IPL चल रहा है. इसमें राजस्थान रॉयल्स टीम के कप्तान हैं रियान पराग. उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल है. वीडियो 28 अप्रैल का है. जब राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच मैच चल रहा था. इस दौरान लाइव ब्रॉडकास्ट में रियान ड्रेसिंग रूम में बैठकर वेपिंग करते नज़र आए. वेप यानी इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, जिस पर भारत में बैन लगा हुआ है. इसलिए जैसे ही दर्शकों का ध्यान गया, वेपिंग करते रियान की फोटोज़ और वीडियोज़ वायरल हो गए.
क्या वेपिंग के कोई नुकसान नहीं? रियान पराग मैच के बीच ई-सिगरेट पीते दिखे
राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच 28 अप्रैल को मैच चल रहा था. इस दौरान लाइव ब्रॉडकास्ट में रियान ड्रेसिंग रूम में बैठकर वेपिंग करते नज़र आए. वेप, जिस पर भारत में बैन लगा हुआ है. इसलिए जैसे ही दर्शकों का ध्यान गया, वेपिंग करते रियान की फोटोज़ और वीडियोज़ वायरल हो गए.


इंडियन प्रीमियर लीग के नियमों के अनुसार, ड्रेसिंग रूम और स्टेडियम में स्मोकिंग करना प्रतिबंधित है. अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. उस पर, The Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 के तहत भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या वेप पर बैन है. यानी इनका उत्पादन, बिक्री, खरीद और उपयोग, सबकुछ गैरकानूनी है. नियम तोड़ने पर ज़ुर्माना लग सकता है. जेल भी हो सकती है.
वैसे कई लोग वेपिंग को सामान्य सिगरेट से कम ख़तरनाक, कम नुकसानदेह मानते हैं. उन्हें लगता है कि वेपिंग, सिगरेट का ‘बेहतर विकल्प’ है. पर ऐसा है नहीं. वेप या ई-सिगरेट भी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. कैसे, ये हमें बताया आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर दीपक झा ने.

डॉक्टर दीपक कहते हैं कि ई-सिगरेट या वेप, बैटरी से चलने वाली डिवाइस है. इसमें लिक्विड भरा जाता है. जो बैटरी से जुड़े हीटिंग एलिमेंट की मदद से गर्म होकर एरोसोल में बदलता है. एरोसोल यानी हवा में तैरते बहुत छोटे-छोटे कण या बूंदें. व्यक्ति इन्हें सांस के ज़रिए अंदर लेता है और फिर बाहर छोड़ता है. ई-सिगरेट कई शेप और साइज़ में आती हैं. कुछ USB ड्राइव जैसी दिखती हैं. तो कुछ पेन, हाईलाइटर, स्मार्टफोन और खिलौनों जैसी. इनके फ्लेवर भी अलग-अलग होते हैं. जैसे कैंडी, मेन्थॉल और मिंट.
कुछ ई-सिगरेट में निकोटीन डाला जाता है. ये वही केमिकल है, जो सामान्य सिगरेट में भी होता है. निकोटीन की लत बहुत जल्दी लगती है. ई-सिगरेट में ये कम ज़रूर होता है. पर इससे ख़तरा कम नहीं होता. निकोटीन दिमाग के विकास पर असर डालता है. प्रेग्नेंट महिलाओं और भ्रूण के लिए भी ये नुकसानदेह है. क्योंकि इससे बच्चे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है.
ई-सिगरेट के लिक्विड में कैंसर पैदा करने वाले कई केमिकल्स भी हो सकते हैं. जैसे फॉर्मेल्डिहाइड, एसीटैल्डिहाइड, बेंजीन और एक्रिलोनाइट्राइल. इसके अलावा, इसमें निकेल, टिन और लेड जैसे हेवी मेटल्स पाए जा सकते हैं. जिनकी थोड़ी मात्रा भी शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है.

फ्लेवर देने के लिए ई-सिगरेट में कई तरह के केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जैसे डायसेटिल. इसके कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचते हैं. डायसेटिल को फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी, ब्रोंकियोलाइटिस ऑब्लिटरन्स से जोड़ा गया है. जिसे आम भाषा में 'पॉपकॉर्न लंग' कहते हैं. इस बीमारी में फेफड़ों के छोटे एयरवेज़ डैमेज हो जाते हैं. जिससे खांसी, घरघराहट, सीने में दर्द और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं. इस बीमारी का कोई तय इलाज नहीं है, केवल लक्षणों को कंट्रोल किया जाता है.
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फेफड़ों के अलावा, ई-सिगरेट दिल के लिए भी बुरी है. साल 2024 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में एक स्टडी पेश की गई. इस स्टडी के मुताबिक, ई-सिगरेट पीने से हार्ट फेलियर का ख़तरा 19 फीसदी तक बढ़ जाता है.
8 अप्रैल 2024 को World Health Organization यानी WHO ने भी एक पोस्ट में बताया था कि वेपिंग के 24 घंटों के भीतर दौरे का ख़तरा बढ़ सकता है.
इससे पहले WHO ने दुनिया के सभी देशों से ई-सिगरेट पर बैन लगाने की मांग भी की थी. साथ ही कहा था कि इसे दूसरे टोबैको प्रोडक्ट्स की तरह ट्रीट किया जाए.जो लोग सिगरेट छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उनके लिए वेप या ई-सिगरेट पर शिफ्ट होना सही नहीं है, क्योंकि इसके अपने गंभीर हेल्थ रिस्क हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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