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क्या है हंतावायरस जिससे क्रूज शिप में सवार 3 लोगों की मौत हो गई?

MV हॉन्डियस क्रूज़ शिप पर पहले व्यक्ति के बीमार पड़ने की शुरुआत 6 अप्रैल के आसपास हुई. एक डच यात्री को हल्का बुखार और थकान महसूस हुई. फिर उसकी तबियत बिगड़ गई. यात्री को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई.

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जब MV हॉन्डियस चला था, तब उस पर 147 लोग सवार थे (Image- AFP/Getty Images)

एक बड़ा जहाज़ और त्रासदी. दोनों को साथ सोचें, तो याद आएगा टाइटैनिक. वो जहाज़, जिसके डूबने से लगभग 1500 लोगों की मौत हो गई थी. टाइटैनिक उत्तरी अटलांटिक महासागर में डूब गया था. इसी अटलांटिक महासागर में इस वक्त एक और जहाज़ फंसा हुआ है. नाम है- MV हॉन्डियस. ये एक क्रूज़ शिप है. क्रूज़ शिप एक खास तरह का जहाज़ होता है. ये लोगों को घुमाने और एंटरटेनमेंट के लिए बनाया जाता है. इसे आप चलता-फिरता होटल समझ लीजिए.

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MV हॉन्डियस में एक ख़तरनाक वायरस फैला है. जिसकी वजह से 3 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग संक्रमित हैं. इसलिए कोई देश अपने यहां इस क्रूज़ शिप को रुकने नहीं दे रहा है. जो वायरस फैला है, उसका नाम हंतावायरस है.

क्रूज पर वायरस से मौतें

MV हॉन्डियस 1 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के उशुअइया से चला था. जहाज़ पर 147 लोग सवार थे. ये क्रूज़ शिप अटलांटिक महासागर के दूरदराज़ इलाकों में सफर कर रहा था. जहां आसपास कोई बड़ी मेडिकल सुविधा मौजूद नहीं थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्रूज़ शिप पर पहले व्यक्ति के बीमार पड़ने की शुरुआत 6 अप्रैल के आसपास हुई. एक डच यात्री को हल्का बुखार और थकान महसूस हुई. शुरू में लक्षण नॉर्मल थे. इसलिए किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन फिर उसकी तबियत बिगड़ गई. यात्री को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. मौत का कारण साफ नहीं था, इसलिए जहाज़ आगे बढ़ता रहा.

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MV हॉन्डियस 1 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के उशुअइया से चला था

कुछ वक्त बाद, उस यात्री की पत्नी भी बीमार पड़ गई और उसकी भी जान चली गई. इस बीच कई दूसरे लोग भी बीमार पड़ने लगे. 6 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच कई मामले सामने आए. जब हालत और बिगड़ी, तो क्रूज़ शिप से मरीज़ों को बाहर निकालने का सिलसिला शुरू हुआ. सेंट हेलेना और असेंशियन आइलैंड जैसी जगहों पर गंभीर मरीज़ों को एयरलिफ्ट करके भेजा गया. 2 मई आते-आते हालत और गंभीर हो गए. जर्मनी के एक यात्री की भी जहाज़ पर मौत हो गई. टेस्टिंग से पता चला कि क्रूज़ शिप पर हंतावायरस फैला है. 

WHO ने क्या-क्या बताया?

इस बीच, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO भी एक्टिव हो चुका था. WHO के मुताबिक, 6 मई तक हंतावायरस के कुल 8 मामले आ चुके हैं. इनमें से 3 की लैब में पुष्टि हो गई है. कुल 3 यात्रियों की मौत भी हो चुकी है. फिलहाल, सभी यात्रियों को उनके केबिन में आइसोलेट कर दिया गया है. मेडिकल टीमें समुद्र के किनारे से ही टेस्टिंग कर रही हैं, और गंभीर मरीज़ों को बाहर निकाल रही हैं.

WHO के डायरेक्टर-जनरल, डॉक्टर टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस ने एक्स पर एक पोस्ट किया.

