दावा
सोशल मीडिया पर समुद्र के किनारे बहती लाशों का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें दावाकिया जा रहा है कि चीन ने कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों को समुद्र में बहा दिया है. वीडियो के साथ वायरल मैसेज में बताया जा रहा है कि चीन ने दूसरे देशों के लोगों में संक्रमण फैलाने के लिए ऐसा किया है.
24 अप्रैल, 2020 को फ़ेसबुक यूजर आपका एमपी मनीष पारीक ने वीडियो पोस्ट (आर्काइव लिंक)
करते हुए लिखा,
चीन ने कोरोना वायरस से मरने वालों को समुद्र में फेंक दिया है। ताकि समुद्र में रहने वाली मछलियाँ और अन्य जीव कोरोना से दूषित हों। इस मछली को खाने के बाद दूसरे देशों के लोग भी कोरोनस से पीड़ित होते हैं। योजना के अनुसार, चीन सागर में डंप किए गए शव ताइवान, हांगकांग, सिंगापुर और मकाऊ के तट पर आ गए हैं.
चीन ने कोरोना वायरस से मरने वालों को समुद्र में फेंक दिया है। ताकि समुद्र में रहने वाली मछलियाँ और अन्य जीव कोरोना से दूषित हों। इस मछली को खाने के बाद दूसरे देशों के लोग भी कोरोनस से पीड़ित होते हैं। योजना के अनुसार, चीन सागर में डंप किए गए शव ताइवान, हांगकांग, सिंगापुर और मकाऊ के तट पर आ गए हैं
Posted by Aapka MP Manish Pareek
on Thursday, 23 April 2020
पर भी सेम दावे के साथ कई यूजर्स ने शेयर किया है. मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी इस वीडियो को वायरल किया जा रहा है.

इसी दावे के साथ वीडियो घुमाया जा रहा है.
पड़ताल
‘दी लल्लनटॉप’ ने वायरल वीडियो के साथ हो रहे दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावा ग़लत निकला.कीवर्ड्स से सर्च करने पर हमें इंटरनेट पर ऐसी कोई प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें चीन या किसी अन्य देश द्वारा कोविड-19 से मरनेवाले लोगों को समुद्र में बहाने की ख़बर आई हो.
हमने वीडियो के एक फ़्रेम को यानडेक्स पर रिवर्स इमेज सर्च के जरिए चेक किया. हमें तुर्की की वेबसाइट Demokrathaber की एक रिपोर्ट
(आर्काइव लिंक)
मिली. 26 अगस्त, 2014 को पब्लिश रिपोर्ट का टाइटल है,
The lifeless bodies of immigrants whose boats capsized hit the shore! (ये उन प्रवासियों की लाशें हैं, जिनकी नाव समुद्र की लहरों से टकरा गई)

इस रिपोर्ट में लगी फ़ोटो वायरल वीडियो से मेल खाती है.
इसके अनुसार,
सीरिया से यूरोप जा रहे अवैध प्रवासियों की एक नाव समंदर में डूब गई. इस हादसे में सौ से ज़्यादा लोग लापता हो गए. अनुमान के अनुसार, नाव में 200 से अधिक प्रवासी सवार थे. इनमें से सिर्फ 16 को सुरक्षित निकाला जा सका.रिपोर्ट के मुताबिक़, ये हादसा लीबिया की राजधानी त्रिपोली से लगभग पचास किलोमीटर दूर अल-कर्बुली के पास हुआ.
इस क्लू के आधार पर हमने यूट्यूब पर सर्च किया. हमें यूट्यूब चैनल ‘euronews (In English)’ की एक वीडियो रिपोर्ट मिली. इसका टाइटल है,
Dozens of Migrant bodies are washed ashore in Libya (लीबिया में दर्ज़नों प्रवासियों की लाशें समंदर में बह गईं)
ये वीडियो यूट्यूब पर 26 अगस्त, 2014 को अपलोड किया गया था. वीडियो के डिस्क्रिप्शन के मुताबिक़, समंदर में डूबे लोगों के कागज़ात नहीं मिलने के कारण बचाव दल मृत लोगों की लिस्ट नहीं बना पाया. और, ये लोग कहां से आए थे, इसकी पुख़्ता ज़ानकारी भी नहीं मिल सकी.

बाईं तरफ है वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट, जबकि दाईं तरफ़ यूरो न्यूज़ के वीडियो का स्क्रीनग्रैब लगा है. आप दोनों में समानता देख सकते हैं.
नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत दिसंबर, 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट
बताती है कि लीबिया में नोवेल कोरोना वायरस का पहला मामला 24 मार्च, 2020, को सामने आया था.













