एक बात बताइए. शरीर में कहीं दर्द उठने पर आप क्या करते हैं? सबसे पहले तो उसे इग्नोर करते होंगे. थोड़ी देर सहते होंगे. फिर आराम न मिलने पर कोई स्प्रे लगाते होंगे. पेनकिलर खाते होंगे.
कमर, घुटने के दर्द को कब बिल्कुल इग्नोर न करें? डॉक्टर ने एक-एक बात बता दी
डॉक्टर से आज जानेंगे कि कमर या घुटने के दर्द में कब सर्जरी करानी पड़ती है, कब दवाइयों और फिज़ियोथेरेपी से आराम मिल जाता है. ये भी पता करेंगे कि क्या लंबे समय से चल रहे दर्द को भी बिना सर्जरी ठीक किया जा सकता है.

नॉर्मली लोग यही करते हैं. अगर दर्द कमर या घुटने जैसी जगह पर हो तो भी उसे नज़रअंदाज़ ही किया जाता है. अक्सर लोग ये सोचकर डॉक्टर को नहीं दिखाते कि कुछ सीरियस न निकल आए. ऐसे ही महीनों बीतते जाते हैं और दर्द बढ़ता जाता है. कई लोग सालों बीतने के बाद भी डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं कि कहीं वो सर्जरी के लिए न बोल दें. पर कमर या घुटने में दर्द के हर मामले में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती. इसलिए डरने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है.
आज डॉक्टर आपको बताएंगे कि कमर या घुटने के दर्द में कब सर्जरी करानी पड़ती है, कब दवाइयों और फिज़ियोथेरेपी से आराम मिल जाता है. ये भी पता करेंगे कि क्या लंबे समय से चल रहे दर्द को भी बिना सर्जरी ठीक किया जा सकता है. और कमर या घुटने के दर्द से जुड़े ऐसे कौन-से लक्षण हैं, जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.
ये हमें बताया डॉक्टर आंचल शर्मा ने.

हर तरह के कमर या घुटने के दर्द में सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती. कमर का दर्द शुरुआती स्टेज में होने पर पेनकिलर्स, सूजन कम करने वाली दवाइयों और फिज़ियोथेरेपी से आराम मिल जाता है. लेकिन अगर दर्द मांसपेशियों में नहीं हो रहा. दर्द की वजह हड्डियों या डिस्क की कोई समस्या है, तब इन तरीकों से आराम नहीं मिलता.
ऐसी स्थिति में MRI करके नुकसान का पता लगाया जाता है. अगर डिस्क नस को बहुत ज़्यादा दबा नहीं रही है. रीढ़ के जोड़ों में घिसाव भी ज़्यादा गंभीर नहीं है. पैरों में सुन्नपन या ठीक से न चल पाने जैसे लक्षण नहीं हैं. तब लाइव एक्स-रे की मदद से कमर में इंजेक्शन लगाया जा सकता है. ये उस कारण पर काम करता है, जिससे दर्द आ रहा है. एक बार कारण चला गया, तो दर्द अपने आप ठीक हो जाता है.
आमतौर पर, 40-50 साल के लोगों के घुटनों में दर्द अर्थराइटिस की वजह से होता है. अर्थराइटिस यानी नेचुरल कार्टिलेज का घिसना. इसके लिए खून से प्लाज़्मा निकालकर घुटने में डाला जाता है. इससे कार्टिलेज की मोटाई सामान्य हो जाती है. घुटने में नेचुरली ग्रीस बनने लगता है. इसलिए अगर घुटने या कमर के दर्द का सही कारण पता चल जाए, तो सर्जरी से बचा जा सकता है.
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कब सर्जरी ज़रूरी और कब दवाइयों, फिज़ियोथेरेपी से आराम मिल जाता है?अगर दर्द अभी शुरुआती स्टेज में है. दर्द इतना गंभीर नहीं है कि आप चल न पाएं. तब फिज़ियोथेरेपी और दवाइयों से आराम मिल सकता है. लेकिन अगर दर्द इतना गंभीर है कि आप फिज़ियोथेरेपी नहीं करा सकते. पेनकिलर्स खाने का कोई असर नहीं हो रहा. फिज़ियोथेरेपी और दवाइयां शुरू किए हुए 2 हफ्ते से ज़्यादा हो गए हैं, पर आराम नहीं मिला है. तब डॉक्टर से मिलकर दर्द का कारण पता करें. हड्डियों या डिस्क की किसी समस्या के चलते दर्द होने पर इनसे आराम नहीं मिलता.
ऐसे में MRI और एक्स-रे करके दर्द के कारण का पता लगाया जाता है. फिर उस हिसाब से इलाज किया जाता है. कभी-कभी डिस्क और नसों की समस्या बहुत बढ़ जाती है. ऐसे में पैर लकवाग्रस्त हो सकते हैं. पैर काम करना बंद कर देते हैं. पैर के अगले हिस्से को ऊपर उठाने में कठिनाई होती है. हाथ मुड़ जाता है या शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाता है. तब इन मामलों में सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है.

हां, लंबे समय से चल रहे दर्द को बिना सर्जरी ठीक किया जा सकता है. ये ज़रूरी नहीं होता कि दर्द कब से है. कई मरीज़ों को सालों सिरदर्द या हाथों में दर्द रहता है. ये दर्द दवाइयां खाने और फिज़ियोथेरेपी कराने के बावजूद कम नहीं होता. दर्द कब से है, ये मायने नहीं रखता. बल्कि अंदरूनी नुकसान कितना हुआ है, ये ज़्यादा अहम है.
डॉक्टर के पास जाने पर आपके कुछ टेस्ट किए जाते हैं. इनसे पता चलता है कि दर्द का कारण कितना गंभीर है. अगर आपकी नस पूरी तरह ख़राब नहीं हुई है. तब कुछ खास तरीकों से दर्द के कारण को खत्म किया जाता है. यानी पहले दर्द का कारण पता करके उसे दूर किया जाता है. एक बार कारण दूर हो जाए, तो दिक्कत अपने आप ठीक हो जाती है.
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कमर या घुटने के दर्द के कौन-से लक्षण इग्नोर नहीं करने चाहिए?- सुबह उठते ही कमर में इतना तेज़ दर्द हो कि बिस्तर से उठा न जाए
- देर तक खड़े रहने पर पैरों में दर्द होने लगे
- चलते-फिरते वक्त भी पैरों या कमर के दर्द होता हो
- तब इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें
- अगर शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन या तेज़ चुभने वाला दर्द है
- एक्सरसाइज़ या फिज़ियोथेरेपी के बाद ये दर्द और बढ़ रहा है
- तब इन लक्षणों को इग्नोर न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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