The Lallantop

व्हाइट शुगर छोड़ने की सोच रहे? डायबिटीज़, वेट लॉस वालों के लिए ये है बेस्ट विकल्प

आर्टिफिशियल स्वीटनर में कई तरह के विकल्प आते हैं. जैसे एस्पार्टेम, सुक्रालोज़ और सैकरीन. इनका सबसे बड़ा फ़ायदा है कि ये कैलोरी इनटेक को कम कर देते हैं. इससे वज़न घटाने में मिलती है.

Advertisement
post-main-image
क्या आप भी चाहकर भी शुगर नहीं छोड़ पा रहे?

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • डॉक्टर कंचन खुराना ने बताया कि स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर व्हाइट शुगर के विकल्प के रूप में नेचुरल और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।
  • लोग वजन कम करने और डायबिटीज़ नियंत्रण के लिए चीनी का सेवन बंद कर देते हैं, लेकिन मिठास के लिए शुगर सब्स्टीट्यूट्स का उपयोग बढ़ गया है, जिससे विकल्पों को समझने की जरूरत हुई है।
  • शुगर सब्स्टीट्यूट्स के सीमित मात्रा में उपयोग से पेट की समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इन्हें लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है और मात्राओं का ध्यान रखना चाहिए।

वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल में लाने के लिए कई लोग व्हाइट शुगर यानी चीनी खाना एकदम बंद कर देते हैं. अब जोश-जोश में शुगर तो छोड़ दी. पर जीभ को जो स्वाद चाहिए, जो मिठास चाहिए, उसका क्या? ऐसे में लोग ट्राई करते हैं शुगर सब्स्टीट्यूट्स. यानी चीनी के दूसरे विकल्प. पर इतने सारे ऑप्शन हैं? कौन-सा शुगर सब्स्टीट्यूट सबसे बेहतर है. हेल्थ कंडीशन के हिसाब से आपको कौन-सा खाना चाहिए? यही सब जानेंगे आज. अव्वल तो डॉक्टर से समझेंगे कि व्हाइट शुगर के दूसरे विकल्प क्या हैं. इनमें कौन सबसे बेहतर हैं. इन्हें कितनी मात्रा में लेना चाहिए और क्या लंबे वक्त तक शुगर सब्स्टीट्यूट लेने से कोई नुकसान भी होता है? 

Advertisement
व्हाइट शुगर के विकल्प क्या हैं?

ये हमें बताया न्यूट्रिशनिस्ट कंचन खुराना ने. 

dr kanchan
कंचन खुराना, सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा

डॉक्टर कंचन खुराना के मुताबिक, अगर आपके पास मीठा लेने के दो विकल्प हैं- आर्टिफिशियल स्वीटनर और नेचुरल स्वीटनर. साथ ही, आप पूरी तरह स्वस्थ हैं. यानी न तो आपको डायबिटीज़ है और न ही दिल की कोई बीमारी. तब नेचुरल स्वीटनर्स को प्राथमिकता दें. आर्टिफिशियल स्वीटनर्स की तुलना में नेचुरल स्वीटनर्स ज़्यादा हेल्दी ऑप्शन हैं. आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल कुछ खास कंडीशंस में ही किया जाता है. जैसे अगर किसी को डायबिटीज़ है. दिल की बीमारी है. प्री-डायबिटिक हैं या फिर ओबीज़ हैं. तब उन्हें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स लेने को कहा जा सकता है.

Advertisement
व्हाइट शुगर का कौन-सा विकल्प सबसे बेहतर?

सुक्रोज़ को प्लेन शुगर, टेबल शुगर या व्हाइट शुगर कहते हैं. ये वही शुगर है, जिसे हम चाय और दूध में डालते हैं. सुक्रोज़ ही रिफाइंड शुगर होती है. इसके अलावा, कई नेचुरल स्वीटनर्स भी होते हैं. जैसे गुड़, मेपल सिरप और शहद वग़ैरा. ये बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड नहीं होते. इन्हें ज़्यादा नेचुरल सोर्सेज़ से ही निकाला जाता है. एगेव सिरप भी एक नेचुरल स्वीटनर है.

अगर हम फ्रुक्टोज़ की बात करें, तो ये फलों में पाई जाने वाली शुगर है. आम, केला जैसे फलों में जो मिठास होती है, वो फ्रुक्टोज़ की वजह से होती है. 

वहीं लैक्टोज़ दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स में पाई जाने वाली शुगर है. इसी तरह खजूर, किशमिश भी नेचुरल स्वीटनर्स का काम करते हैं. आप चाहें तो सफेद चीनी की जगह नेचुरल स्वीटनर्स इस्तेमाल कर सकते हैं.

Advertisement
fruits sugar
फलों में पाई जाने वाली शुगर को फ्रुक्टोज़ कहते हैं
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स vs नेचुरल स्वीटनर्स

आर्टिफिशियल स्वीटनर में कई तरह के विकल्प आते हैं. जैसे एस्पार्टेम, सुक्रालोज़ और सैकरीन. इनका इस्तेमाल अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स, च्यूइंग गम, फ्लेवर्ड योगर्ट और मिठाइयों में किया जाता है. इनका सबसे बड़ा फ़ायदा है कि ये कैलोरी इनटेक को कम कर देते हैं. इससे वज़न घटाने में मिलती है. साथ ही, डायबिटीज़ के मरीज़ भी आर्टिफिशियल स्वीटनर्स वाली मिठाइयां सीमित मात्रा में खा सकते हैं.

जो वज़न घटाना चाहते हैं, जो प्री-डायबिटिक या फिर डायबिटिक हैं. वो अपनी कंडीशन कंट्रोल करने के लिए थोड़ी मात्रा में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं और शुगर का हेल्दी ऑप्शन चाहते हैं. वो नेचुरल स्वीटनर्स जैसे शहद और गुड़ वग़ैरा का इस्तेमाल अपनी डाइट में शामिल करें.

सब्स्टीट्यूट्स से साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

किसी चीज़ को ज़्यादा मात्रा में डाइट में शामिल करने पर उसके कुछ न कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं. मसलन पेट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. जैसे बदहज़मी, एसिडिटी और गैस बनना. ये हमारे गट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर सकते हैं, जो खाना पचाने के लिए ज़रूरी हैं. इसलिए इनकी मात्रा तय होनी चाहिए. चाहे आप स्टीविया, सुक्रालोज़ या सैकरीन ले रहे हों, कोशिश करें कि इन्हें सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें. साथ ही, खाना पकाने में भी इनका बहुत ज़्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

देखिए, अगर आप व्हाइट शुगर के दूसरे ऑप्शंस ट्राई कर रहे हैं. कोई स्वीटनर ले रहे हैं, तो पहले उसके बारे में पूरी जानकारी कर लें. ये पता कर लें कि उसमें क्या-क्या डाला गया है और वो आपके लिए सेफ है या नहीं. इसके बाद ही उसे इस्तेमाल करें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

वीडियो: सेहत: ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण जानते हैं?

Advertisement