सिरदर्द हो रहा था. आपने पी चाय. इस उम्मीद में कि शायद आराम मिल जाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. फिर आपने दवा खाई. लेकिन कुछ खास राहत नहीं मिली. जब सिरदर्द बार-बार होने लगा और लंबे समय तक रहने लगा, तो आप डॉक्टर के पास गए. वहां पता चला कि आपको जो सिरदर्द हो रहा है, वो कोई आम सिरदर्द नहीं है. ये माइग्रेन है.
आम सिरदर्द है या माइग्रेन, इन लक्षणों से कंफर्म हो जाएगा
अक्सर लोग आम सिरदर्द और माइग्रेन के बीच कन्फ्यूज़ रहते हैं. इसलिए आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि आम सिरदर्द और माइग्रेन में क्या मुख्य अंतर हैं. सिरदर्द के अलावा, माइग्रेन में और क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं. माइग्रेन ट्रिगर क्यों होता है. माइग्रेन के दर्द से निपटने का तरीका भी पता करेंगे.


अक्सर लोग आम सिरदर्द और माइग्रेन के बीच कन्फ्यूज़ रहते हैं. इसलिए आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि आम सिरदर्द और माइग्रेन में क्या मुख्य अंतर हैं. सिरदर्द के अलावा, माइग्रेन में और क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं. माइग्रेन ट्रिगर क्यों होता है. माइग्रेन के दर्द से निपटने का तरीका भी पता करेंगे.
नॉर्मल सिरदर्द और माइग्रेन में मुख्य अंतर क्या हैं?
ये हमें बताया डॉक्टर कुनाल बहरानी ने.

सिरदर्द एक आम समस्या है. लेकिन हर सिरदर्द एक जैसा नहीं होता. कई बार लोग माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझकर इग्नोर कर देते हैं. लेकिन अगर आपको बार-बार या ज़्यादा तेज़ सिरदर्द होता है. तब समझ जाइए कि ये माइग्रेन है, सामान्य सिरदर्द नहीं.
सामान्य सिरदर्द आमतौर पर हल्का या मीडियम होता है. इसमें पूरे सिर पर एक दबाव जैसा महसूस होता है. ऐसा अक्सर थकान, स्ट्रेस या देर तक स्क्रीन देखने की वजह से होता है. फिर थोड़ी देर आराम करने या दवा खाने से ठीक हो जाता है. मगर माइग्रेन इससे अलग होता है.
माइग्रेन में दर्द ज़्यादा तेज़ होता है. ये दर्द अक्सर सिर के एक तरफ़ होता है और धड़कने जैसा महसूस होता है. कई बार दर्द इतना तेज़ होता है कि रोज़ के काम करना भी मुश्किल हो जाता है. ये कुछ घंटों से लेकर 2 से 3 दिनों तक चल सकता है.
माइग्रेन में और क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं?
माइग्रेन में सिर्फ़ सिरदर्द ही नहीं होता. इसके साथ कई और लक्षण भी दिखते हैं. जैसे उबकाई या उल्टी आना. तेज़ रोशनी, तेज़ आवाज़ से परेशानी होना. आंखों के सामने अचानक धुंधलापन या चमक दिखना. इसके अलावा, थकान, कमज़ोरी और चिड़चिड़ापन भी हो सकता है.

माइग्रेन ट्रिगर क्यों होता है?
माइग्रेन के ट्रिगर हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं. लेकिन इसके कुछ आम ट्रिगर भी हैं. जैसे नींद की कमी. हॉर्मोन्स में बदलाव, खासकर महिलाओं में. चॉकलेट, कॉफ़ी और शुगर जैसी चीज़ों से भी माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है.
माइग्रेन से कैसे निपटें?
माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है. लेकिन इसे कंट्रोल ज़रूर किया जा सकता है. इसके लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने होंगे. जैसे रोज़ पर्याप्त नींद लें. स्ट्रेस कम करें. अपनी डाइट पर ध्यान दें. शांत और अंधेरे कमरे में आराम करने से माइग्रेन में राहत मिलती है. लेकिन अगर माइग्रेन बार-बार और बहुत तेज़ हो रहा है, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें. क्योंकि, सही समय पर सलाह न लेने से ये बढ़ भी सकता है. माइग्रेन और उसके लक्षणों को समझना बहुत अहम है. अगर समय पर दवाइयां शुरू न हों, तो ये क्रोनिक स्टेज में पहुंच सकता है. क्रोनिक स्टेज में दवाइयां कम असर करती हैं और पूरा आराम नहीं मिलता.
आजकल माइग्रेन के इलाज के लिए कई तरह की दवाइयां और नई तकनीकें मौजूद हैं. जैसे नर्व ब्लॉक और बोटॉक्स इंजेक्शन, इनकी मदद से माइग्रेन का दर्द कम किया जा सकता है. आज के समय में न्यूरोमॉड्यूलेशन भी एक नई और प्रभावी तकनीक है. जिससे माइग्रेन को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: ये एक काम माइग्रेन के दर्द में तुरंत आराम देगा




















