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एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन आंत की इस गंभीर कंडीशन से जूझ रहीं, जानें क्या है टर्मिनल इलाइटिस

जब से जैस्मिन ने टर्मिनल इलाइटिस का ज़िक्र किया है, कई लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ये है क्या और कितनी गंभीर है. इसलिए हमने डॉक्टर सरोज दुबे से बात की और उनसे इस कंडीशन के बारे में सबकुछ जाना.

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एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन

एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन ने हाल ही में बताया कि वो टर्मिनल इलाइटिस नाम की कंडीशन से जूझ रही हैं. ये छोटी आंत से जुड़ी एक दिक्कत है. फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और वो धीरे-धीरे रिकवर कर रही हैं. 

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जब से जैस्मिन ने टर्मिनल इलाइटिस का ज़िक्र किया है, कई लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ये है क्या और कितनी गंभीर है. इसलिए हमने कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर सरोज दुबे से बात की और उनसे इस कंडीशन के बारे में सबकुछ जाना.

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डॉ. सरोज दुबे, सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा
टर्मिनल इलाइटिस क्या है? 

डॉक्टर सरोज बताते हैं कि टर्मिनल इलाइटिस उस सूजन को कहते हैं. जो छोटी आंत के आखिरी हिस्से टर्मिनल इलियम में होती है. 

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टर्मिनल इलाइटिस के लक्षण 

- पेट के निचले दाईं तरफ भयंकर दर्द और ऐंठन.

- गंभीर दस्त, मल में खून.

- बेवजह वज़न घटना.

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- लगातार थकान रहना.

- कभी-कभी बुखार आना.

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ये छोटी आंत का आखिरी हिस्सा टर्मिनल इलियम है 
टर्मिनल इलाइटिस के कारण 

टर्मिनल इलाइटिस कई वजहों से हो सकता है. इसका सबसे बड़ा कारण क्रोहन्स डिज़ीज़ है. क्रोहन्स डिज़ीज़ एक ऑटोइम्यून और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है. ये डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में गंभीर सूजन करती है. खासकर छोटी और बड़ी आंत में.

इसके अलावा, बैक्टीरियल, वायरल या पैरासाइटिक इंफेक्शन भी टर्मिनल इलाइटिस कर सकते हैं. ये उन ऑटोइम्यून बीमारियों और कंडीशंस की वजह से भी हो सकता है. जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को प्रभावित करती हैं. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट यानी वो सारे अंग जो खाना निगलने, पचाने, सोखने और शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं. कभी-कभार कुछ खास दवाएं भी टर्मिनल इलाइटिस कर सकती हैं.

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इलाज और बचाव 

इसका इलाज और गंभीरता पूरी तरह कारण पर निर्भर करती है. अगर क्रोहन्स डिज़ीज़ है, तो इम्यूनोसप्रेसेंट या एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं दी जाती हैं. कोई इंफेक्शन है, तो उसे ठीक किया जाता है. अगर दवाओं से आराम नहीं मिलता या कोई कॉम्प्लिकेशन हो जाती है तब सर्जरी की ज़रूरत भी पड़ सकती है.

वैसे तो टर्मिनल इलाइटिस होना पूरी तरह नहीं रोक सकते. लेकिन इसका रिस्क ज़रूर घटा सकते हैं. इसके लिए साफ खाना-पीना करें. आपके खाने में फाइबर ज़रूर हो. साथ ही स्मोकिंग न करें और कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे वक्त तक न लें. और अगर काफी टाइम से दस्त हों. पेट में निचली दाईं तरफ दर्द रहता हो. बेवजह वज़न घटे. या मल में खून आए. तो डॉक्टर से जांच ज़रूर कराएं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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