राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर क्या बसपा प्रमुख मायावती और सीएम योगी आदित्यनाथ की राय एकमत है? जब सारा विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बीजेपी को घेर रहा है, तब चार बार यूपी की सीएम रहीं मायावती के एक सोशल मीडिया पोस्ट से काफी लोगों को हैरानी हुई.
योगी आदित्यनाथ और मायावती राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एकमत?
राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की खबरें जून के पहले हफ्ते में ही आनी शुरू हो गई थीं. तब से ये देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. लेकिन मायावती की प्रतिक्रिया आई महीने की आखिरी तारीख 30 जून को.


मायावती सोशल मीडिया पर हैं लेकिन रेगुलर नहीं हैं. जिस दौर में नेता घंटे भर में दर्जनों पोस्ट, तस्वीरें, वीडियो डाल देते हैं, वहीं बसपा प्रमुख वक्त लेकर कुछ कहती हैं.
मायावती-योगी राम मंदिर चोरी विवाद पर एकमत?राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की खबरें जून के पहले हफ्ते में ही आनी शुरू हो गई थीं. तब से ये देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. लेकिन मायावती की प्रतिक्रिया आई महीने की आखिरी तारीख 30 जून को. वहीं उत्तर प्रदेश की ज्यादातर छोटी-बड़ी खबरों और मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले अखिलेश यादव यहां भी पीछे नहीं रहे.
राम मंदिर चंदा चोरी मामले को उन्होंने पहले ही दिन लपक लिया था. 7 जून को एक्स पर एक पोस्ट कर अखिलेश यादव ने दावा किया था कि चढ़ावे से करोड़ों की रकम गायब कर दी गई है. साथ ही अदालत से आग्रह किया कि वो मामले का स्वतः संज्ञान ले, क्योंकि ‘सरकार की चुप्पी संदिग्ध’ है.
यहां भी विवाद को मुद्दा बनाने या उस पर कुछ कहने में अखिलेश, मायावती से आगे रहे. चंदा चोरी का आरोप लगने के बाद से अब तक काफी पानी बह गया. SIT गठित हो गई, कई आरोपी गिरफ्तार हो गए, उनके कच्चे-चिट्ठे खुल गए, चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो गया, राम भक्तों का दर्द भी छलका. इतना सब होने के बाद बसपा प्रमुख एक्टिव हुईं.
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लेकिन जब मायावती ने अपनी बात रखी तो लगा वो इस विवाद के तूल पकड़ने से बहुत खुश नहीं हैं. एक्स पर अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ लिखा कि राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.
मायावती के इस रुख ने हर उस शख्स का ध्यान खींचा जो यूपी की सियासत पर नजर रखता है. वजह सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वो बयान है जिसमें उन्होंने चंदा चोरी को लेकर कहा था कि दूध का दूध, पानी का पानी जरूर होगा. लेकिन इस मामले में राजनीति न करें.
यही बात मायावती ने अपने 30 जून के एक्स पोस्ट में कही. उन्होंने लिखा, ''गड़बड़ी करने वाले कतई बख्शे नहीं जाने चाहिए....पर इस मामले का राजनीतिकरण ठीक नहीं है.''
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राजनीति कहां रुकने वाली थी!केवल शब्दों और उनके अर्थ पर जाएं तो कह सकते हैं कि मायावती और योगी आदित्यनाथ ने एक जैसी ही बात कही है. लेकिन क्या ये राजनीतिक रूप से एकमत होना भी है?
ये सवाल कांग्रेस नेताओं से भी किया गया. पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत चढ़ावा चोरी विवाद पर एक प्रेस कांफ्रेंस कर रही थीं. उनसे पूछा गया कि बसपा सुप्रीमो मायावती के इस रुख पर उनकी क्या राय है. इस पर सुप्रिया पहले तो मुस्कुराईं. फिर बोलीं, ''बहन मायावती जी को देखकर मुझे दुख होता है. क्या कद्दावर नेता थीं, पर क्या हालत बना ली है उन्होंने. हर बार बीजेपी को कवर फायर देती हैं और विपक्ष होने का ढोंग भी करती हैं.''
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रभारी राजेंद्र गौतम से भी मायावती की टिप्पणी पर राय मांगी गई. जवाब में उन्होंने कहा, “जिस भारतीय जनता पार्टी की सारी राजनीति ही हिंदुत्व का ठेकेदार बनने में बीत गई, उससे रामलला के मंदिर से चोरी को लेकर सवाल भी न पूछा जाए, ये हमें मंजूर नहीं.”
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