केरल के त्रिशूर में ‘बुरी आत्माओं’ को भगाने के के नाम पर एक 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला का रेप किया गया. उत्पीड़न का आरोप 61 वर्षीय मोहम्मद पर लगा. निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत रेप और यौन उत्पीड़न के अपराधों के लिए उसे 10 साल की सजा सुनाई. इस फैसले को चुनौती देते हुए मोहम्मद ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मगर अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी है.
73 साल की बुजुर्ग महिला से रेप किया, सजा हुई तो रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंचा, फिर...
Kerala High Court Elderly woman rape evil spirits: केरल के त्रिशूर में महिला के साथ रेप के मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी. निचली अदालत ने उसे 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए वो कोर्ट गया था.

यह मामला 8 अक्टूबर 2022 से जुड़ा है. पीड़िता अपने बेटे के कहने पर आरोपी से मिली थी. पहले से भी दोनों एक दूसरे को जानते थे. आरोपी 3 दफा उनके घर भी आ चुका था. लेकिन जब वो 8 अक्टूबर को आया, तो उसने दावा किया कि महिला के शरीर में ‘बुरी आत्माएं’ है. उन्हें निकालना होगा.
कोर्ट ने सुनाई सजाआरोप है कि इस बहाने उसने महिला के ब्रेस्ट को, उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ. मामला कोर्ट पहुंचा, ट्रायल कोर्ट ने उसे रेप और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया.
अदालत ने उसे दो सजा सुनाई
पहली- रेप के मामले में 10 साल की सख्त कैद और 1 लाख रुपये जुर्माना.
दूसरी- यौन उत्पीड़न के अपराध के लिए 3 साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना.
जेल की ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी.
आरोपी ने कोर्ट के सामने क्या तर्क दिए?
आरोपी मोहम्मद ने इन सजाओं को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए कई तर्क दिए.
आरोपी का कहना था कि अपराध की तारीख में गड़बड़ी थी. शुरुआत में पीड़िता ने कहा था कि 7 अक्टूबर 2022 को घटना हुई. बाद में तारीख बदलकर 8 अक्टूबर कर दी. आरोपी ने पीड़िता के बेटे के बयान का भी हवाला दिया. उसने कहा कि संपत्ति विवाद के कारण महिला ने उसे झूठा फंसाया. शिकायत दर्ज करने में देरी की.
आरोपी ने कहा था कि महिला के शरीर पर चोट के भी कोई निशान नहीं थे. 12 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि तारीख की वजह से पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता कम नहीं हो जाती. महिला ने पुलिस को दिए बयान में तारीख ठीक कर ली थी. टेलीफोन रिकॉर्ड में भी 8 अक्टूबर को ही पीड़िता और आरोपी के बीच तीन कॉल की बात सामने आई.
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केरल हाई कोर्ट ने गौर किया कि महिला का अपने बेटे के साथ कुछ झगड़ा चल रहा था. दोनों के बीच मतभेद थे. इसलिए बेटे के बयान के आधार पर यौन उत्पीड़न की घटना को गलत नहीं माना जा सकता है.
अदालत ने पाया कि चोटों का ना होना पीड़िता को गलत साबित नहीं कर सकता है. कोर्ट ने डॉक्टर के इस स्पष्टीकरण को आधार माना कि घटना के 20 दिन बाद पीड़िता की मेडिकल जांच की गई थी. तब तक हमले से लगी चोटें ठीक हो सकती थीं.
FIR लेट दर्ज कराने की दलील पर कोर्ट ने गौर किया कि पीड़िता ने पुलिस के पास जाने से पहले अपने बच्चों से सलाह लेने का इंतजार किया था. हाई कोर्ट ने कहा कि रेप पीड़िता की गवाही दोषी को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त है. इसके बाद बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण न पाते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी.
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