आजकल कूल्हे में दर्द होना बहुत कॉमन प्रॉब्लम बन गई है. वैसे दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में हो, हम उसे तब तक बर्दाश्त करते रहते हैं, तब तक इग्नोर करते रहते हैं, जब तक कि वो असहनीय न हो जाए. कम से कम कूल्हे के मामले में तो ये बहुत बड़ी गलती है.
कूल्हे में दर्द को और इग्नोर मत कीजिए, ये गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है
कई बार कूल्हे का दर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से होता है. फिर आपके लिए सर्जरी ही आखिरी रास्ता बचता है. कूल्हे के दर्द से जुड़े हर ज़रूरी सवाल का जवाब जानेंगे आज.

कई बार कूल्हे का दर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से होता है. फिर आपके लिए सर्जरी ही आखिरी रास्ता बचता है. कूल्हे के दर्द से जुड़े हर ज़रूरी सवाल का जवाब जानेंगे आज. अव्वल तो डॉक्टर से समझेंगे कि कूल्हे में दर्द की सबसे आम वजहें क्या हैं. किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. कैसे पता चलेगा कि दर्द कूल्हे से आ रहा है या कमर की समस्या की वजह से. फिर पता करेंगे कि कूल्हे का दर्द होने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए और कूल्हे के दर्द का इलाज क्या है. कब सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है.
कूल्हे में दर्द के कारण
इसके बारे में हमें बताया डॉक्टर पंकज वालेचा ने.

कूल्हे में दर्द का कारण मरीज़ की उम्र पर निर्भर करता है. कुछ कारण ऐसे होते हैं जो गंभीर नहीं होते. जो लोग बिना ट्रेनर की निगरानी में या सिर्फ़ वीकेंड पर एक्सरसाइज़ करते हैं. उनकी कूल्हे की मांसपेशियों में सूजन आ सकती है. ये मांसपेशियां हिप फ्लेक्सर्स कहलाती हैं और इनमें होने वाले दर्द को हिप फ्लेक्सर पेन कहते हैं. कूल्हे में दर्द का ये सबसे आम कारण है.
कुछ वजहें गंभीर भी हो सकती हैं, जिन्हें समय पर पहचानना और समझना ज़रूरी है. एवैस्कुलर नेक्रोसिस या AVN कूल्हे के जोड़ की एक गंभीर बीमारी है. इसमें कूल्हे की बॉल तक खून की सप्लाई कम या बंद हो जाती है. जब खून नहीं पहुंचता, तो बॉल धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है. इससे कूल्हे में बहुत तेज़ दर्द होता है.
दूसरा कारण एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस हो सकता है. इसे बड़े जोड़ों का गठिया भी कहा जाता है. ये समझना ज़रूरी है कि हर जोड़ का दर्द गठिया नहीं होता. एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस में आमतौर पर हाथों की उंगलियों के छोटे जोड़ प्रभावित नहीं होते, जैसा कि रूमेटॉयड आर्थराइटिस में देखा जाता है. ये बीमारी ज़्यादातर 20 से 50 साल की उम्र के लोगों में देखने को मिलती है.
तीसरा कारण गठिया बाय (रूमेटॉयड आर्थराइटिस) हो सकता है. इसमें हाथों के छोटे जोड़ों के साथ-साथ कूल्हे का जोड़ भी ख़राब हो सकता है. अगर पहले कभी कूल्हे में फ्रैक्चर हुआ हो. तब हड्डी जुड़ जाने के बाद भी आगे चलकर कूल्हे का जोड़ ख़राब हो सकता है. इन कारणों की वजह से कूल्हे में दर्द हो सकता है.
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कैसे पता चलेगा, दर्द कूल्हे से आ रहा है या कमर की समस्या से?
अगर दर्द कूल्हे के पीछे वाले हिस्से में हो रहा है. तब लोग अक्सर इसे कूल्हे के जोड़ का दर्द समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. कूल्हे के जोड़ का दर्द आमतौर पर आगे की तरफ होता है. यानी जहां पैंट की आगे वाली जेब होती है. इस हिस्से में दर्द कूल्हे के जोड़ की वजह से होता है.
अगर कूल्हे के पिछले हिस्से में दर्द हो, जहां पैंट की पीछे वाली जेब होती है. तब अक्सर वो साइटिका या कमर की नस दबने की वजह से होती है.

किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें?
अगर कूल्हे के आगे वाले हिस्से में दर्द हो रहा है. ये दर्द बैठ के उठने पर ज़्यादा होता है. चलना शुरू करते हैं, तब ज़्यादा होता है. कुछ कदम चलने के बाद ठीक होने लगता है. फिर ज़्यादा देर चलने पर बढ़ जाता है. ऐसा दर्द कई बार एवैस्कुलर नेक्रोसिस की वजह से हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से मिलकर कूल्हे का एक्स-रे कराना चाहिए.
अगर एक्स-रे सामान्य आए, तो इसका मतलब ये नहीं कि कोई बीमारी नहीं है. अगर मेडिकल ट्रीटमेंट लेने के बाद दर्द ठीक हो जाए, तब अच्छी बात है. लेकिन अगर दवाइयों के बाद भी दर्द बना रहे. तब MRI कराकर AVN या एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है. एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस को कंफर्म के लिए कुछ ब्लड टेस्ट भी किए जाते हैं.
अगर कूल्हे में फ्रैक्चर की वजह से दर्द हो रहा है. यानी पहले कभी कूल्हे में फ्रैक्चर हुआ हो, उसका इलाज या सर्जरी हो चुकी हो. फिर कुछ सालों बाद दर्द शुरू हो जाए, तो इसे भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में एक्स-रे से पता लग जाता है कि कूल्हे का जोड़ ख़राब तो नहीं हो रहा.
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कूल्हे का दर्द होने पर क्या गलतियां न करें?
अगर कूल्हे का दर्द हिप फ्लेक्सर पेन है. तब ये अक्सर फिज़ियोथेरेपी, दवाइयों और आसान एक्सरसाइज से ठीक हो सकता है. दर्द के दौरान कुछ समय के लिए उन एक्टिविटीज़ से बचना चाहिए, जिनसे दर्द बढ़ता हो. जैसे ज़्यादा देर तक चलना. दौड़ना या बार-बार सीढ़ियां चढ़ना-उतरना. कई लोग सोचते हैं कि सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से वज़न कम होगा और जोड़ों पर दबाव घटेगा. लेकिन अगर आपको हिप फ्लेक्सर पेन है, तो ऐसा करने से दर्द और बढ़ सकता है. इसलिए अगर किसी भी एक्टिविटी से दर्द बढ़ रहा है, तो उसे कुछ समय के लिए रोक दें. डॉक्टर से मिलकर बीमारी का पता लगाएं और इलाज कराएं.
कूल्हे के दर्द का इलाज क्या, सर्जरी कब करानी पड़ती है?
कूल्हे के दर्द का इलाज उसकी वजह पर निर्भर करता है. इसलिए दर्द की सही वजह पता चलना बहुत ज़रूरी है. अक्सर लोग घर पर ही कूल्हे के दर्द का इलाज करने लगते हैं. कई बार दोस्तों से पूछकर दर्द दूर करने की कोशिश करते हैं. कभी वो एक्टिविटीज़ करते रहते हैं, जिससे दर्द बढ़ता है. बिना डॉक्टर से पूछे दर्द की दवाई खाते-रहते हैं. समस्या को नज़रअंदाज़ करके आप अपनी बीमारी बढ़ा रहे हैं.
अगर एवैस्कुलर नेक्रोसिस तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंच जाए. अगर एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस से कूल्हे का जोड़ पूरी तरह ख़राब हो जाए. अगर पहले हुए फ्रैक्चर के बाद कूल्हे के जोड़ में अर्थराइटिस हो जाए. तब इन मामलों में टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी करके बहुत फ़ायदा मिलता है. इन्हीं कंडीशंस में सर्जरी की ज़रूरत पड़ती भी है. अक्सर AVN की शुरुआती स्टेज (स्टेज 1 और 2) में कई मरीज़ों को ठीक किया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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