कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक शख्स महाराष्ट्र के नासिक जा रहा था. उसने टिकट भी खुद बुक कराई थी. लेकिन एक छोटी सी टाइपिंग मिस्टेक के कारण TTE ने उस पर 7 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया. शख्स ने 'रेल-मदद' पर जुर्माने की रकम वापस पाने की कोशिश की. लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली.
ट्रेन टिकट बुक करते वक्त एक टाइपो हुआ, TTE ने यात्री पर ₹7000 का जुर्माना ठोका
Train ticket one wrong digit mistake: 24 साल के रमाकांत एम को 23 जून को नागपुर जाना था. रात करीब 8 बजे वो 22691 नंबर वाली KSR बेंगलुरु-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में सवार हुए. ट्रेन चली. कुछ देर बाद TTE पहुंचे. रमाकांत का टिकट देखने के बाद उन्होंने हैरानी जताई और उन्हें रिजर्व्ड सेकंड AC बर्थ से उठाकर फर्स्ट कोच में ले गए.


24 साल के रमाकांत एम को 23 जून को नागपुर जाना था. रात करीब 8 बजे वो 22691 नंबर वाली KSR बेंगलुरु-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में सवार हुए. ट्रेन चली. कुछ देर बाद TTE पहुंचे. रमाकांत का टिकट देखने के बाद उन्होंने हैरानी जताई और उन्हें रिजर्व्ड सेकंड AC बर्थ से उठाकर फर्स्ट कोच में ले गए.
रमाकांत को समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है. लेकिन कुछ ही देर में उनकी उलझन दूर हुई. दूसरा TTE आया, उन्होंने टिकट देखा और शख्स पर 7 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने शख्स को बताया कि टिकट बुक करते समय उनकी उम्र ‘24’ के बजाय ‘1’ साल दर्ज हो गई थी. रमाकांत ने कहा,
"शुरुआत में मुझे लगा कि उनके सिस्टम में कोई समस्या है. लेकिन जब मैंने खुद टिकट चेक किया, तो मुझे एहसास हुआ कि यह मेरी तरफ से हुई टाइपिंग की गलती थी."
रमाकांत ने फिर अपनी उम्र साबित करने के लिए पहचान पत्र दिखाया. लेकिन कुछ नहीं हुआ. कोई चारा न होने पर उन्होंने UPI के जरिए जुर्माना भरा और रसीद ली. रमाकांत ने कहा,
“यह एक अनजाने में हुई गलती थी. अगर मैंने अपनी सही उम्र भी बताई होती, तो भी किराया उतना ही रहता क्योंकि मैंने किसी छूट या डिस्काउंट का दावा नहीं किया था. मेरे पास एक वैलिड सरकारी ID थी, जो मेरे नाम और पहचान से मेल खाती थी. फिर भी 'बिना टिकट' यात्रा करने के लिए मुझ पर 7,035 रुपये का जुर्माना लगाया गया. जिससे मेरी यात्रा का कुल खर्च 10,000 रुपये से ज्यादा हो गया.”
24 जून को नागपुर पहुंचने के बाद उन्होंने जुर्माने की रकम वापस पाने के लिए 'रेल-मदद' शिकायत निवारण सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज कराई. मगर एक दिन के अंदर ही उनकी कंप्लेन बंद कर दी गई. रेलवे ने कहा कि टिकट-चेकिंग स्टाफ की कार्रवाई मौजूदा नियमों के मुताबिक थी.
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रेलवे ने कहा कि यात्रियों को टिकट बुक करने के बाद उसकी जानकारी वेरिफाई करनी चाहिए. चार्ट बनने या यात्रा शुरू होने से पहले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर पर जाकर किसी भी गड़बड़ी को ठीक करवाना चाहिए. इस मामले में ट्रेन में चढ़ने से पहले गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया था. इसलिए यात्री को बिना सही टिकट के यात्रा करने वाला माना गया और रेलवे एक्ट 1989 की धारा 138 के तहत जुर्माना लगाया गया.
जुर्माना लगाया, तो रेलवे को चिंता क्यों हुई?साउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मंजूनाथ कनामाडी ने माना कि जुर्माना लगाना सही था. लेकिन केस को संभालने का तरीका नहीं. टिकट-चेकिंग स्टाफ के लिए यात्री को पैंट्री या किसी दूसरे डिब्बे में ले जाने की कोई जरूरत नहीं थी.
अधिकारी ने ऑनलाइन गड़बड़ी का जिक्र करते हुए कहा,
“IRCTC वेबसाइट के जरिए एक साल के बच्चे के अकेले यात्रा करने के लिए टिकट बुक करना मुमकिन नहीं है. यह कोई तकनीकी खराबी हो सकती है.”
उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है कि टिकट बुक करते समय यात्री की उम्र एक साल कैसे दर्ज हो गई.
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