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पीरियड्स में बाल धोने से ब्लीडिंग बढ़ जाती है? ऐसी ही 4 बातों का सच जान लीजिए

पीरियड्स को लेकर मन में कई सवाल आते हैं. लेकिन अक्सर उनके साफ और सटीक जवाब नहीं मिलते. आज डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन में कौन-सी छोटी गलती गंभीर इंफेक्शन कर सकती है.

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आपने पीरियड्स में बाल धोएं हैं?

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  • डॉक्टर अल्का चौधरी ने बताया कि पीरियड्स में बाल धोने से ब्लीडिंग बढ़ती नहीं है और इस दौरान सामान्य सफाई का बराबर ध्यान रखना चाहिए।
  • पीरियड्स के दौरान होने वाली भ्रांतियों के कारण महिलाओं को बाल धोने या एक्सरसाइज करने को लेकर गलतफहमियां पैदा होती हैं, जबकि ये दोनों कार्य सुरक्षित हैं।
  • पीरियड्स के दौरान पैड, टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप को चार से छह घंटे में बदलना जरूरी है, अन्यथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

हर महीने महिलाओं को पीरियड्स होते हैं. ये बहुत ही नेचुरल और नॉर्मल बात है. आमतौर पर पीरियड्स 3 से 7 दिनों तक रहते हैं. इन्हीं दिनों होती है पीरियड्स को लेकर बहुत सारी कन्फ्यूज़न. क्या करें, क्या न करें. क्या सही है, क्या गलत. पीरियड्स को लेकर मन में कई सवाल आते हैं. लेकिन अक्सर उनके साफ और सटीक जवाब नहीं मिलते.

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जैसे क्या पीरियड्स में बाल धोने से ब्लीडिंग बढ़ जाती है? क्या इन दिनों एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए? टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप और सैनिटरी पैड, इनमें सबसे बेहतर कौन है? सबसे बड़ा सवाल, क्या पीरियड्स का खून शरीर का गंदा खून होता है? आपके इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन में कौन-सी छोटी गलती गंभीर इंफेक्शन कर सकती है. 

पीरियड्स में बाल धोने से ब्लीडिंग बढ़ जाती है?

जवाब दे रही हैं डॉक्टर अल्का चौधरी.

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डॉ. अल्का चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट, मधुकर रेनबो चिल्ड्रंस हॉस्पिटल

पीरियड्स में बाल धोने से ब्लीडिंग नहीं बढ़ती. पीरियड्स के दौरान भी शरीर की साफ-सफाई का उतना ही ध्यान रखना चाहिए. आप सामान्य दिनों की तरह नहा सकती हैं और बाल भी धो सकती हैं. पीरियड्स में होने वाली ब्लीडिंग का नहाने या बाल धोने से कोई संबंध नहीं है.

पीरियड्स में एक्सरसाइज़ या योग नहीं करना चाहिए?

ये एक मिथक है. पीरियड्स के दौरान एक्सरसाइज़ और योग कर सकते हैं. कई महिलाओं को ब्लीडिंग की वजह से हैवी एक्सरसाइज़ करने पर थकान हो सकती है. इसलिए वो चाहें तो हैवी एक्सरसाइज़ करना अवॉइड कर सकती हैं. पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि पीरियड्स में एक्सरसाइज़ नहीं करनी चाहिए. आप हल्की एक्सरसाइज़ और वॉक वगैरा कर सकती हैं.

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सैनिटरी पैड से ज़्यादा सेफ़ टैम्पॉन और मेंस्ट्रुअल कप?

पीरियड्स के दौरान टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप और सैनिटरी पैड, तीनों ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इनमें से कोई भी विकल्प दूसरे से बेहतर या कमतर नहीं है. जो चीज़ आपको सबसे ज़्यादा आरामदायक लगे, उसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

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अपनी सुविधा के हिसाब से आप टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप या सैनिटरी पैड इस्तेमाल कर सकती हैं

पीरियड्स का खून शरीर का गंदा खून होता है?

पीरियड्स का खून शरीर का गंदा खून नहीं होता. हर महीने महिला के शरीर में एक अंडाणु (एग) रिलीज़ होता है. संभावित प्रेग्नेंसी की तैयारी के लिए बच्चेदानी (यूटेरस) की अंदरूनी परत मोटी होने लगती है. इस परत में खून की नलियां भी बढ़ जाती हैं. 

जब प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो ये परत झड़कर शरीर से बाहर निकल जाती है. पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून इसी परत और खून का मिश्रण होता है. इसलिए पीरियड्स का खून कोई गंदा खून नहीं होता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन में कौन-सी गलती गंभीर इंफेक्शन कर सकती है?

पीरियड्स के दौरान पैड, टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप को समय-समय पर बदलना बहुत ज़रूरी है. अगर टैम्पॉन 12 घंटे से ज़्यादा वजाइना में रहे, तो वो टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसा खतरनाक इंफेक्शन कर सकता है. टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम क्या होता है, वो आप यहां क्लिक करके समझ सकते हैं. इसलिए पैड और टैम्पॉन को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए. पैड लंबे समय तक लगाए रखने से नमी बढ़ जाती है. अगर पैड 12 से 24 घंटे तक न बदला जाए, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. अच्छी मेंस्ट्रुअल हाइजीन के लिए पैड या टैम्पॉन को समय पर बदलना बहुत ज़रूरी है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

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