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चंद सौ रुपयों के लिए ब्लड डोनेशन को धंधा बनाया, स्कूल के बच्चों तक का खून निकाला

West Bengal Minors lured for blood donation: इस्पात नगर के एक निजी स्कूल के तीन छात्रों को ब्लड डोनेट करने के लिए मिशन हॉस्पिटल लाया गया था. उनका खून लेने के बाद नकद में 300-400 रुपये दिए गए थे.

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छात्रों को ब्लड डोनेशन के बाद 300 से 400 रुपये दिए जाते थे. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 13 से 15 साल के नाबालिग छात्रों से पैसों के लालच में फर्जी उम्र दिखाई कर रक्तदान कराया गया, जिसके लिए उन्हें 300 से 400 रुपये नकद भुगतान किया गया।
  • मिशन हॉस्पिटल में बच्चों की असली आयु की जांच नहीं की गई जबकि उन्हें 18 वर्ष से अधिक दिखाने वाले दस्तावेज प्रस्तुत कराए गए थे, जिससे पुलिस की जांच शुरू हुई है।
  • घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावकों और स्कूल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, अस्पताल ने नया प्रोटोकॉल लागू किया और सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में पैसों का लालच देकर कथित तौर पर नाबालिग स्कूली छात्रों से रक्तदान कराया जा रहा था. आरोप है कि 13 से 15 साल की उम्र से छात्रों को खून देने के बाद 300 से 400 रुपये दिए जा रहे थे. दस्तावेजों में उनकी फर्जी उम्र दिखाई गई थी. यानी 18 साल से अधिक.

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बताया गया कि इस्पात नगर के एक निजी स्कूल के छात्रों को ब्लड डोनेट करने के लिए मिशन हॉस्पिटल लाया गया था. उनका खून लेने के बाद नकद में 300-400 रुपये दिए गए थे. मामले की जानकारी मिलने के बाद पीड़ितों के अभिभावक और स्कूल ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.

इंडिया टुडे से जुड़े अनिल गिरी से पीड़ित छात्रों ने बात की. एक छात्र ने बताया कि उसे स्कूल के ही एक छात्र ने ब्लड डोनेट करने के लिए कहा था. उसने बताया,

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“मैं मिशन अस्पताल रक्तदान के लिए गया था. मेरे साथ स्कूल का ही एक छात्र था. हॉस्पिटल में मुझसे स्कूल, बीमारी और टैटू के बारे में पूछा गया. जांच के दौरान मेरा हीमोग्लोबिन कम निकला, इसलिए ब्लड नहीं लिया गया. अगर हीमोग्लोबिन सामान्य होता तो खून लिया जाता. जिन दोस्तों ने खून दिया उन्हें देवप्रिय चटर्जी नाम के एक शख्स ने 300 रुपये दिए थे.”

मामले में स्कूल के पूर्व छात्र का नाम

एक अन्य छात्र ने बताया कि देवप्रिय चक्रवर्ती ने उससे कहा था कि शकुंतला राजवंशी नाम की महिला का एक्सीडेंट हो गया है. उसे 6 यूनिट खून की जरूरत है. इसी बहाने उसे और उसके दोस्त राहुल को हॉस्पिटल लाया गया. चक्रवर्ती से उसका संपर्क अर्पण पाल के माध्यम से हुआ था.

छात्र का आरोप है कि उसने पहले ही बता दिया था कि उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है. इस पर उसे कहा गया "कोई समस्या नहीं होगी, यहां उम्र नहीं देखी जाएगी. घर पर भी किसी को पता नहीं चलेगा." उसने दावा किया कि 26 जुलाई को खून देने के बाद खाने-पीने और आने-जाने के लिए उसे 400 रुपये मिले थे.

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मामले में स्कूल के एक पूर्व छात्र देवप्रिय चटर्जी का नाम जोड़ा जा रहा है. स्कूल की प्रधान शिक्षिका देवजानी घोष ने भी कहा कि स्कूल के एक पूर्व छात्र पर बच्चों को पैसों का लालच देकर रक्तदान के लिए ले जाने का आरोप है. उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल को भी यह देखना चाहिए था कि बच्चे की ऐज क्या है. हमने पुलिस में शिकायत की है.

दी स्टेट्समैंन की रिपोर्ट के मुताबिक, देवप्रिय को हर एक डोनर के बदले कथित तौर पर 1000 रुपये मिलते थे.

अस्पताल ने आरोपों को किया खारिज

हालांकि, मिशन हॉस्पिटल के प्रतिनिधि डॉ. पार्थ पाल ने रक्तदान से जुड़े दावों को खारिज किया. इंडिया टुडे से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ब्लड डोनेशन पूरी तरह NACO और नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के दिशा-निर्देशों के अनुसार कराया जाता है. घटना के बाद अस्पताल ने नया प्रोटोकॉल लागू किया है. अब ब्लड डोनेशन से पहले आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र से आयु सत्यापन जरूरी कर दिया गया है.

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घटना पर सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है. पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मामले को गंभीर बताया. कहा, 

“अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. 13-14-15 साल के बच्चों से पैसों के बदले ब्लड डोनेट कराना काफी गंभीर है. इसकी पूरी जांच कराई जाएगी.”

आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त प्रणब कुमार ने बताया कि मामले में ये भी जांच की जा रही है कि कहीं ऐसे अपराधों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा.

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