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उन्होंने बताया कि 3 संदिग्ध मरीज़ों को इलाज के लिए नीदरलैंड्स भेजा गया है. ये काम WHO, शिप ऑपरेटर्स और अलग-अलग देशों, जैसे केप वर्डे, यूके, स्पेन और नीदरलैंड्स के साथ मिलकर किया गया. WHO शिप ऑपरेटर्स के साथ मिलकर यात्रियों और क्रू की सेहत पर नज़र रख रहा है.

वैसे आमतौर पर, हंतावायरस एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. लेकिन इस क्रूज़ शिप पर वायरस का एंडीज़ स्ट्रेन मिला है. जो एक से दूसरे में फैल सकता है. और ये एक वजह भी है कि क्यों कोई देश इसे अपने यहां रुकने की अनुमति नहीं दे रहा. हालांकि 6 मई को स्पेन के सरकारी चैनल TVE ने रिपोर्ट किया कि ये क्रूज़ शिप कैनरी द्वीप के टेनेरिफ़ में रुकने वाला है. लेकिन इस क्षेत्र की सरकार इसे रुकने नहीं देना चाहती. पूरा खौफ हंतावायरस फैलने का ही है. 

इसी हंतावायरस से जुड़ी A टू Z जानकारी हमने ली, मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. सौरदीप चौधरी से.

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डॉ. सौरदीप चौधरी, एसोसिएट कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा
हंतावायरस कैसे फैलता है?

डॉक्टर सौरदीप कहते हैं कि हंतावायरस एक गंभीर वायरस है. ये आमतौर पर संक्रमित चूहों के संपर्क में आने से फैलता है. ये वायरस चूहों के मल, मूत्र या लार के जरिए इंसानों तक पहुंचता है. अगर कोई व्यक्ति ऐसी बंद जगह पर रहता है, जहां संक्रमित चूहा मौजूद रहा हो. तो उसके मल-मूत्र से वायरस हवा में फैल सकता है. फिर सांस के ज़रिए शरीर में पहुंच जाता है. इसके अलावा, किसी संक्रमित सतह को छूकर हाथ मुंह, नाक या आंखों पर लगाने से भी इंफेक्शन हो सकता है. संक्रमित चूहे के काटने से भी ये वायरस फैल सकता है. लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में होता है. इस वायरस का खतरा उन लोगों को ज़्यादा है, जो ऐसी जगहों पर रहते हैं, जहां चूहे बहुत ज़्यादा हैं. या जो पुरानी और बंद जगहों की सफाई करते हैं. 

हंतावायरस के लक्षण

जब कोई व्यक्ति हंतावायरस से संक्रमित होता है, तो उसे तुरंत पता नहीं चलता. इसके लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्ते का समय लगता है. ये लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं और बहुत तेज़ी से गंभीर हो सकते हैं. हंतावायरस के लक्षण हैं- बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, बदनदर्द, थकान, उल्टी और डायरिया.

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हंतावायरस संक्रमित चूहों के संपर्क में आने से फैलता है
हंतावायरस से जुड़ी जटिलताएं

अगर समय पर इलाज न हो, तो ये फेफड़ों और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है. मरीज़ को HPS यानी हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम और HFRS यानी हेमोरेजिक फीवर विथ रीनल सिंड्रोम होने का रिस्क बढ़ जाता है. HPS में सांस लेने में दिक्कत, खांसी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी समस्या होती है. वहीं, HFRS में शरीर के अंदर ब्लीडिंग, लाल चकत्ते, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव और किडनी फेल होने का ख़तरा रहता है.

हंतावायरस से इलाज और बचाव 

हंतावायरस से निपटने के लिए अभी कोई खास वैक्सीन या पक्की दवा उपलब्ध नहीं है. इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है. गंभीर स्थिति में ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए बचाव बहुत जरूरी है. घर और आसपास चूहों की संख्या कम रखें. सफाई करते समय मास्क पहनें, खासकर बंद जगहों में. चूहे के मल-मूत्र को झाड़ू से साफ करने के बजाय गीले कपड़े से पोछें, ताकि वायरस हवा में न फैले.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

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