शकुंतला देवी 50 साल की हैं. प्रयागराज में रहती हैं. कुछ महीनों पहले उन्हें भूख लगना अचानक कम हो गया. उनका पेट भी अक्सर फूला-फूला रहता. जी मिचलाता. कभी उन्हें कब्ज़ हो जाती तो कभी दस्त लग जाते. यानी पेट से जुड़ी दिक्कतें उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गईं. शुरू में उन्होंने इसे मामूली परेशानी समझा और कई घरेलू नुस्खे अपनाए. लेकिन जब आराम नहीं मिला, तो वो डॉक्टर के पास गईं. वहां जांच कराने पर पता चला कि उनकी ओवरी यानी अंडाशय में कैंसर है. इसके बाद तुरंत उनका इलाज शुरू किया गया. फिलहाल शकुंतला रिकवर कर रही हैं.
ओवेरियन कैंसर औरतों में होने वाला तीसरा आम कैंसर, ये 6 लक्षण जरूर जाने लें
World Ovarian Cancer Day: WHO के डेटाबेस के मुताबिक, 2022 में हमारे देश में ओवेरियन कैंसर के 47 हज़ार से ज़्यादा नए मामले आए थे. करीब 33 हज़ार महिलाओं की मौत भी हुई थी. ओवेरियन कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये देर से पकड़ में आता है. इसके लक्षण महिलाएं अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती हैं.


ये जानकारी हमें उनके बेटे ने मेल के ज़रिए भेजी है. वो चाहते हैं कि हम ओवरी के कैंसर पर बात करें. आज वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे भी है. तो हमने सोचा, क्यों न इसी मौके पर आपको महिलाओं में होने वाले तीसरे सबसे आम कैंसर यानी ओवेरियन कैंसर के बारे में बताया जाए.

World Health Organization की एजेंसी है International Agency For Research On Cancer. इसके GLOBOCAN डेटाबेस के मुताबिक, 2022 में हमारे देश में ओवेरियन कैंसर के 47 हज़ार से ज़्यादा नए मामले आए थे. करीब 33 हज़ार महिलाओं की मौत भी हुई थी. ओवेरियन कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये देर से पकड़ में आता है. इसके लक्षण महिलाएं अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती हैं. इसलिए डॉक्टर से जानेंगे कि ओवेरियन कैंसर के कारण और रिस्क फैक्टर्स क्या हैं. क्या ये सिर्फ बुज़ुर्ग महिलाओं को होता है. इसके लक्षण क्या हैं. ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए कौन-से टेस्ट होते हैं. और इससे बचाव व इलाज कैसे किया जाता है.
ये हमें बताया डॉक्टर रुपिंदर सेखों ने.

ओवेरियन कैंसर का कोई एक तय रिस्क फैक्टर नहीं होता. लेकिन जिन महिलाओं में पीरियड्स कम उम्र में शुरू होकर देर तक चलते हैं, उनमें इसका ख़तरा बढ़ सकता है. जिन महिलाओं ने कभी गर्भधारण नहीं किया, उनमें भी ओवेरियन कैंसर का रिस्क ज़्यादा माना जाता है. मोटापा भी ओवेरियन कैंसर का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है.
इसके अलावा, जेनेटिक कारण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. हमारे शरीर के सेल्स लगातार बनते और टूटते रहते हैं. लेकिन जब सेल्स गलत तरीके से बढ़ने और फैलने लगते हैं, तो इसे म्यूटेशन कहा जाता है. यही म्यूटेशन आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है.
ओवेरियन कैंसर ज़्यादातर 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में देखा जाता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ओवेरियन कैंसर सिर्फ़ बुज़ुर्ग महिलाओं को ही होता है. कुछ तरह के ओवेरियन कैंसर कम उम्र की लड़कियों में भी हो सकते हैं.

- भूख न लगना
- पेट फूलना, पेट में भारीपन होना
- जी मिचलाना या मन खराब रहना
- बार-बार पेशाब आना या पेशाब ठीक से न होना
- कभी कब्ज़ तो कभी दस्त लग जाना
- थोड़ा-सा खाने पर ही पेट भरा महसूस लगना
ओवेरियन कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य और हल्के होते हैं. इसलिए अक्सर लोग इन लक्षणों को नज़अंदाज़ कर देते हैं. इस वजह से कैंसर का जल्दी पता नहीं लगता. अगर परिवार में किसी को ओवेरियन कैंसर हुआ है और आपको ऐसे लक्षण दिख रहे हैं. तब जल्दी से जल्दी डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

ओवेरियन कैंसर का पता बहुत आसानी से लगाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए पहले लक्षणों को गंभीरता से लेना ज़रूरी है. ओवरी में होने वाली हर गांठ या ट्यूमर कैंसर नहीं होता, पर जांच ज़रूरी है. शुरुआती जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर पेट का अल्ट्रासाउंड करते हैं. कुछ ब्लड टेस्ट भी किए जाते हैं जिन्हें ट्यूमर मार्कर्स कहते हैं.
अगर परिवार में किसी को ओवेरियन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर या कोई दूसरा कैंसर हुआ हो. तब आपको थोड़ा ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत होती है. ऐसे लोग रेगुलरली चेकअप कराते रहें, क्योंकि कई कैंसर जेनेटिक तौर पर आपस में जुड़े हो सकते हैं. ये न सोचें कि परिवार में किसी और तरह का कैंसर था और इसलिए आपको ओवेरियन कैंसर नहीं हो सकता. अगर शरीर में कोई असामान्य बदलाव या लगातार लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.
ओवेरियन कैंसर से बचाव और इलाजजिस कैंसर का पहले पता ही नहीं चल सकता, उससे बच नहीं सकते. आप सिर्फ़ रेगुलर स्क्रीनिंग करा सकते हैं. शुरुआत में कैंसर का पता चलने पर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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