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'ममता टीएमसी' होगी ममता बनर्जी की पार्टी, बागी गुट 'डेमोक्रेटिक टीएमसी'; नया सिंबल भी मिला

तृणमूल कांग्रेस के दो गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे. चुनाव आयोग ने फिलहाल ममता बनर्जी के गुट को ‘फुटबॉल खेलता खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न अलॉट किया है. ये चुनाव चिह्न स्थायी नहीं हैं.

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट और ऋतब्रत बनर्जी के गुट को नया नाम और चुनाव चिह्न दिया है. (courtesy: इंडिया टुडे)

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  • तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों को चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और अस्थायी चुनाव चिह्न दिए हैं, ममता गुट को 'फुटबॉल खेलता खिलाड़ी' और ऋतब्रत गुट को 'लिफाफा' चिह्न अलॉट हुआ है।
  • पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद नेशनल वर्किंग कमिटी के गठन और वैधता पर मतभेद के कारण उठ खड़ा हुआ, जिसमें दोनों गुटों ने अपने-अपने संगठनात्मक ढांचे का दावा किया।
  • चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे हैं, इस प्रक्रिया के बाद ही उपचुनाव में दोनों पक्षों की पहचान स्पष्ट होगी और नामांकन वैधता अधिनियम के तहत जांचा जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे. चुनाव आयोग ने फिलहाल ममता बनर्जी के गुट को ‘फुटबॉल खेलता खिलाड़ी’ और ऋतब्रत बनर्जी-अरुप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न अलॉट किया है. ये दोनों ही चुनाव चिह्न टेम्परेरी हैं और फिलहाल आगामी उपचुनाव के लिए ही लागू होंगे.

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तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के अंदर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है. मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, जहां दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और उसके मौजूदा चुनाव चिह्न यानी ‘दो फूल और घास’ पर अपना दावा किया. विवाद की जड़ पार्टी के संगठन और नेशनल वर्किंग कमिटी को लेकर है.

दोनों गुट ने क्या तर्क दिया?

ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि TMC के संविधान के मुताबिक नेशनल वर्किंग कमिटी का गठन हर तीन साल में होना चाहिए. उनके मुताबिक फरवरी 2022 में बनी कमेटी का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो चुका था. इसी आधार पर इस गुट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मौजूदा संगठनात्मक ढांचे की वैधता पर सवाल उठाया.

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इसके बाद 22 जून 2026 को ऋतब्रत बनर्जी खेमे की ओर से एक बैठक बुलाई गई. इस बैठक में अरूप रॉय को कमिटी का चेयरपर्सन चुने जाने का दावा किया गया और एक संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया गया.

वहीं ममता बनर्जी गुट ने इस पूरी कवायद को खारिज कर दिया. ममता खेमे का कहना है कि ऋतब्रत गुट पार्टी संविधान के पुराने प्रावधानों का हवाला दे रहा है और जून में हुई बैठक में पार्टी संविधान के मुताबिक जरूरी संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ. इसी बीच पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों के लिए दोनों पक्षों की ओर से उम्मीदवार भी मैदान में उतारे गए. और बात चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम पर आकर अटक गई. 

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चुनाव आयोग ने नया नाम चुनने को कहा

17 सितंबर को चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत TMC के पुराने नाम और ‘दो फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को दोनों गुटों के लिए फिलहाल फ्रीज कर दिया. आयोग ने दोनों पक्षों से तीन-तीन संभावित पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे, ताकि आगामी उपचुनाव में दोनों गुटों की अलग पहचान हो सके.

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ममता गुट का चुनाव चिह्न. 

अब इसी प्रक्रिया में ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘फुटबॉल खेलता खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है. रेजीनगर सीट से ममता गुट ने रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है. वहीं अरूप रॉय की ओर से बी-फॉर्म के जरिए नामांकन दाखिल करने वाले सफिउज्जमान शेख को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ के उम्मीदवार के तौर पर माना जाएगा और उनका चुनाव चिह्न ‘लिफाफा’ होगा. उन्हें रेजीनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार चुना गया है. 

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ऋतब्रत गुट का चुनाव चिह्न. 

इसके अलावा नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता गुट ने संचिता प्रधान और ऋतब्रत गुट ने एहतेशमुल हक को मैदान में उतारा है.

हालांकि, चुनाव आयोग ने ये साफ किया है कि इन उम्मीदवारों के नामांकन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत बाकी सभी वैधानिक शर्तें पूरी होने के अधीन ही मान्य होंगे. आयोग ने रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख 6 अक्टूबर तय की है. रिजल्ट 9 अक्टूबर को आएगा.

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