The Lallantop

पड़ताल: क्या अहमदाबाद में लॉकडाउन के बावजूद सैकड़ों लोग नमाज पढ़ने मस्जिद में जमा हुए?

वायरल हो रहे वीडियो में भारी भीड़ दिख रही है.

Advertisement
post-main-image
अहमदाबाद का बताकर शेयर किए जा रहे वीडियो में कितनी सच्चाई है?

दावा

सोशल मीडिया पर मस्जिद से बाहर निकलते लोगों का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो को अहमदाबाद के जमालपुर का बताया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये घटना हालिया लॉकडाउन की है.
30 अप्रैल, 2020, को फ़ेसबुक यूजर पारस सोलंकी ने वीडियो पोस्ट
(आर्काइव लिंक)
करते हुए लिखा,
अहमदाबाद के जमालपुर के दृश्य
इस स्थिति मे लोकड़ाउन 3 मई तक तो क्या दिवाली तक रखेंगे तो भी कोरोना पर काबू नही पा सकेंगे ।😂😂
अहमदाबाद के जमालपुर के दृश्य
इस स्थिति मे लोकड़ाउन 3 मई तक तो क्या दिवाली तक रखेंगे तो भी कोरोना पर काबू नही पा सकेंगे ।😂😂
Posted by Paras Solanki
on Wednesday, 29 April 2020
इस वीडियो को फ़ेसबुक और ट्विटर
पर कई और यूजर ने सेम दावे के साथ शेयर किया है.

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने इस दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में वीडियो के साथ किया जा रहा दावा ग़लत निकला.
हमने वीडियो को ध्यान से देखा. वीडियो में एक जगह पुलिसवाला एक व्यक्ति को बुलाकर मस्जिद के बारे में पूछता है. जवाब मिलता है, ‘तेमकार मोहल्ला’.
हमने गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि मस्जिद का नाम सुन्नी शफ़ी मस्जिद है और ये मुंबई के नागपाड़ा इलाक़े में स्थित है.
मस्जिद का पता.
मस्जिद का पता.

इस क्लू के आधार पर हमने कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया. हमें 24 मार्च, 2020 की PTI की एक रिपोर्ट
 
(आर्काइव लिंक)
 मिली. इसके अनुसार, सोमवार, 23 मार्च, को मुंबई की एक मस्जिद में लगभग 150 लोग नमाज़ पढ़ने के लिए जमा हुए थे. कोरोना वायरस संकट की वजह से इलाक़े में धारा 144 लगाई गई थी. इसके बावजूद ये लोग नियमों को धता बताकर नमाज़ पढ़ने आए थे.

पीटीआई की रिपोर्ट में कर्फ़्यू के उल्लंघन का ज़िक्र है.
पीटीआई की रिपोर्ट में कर्फ़्यू के उल्लंघन का ज़िक्र है.

इस जमावड़े की सूचना मिलने के तुरंत बाद एसीपी अविनाश धर्माधिकारी ने मौके पर पहुंचकर लोगों को अपने-अपने घर लौटने के लिए कहा. पुलिस ने सुन्नी शफ़ी मस्जिद के ट्रस्टीज़ पर कई धाराओं में केस भी दर्ज किया था.
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उस वक़्त भी इस घटना का वीडियो शेयर किया था. (आर्काइव लिंक)

23 मार्च की मुंबई मिरर की रिपोर्ट
(आर्काइव लिंक)
के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 23 मार्च को राज्यभर में कर्फ़्यू लगा दिया था. रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग ‘जनता कर्फ़्यू’ का ठीक से पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए ऐसा फ़ैसला लेना पड़ा. धारा 144 के तहत पांच या पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने को दंडनीय अपराध माना जाता है. 
देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से एक दिन पहले महाराष्ट्र में धारा 144 लगा दी गई थी.
देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से एक दिन पहले महाराष्ट्र में धारा 144 लगा दी गई थी.

कोरोना वायरस संकट के कारण 22 मार्च को ‘जनता कर्फ़्यू’ लगाया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार, 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा 24 मार्च को की थी. 

नतीजा

वायरल वीडियो को कोरोना लॉकडाउन के दौरान का बताने का दावा ग़लत है. ये वीडियो अहमदाबाद के जमालपुर का नहीं, बल्कि मुंबई के तेमकार मोहल्ले का है. ये वीडियो 23 मार्च की घटना से संबंधित है. उस दिन महाराष्ट्र में धारा 144 लगाई गई थी. इसके बावजूद 100-150 लोग मस्जिद में जमा हुए. मस्जिद के कर्ता-धर्ताओं पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था. देशव्यापी लॉकडाउन 24 मार्च की आधी रात से शुरू हआ था.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

Advertisement

कोरोना वायरस से जुड़ी हर बड़ी वायरल जानकारी की पड़ताल हम कर रहे हैं. इस लिंक पर क्लिक करके जानिए वायरल दावों की सच्चाई.

Advertisement
Advertisement