भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंज़ूरी मिल गई है. DCGI यानी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने अपना अप्रूवल दे दिया है. DCGI से अप्रूवल का मतलब है कि अब इस वैक्सीन के भारत में बिकने का रास्ता साफ हो गया है.
भारत में डेंगू की वैक्सीन QDENGA को मंजूरी, जानें कौन लगवा पाएगा
डेंगू की ये वैक्सीन जापान की फार्मास्युटिकल कंपनी टकेडा ने बनाई है. इसका नाम है- क्यूडेंगा (QDENGA). वैक्सीन के दो डोज़ लगेंगे. दोनों ही 0.5 मिलीलीटर के होंगे. पहले डोज़ के तीन महीने बाद दूसरा डोज़ लगाया जाएगा.

डेंगू की ये वैक्सीन जापान की फार्मास्युटिकल कंपनी टकेडा ने बनाई है. इसका नाम है- क्यूडेंगा (QDENGA). भारत में ये वैक्सीन 4 से 60 साल के लोगों को लगाई जा सकेगी. वैक्सीन के दो डोज़ लगेंगे. दोनों ही 0.5 मिलीलीटर के होंगे. पहले डोज़ के तीन महीने बाद दूसरा डोज़ लगाया जाएगा.
वैक्सीन को मंज़ूरी क्यों अहम?डेंगू एडीज़ मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है. ये भारत में एक बहुत बड़ी समस्या है. दुनियाभर में डेंगू के जितने भी मामले आते हैं, उनमें से एक-तिहाई सिर्फ भारत से होते हैं. मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के मुताबिक, साल 2025 में डेंगू के 1 लाख 21 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए थे. 131 मौतें भी हुई थीं.
इस साल फरवरी तक डेंगू के करीब 7 हज़ार मामले आ चुके हैं. 10 मौतें भी हुई हैं. अभी चल रहा है जुलाई. आशंका है ये आंकड़ा और बढ़ गया होगा. डेंगू अब कोई मौसमी बीमारी नहीं है. जो सिर्फ बरसात के सीज़न में होती है. इसके मामले सालभर देखने को मिल रहे हैं. डेंगू की कोई खास दवा भी नहीं है. इसलिए इस वैक्सीन से काफी उम्मीदें हैं.
ये भी पढ़ें: लिवर ख़राब होना शुरू हुआ तो पैरों पर दिखेंगे ये संकेत, इग्नोर न करें
वैक्सीन की खास बातेंइस वैक्सीन को लगाने से पहले कोई टेस्ट करने की ज़रूरत नहीं है. यानी आपको पहले डेंगू हुआ हो या न हुआ हो. इसे दोनों ही कंडीशंस में लगाया जा सकता है.
डेंगू वायरस चार तरह का होता है. DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4. क्यूडेंगा वैक्सीन इन चारों तरह के डेंगू से बचाने के लिए बनाई गई है. इसमें वायरस का कमज़ोर रूप होता है. जो बीमारी नहीं फैलाता. बल्कि शरीर को डेंगू वायरस पहचानना और उससे लड़ना सिखाता है.
टकेडा में इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स के हेड, डॉक्टर महेंद्र नायक का कहना है कि 2022 में लॉन्चिंग के बाद से क्यूडेंगा को 43 देशों में मंज़ूरी मिल चुकी है, और दुनियाभर में इसकी तीन करोड़ से ज़्यादा डोज़ दी जा चुकी हैं.

