डीप-फ़्राइड या बहुत मीठी चीज़ें ज़्यादा खाना. इन सबसे फ़ैटी लिवर डिज़ीज़ का ख़तरा बढ़ता है.
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फ़ैटी लिवर के लक्षण
कई लोगों में फ़ैटी लिवर के कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. कुछ लोगों को थकान या कमज़ोरी महसूस हो सकती है. ऐसी परेशानियां भी हो सकती हैं, जिनका सीधा संबंध फ़ैटी लिवर से तय करना मुश्किल है. जैसे पेट भरा-भरा या भारी महसूस होना. नाभि के ऊपर वाले हिस्से में दर्द होना. पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होना. लेकिन इन लक्षणों को सिर्फ़ फ़ैटी लिवर की वजह से होने वाला नहीं कहा जा सकता. ये लक्षण IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) या गैस्ट्राइटिस की वजह से भी हो सकते हैं.

फ़ैटी लिवर के स्टेज का मतलब क्या?
अल्ट्रासाउंड में फ़ैटी लिवर को आमतौर पर ग्रेड 1, 2 और 3 में बताया जाता है. ये ग्रेड बताते हैं कि लिवर में कितना फ़ैट जमा हुआ है. जब लिवर में बहुत ज़्यादा फ़ैट जमा हो जाता है, तो लिवर में सूजन और चोट होने लगती है. इस स्थिति को स्टीटोहेपेटाइटिस कहा जाता है.
अगर लिवर में सूजन लंबे समय तक बनी रहे और इसे कंट्रोल न किया जाए. तब ऐसे में धीरे-धीरे मरीज़ को सिरोसिस हो सकता है. सिरोसिस लिवर की गंभीर बीमारी है, जो आगे चलकर एंड-स्टेज लिवर डिज़ीज़ तक पहुंच सकती है.
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फ़ैटी लिवर का इलाज क्या है?
फ़ैटी लिवर के इलाज में सबसे ज़रूरी लाइफस्टाइल बदलना है. सॉफ्ट ड्रिंक और ज़्यादा शुगर वाली ड्रिंक्स पीने से बचें. मीठी चीज़ें, बिस्किट और मैदा कम से कम लें. साथ ही, हर दिन आधा घंटा एक्सरसाइज़ करें. हफ्ते में 5 दिन, यानी कुल 150 मिनट एक्सरसाइज़ करना फ़ायदेमंद होता है.
दवाइयों की बात करें तो ये बीमारी की स्टेज के हिसाब से दी जाती हैं. बीमारी की स्टेज और लिवर में फाइब्रोसिस का पता लगाने के लिए फ़ाइब्रोस्कैन किया जाता है. इससे लिवर में कड़ेपन और घाव का पता चलता है. आज फ़ैटी लिवर डिज़ीज़ के इलाज के लिए कई दवाइयां मौजूद हैं. साथ ही, डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना ज़रूरी है. बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स यानी डिस्लिपिडेमिया को भी कंट्रोल में ज़रूर रखें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: फ़ैटी लिवर स्टेज-1 में क्या होता है?