भारत में क्यूडेंगा को मंज़ूरी टकेडा के बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स के आधार पर मिली है. कंपनी ने फेज़-1, फेज़-2 और फेज़-3 के 19 क्लीनिकल ट्रायल किए. जिसमें 28 हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल हुए. ये ट्रायल उन देशों में भी हुए, जहां डेंगू आम है और ऐसे देशों में भी, जहां डेंगू कम फैलता है. सबसे बड़ा ट्रायल फेज़-3 TIDES था. ये 8 देशों के 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों पर किया गया. ताकि लंबे समय तक वैक्सीन की सुरक्षा और असर का पता चल सके.
ट्रायल में पता चला कि दूसरी डोज़ लगने के एक साल बाद ये वैक्सीन डेंगू से बचाने में करीब 80% असरदार रही. डेढ़ साल बाद डेंगू की वजह से अस्पताल में भर्ती होने का ख़तरा 90% तक कम हो गया. साढ़े चार साल बाद भी ये अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में 84% तक असरदार रही. वहीं, 7 साल तक के आंकड़ों से पता चला कि क्यूडेंगा वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रकारों के खिलाफ लगातार सुरक्षा देती रही.
क्यूडेंगा को मंज़ूरी मिलने में भारत में हुए फेज़-3 ट्रायल के नतीजों की भी भूमिका रही. इसमें 4 से 60 साल के लोगों पर वैक्सीन की सुरक्षा और असर को परखा गया. ट्रायल में ये वैक्सीन बच्चों, किशोरों और बड़ों में सुरक्षित पाई गई.
ये भी पढ़ें: ब्लड डोनेट करने के कई फायदे, लेकिन कब नहीं करना चाहिए? डॉक्टर से समझिए
कौन बनाएगा क्यूडेंगा वैक्सीन?भारत में क्यूडेंगा वैक्सीन बनाने का काम सिर्फ टकेडा नहीं करेगी. उसने भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है.
क्यूडेंगा को साल 2024 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है. इसका मतलब है कि WHO ने जांच के बाद इसे अच्छी क्वालिटी का, असरदार और सुरक्षित माना है. इससे तमाम देशों में इस वैक्सीन को इस्तेमाल करना आसान हो जाता है.
डॉक्टर इस वैक्सीन से कितनी उम्मीद लगा रहे?क्यूडेंगा से पहले भारत में डेंगू की कोई वैक्सीन नहीं थी. ऐसे में इसके आने से कितना फर्क पड़ेगा? क्या डेंगू के मामले कम होंगे? और डॉक्टर इस वैक्सीन से कितनी उम्मीद लगा रहे हैं? ये हमने जाना फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट, डॉक्टर भानु मिश्रा से.

डॉक्टर भानू कहते हैं कि क्यूडेंगा को भारत में मंज़ूरी मिलना डेंगू से लड़ाई में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक देश में डेंगू की कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं थी. ये वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रकार से सुरक्षा देने के लिए विकसित की गई है. इसे लगाने से पहले ये जांचने की भी ज़रूरत नहीं कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं. इससे बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन आसान हो सकता है. हालांकि, सिर्फ वैक्सीन से डेंगू पूरी तरह कंट्रोल नहीं होगा. असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वैक्सीन कितने लोगों तक पहुंचती है. इसकी कीमत क्या होगी और सरकार इसे यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम यानी सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करती है या नहीं. पर उम्मीद है कि इससे गंभीर डेंगू, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामलों में कमी आएगी.
बाकी डेंगू से बचने के लिए अपने आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें. जहां ऐसा होने का रिस्क हो. जैसे पुराने टायर, गमले, कूलर या टंकी में, तो उन्हें रोज़ खाली करें या ढककर रखें. पूरी बांह के कपड़े पहनें. खासकर अगर आपके आसपास मच्छर बहुत ज़्यादा हों. सुबह और शाम के समय खिड़की-दरवाज़ें बंद रखें. साथ ही, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और मॉस्किटो रेपेलेंट लगाएं. और डेंगू से जुड़े किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें. जैसे अचानक तेज़ बुखार, भयंकर सिरदर्द, बदन दर्द, बहुत थकान, आंखों के पीछे दर्द, उबकाई या उल्टी, दस्त और शरीर पर चकत्ते. ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपनी जांच कराएं.
वीडियो: सेहत: लिवर ख़राबी के लक्षण पैरों में क्यों दिखते हैं?













