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पड़ताल: क्या नोबेल जीत चुके जापानी वैज्ञानिक ने कहा, 'कोरोना चीन की लैब से शुरू हुआ है'?

दावा है कि प्रोफेसर तोसुको होंजो ने झूठा साबित होने पर नोबेल प्राइज़ तक लौटाने की बात कही है.

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वायरल हो रहे दावे में कितनी सच्चाई है?
दावा
जापान के नोबेल प्राइज़ विनर साइंटिस्ट टासुकु होंज़ो का एक कथित बयान सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर वायरल हो रहा है. इसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस चीन की लैब में बनाया गया. और, अगर उनकी बात झूठी साबित हुई तो वो अपना नोबेल प्राइज़ लौटा देंगे.
21 अप्रैल, 2020, को फ़ेसबुक यूजर रमेश कुमार श्रवण ने पोस्ट (आर्काइव लिंक)
किया,
Physiology & Medicine
नोबेल पुरस्कार पाने वाले जापान के प्रोफेसर डॉक्टर श्री तोसुको होंजो ने आज मीडिया के सामने यह बोल कर सनसनी फैला दी कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है यदि प्राकृतिक होता पूरी दुनिया में यह यूं तबाही नहीं मचाता क्योंकि विश्व के हर देश में अलग अलग टेंपरेचर होता है प्रकृति के अनुरूप है यदि यह कोरोनावायरस प्राकृतिक होता तो चीन जैसे अन्य देश जहां जैसा ही टेंपरेचर है या वातावरण है वहीं दबंग मचाता। यह स्विट्जरलैंड जैसे देश मैं फैल रहा है ठीक वैसा ही यह रेगिस्तानी इलाकों में भी फैल रहा है जबकि यह प्राकृतिक होता तो ठंडे स्थानों पर फैलता  परंतु गर्म स्थानों पर जाकर यह दम तोड़ देता।
मैंने जीव जंतु और वायरस पर 40 साल रिसर्च किया है यह प्राकृतिक नहीं है। यह बनाया गया है और यह वायरस पूरी तरह से आर्टिफिशियल है।चीन की वुहान लेबोरेटरी में मैंने 4 साल काम किया है , उस लेबोरेटरी के सारे स्टाफ से में पूरी तरह परिचित हूं कोरोना हादसे के बाद से मैं सब को फोन लगा रहा हूं परंतु सभी मेंबर्स के फोन बंद 3 महीने से आ रहे हैं. अब पता चल रहा है कि सारे लेब टेक्नीशियन की मौत हो गई है। मैं आज तक की अपनी सारी जानकारियों और रिसर्च के आधार पर यह 100% दावे के साथ कह सकता हूं: की कोरोना प्राकृतिक नहीं है । यह चमगादड़ से नहीं फैला है। यह चीन ने बनाया है ।यदि मेरी बात जो मैं आज बोल रहा हूं वह आज या मेरे मरने के बाद भी झूठी हो तो मेरा नोबेल पुरस्कार सरकार वापस ले सकती है । परंतु चीन झूठ बोल रहा है और यह सच्चाई एक दिन सबके सामने आएगी।
Physiology & Medicine
नोबेल पुरस्कार पाने वाले जापान के प्रोफेसर डॉक्टर श्री तोसुको होंजो ने आज मीडिया के सामने यह...
Posted by Ramesh Kumar Salwan
on Tuesday, 21 April 2020
फ़ेसबुक पर और भी कई यूजर्स
ने ये दावा शेयर किया है. ये मेसेज वॉट्सऐप पर भी वायरल है.

पड़ताल
‘दी लल्लनटॉप’ ने इस दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावा ग़लत निकला. प्रोफेसर टासुकु होंजो ने ऐसा कोई भी दावा करने से इनकार किया है.
पड़ताल की शुरूआत में कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें 01 अक्टूबर, 2018, की द गार्डियन की रिपोर्ट
मिली. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, टेक्सास यूनिवर्सिटी के प्रफ़ेसर जेम्स एलिसन और जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के प्रफ़ेसर टासुकु होंजो को, मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई. उन्हें ‘कैंसर’ के इलाज की दवाओं पर काम करने के लिए नोबेल मिला था. हमने क्योटो यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी की वेबसाइट पर टासुकु होंजो की जीवन-यात्रा
देखी. हमें पता चला कि होंजो ने अपने पूरे जीवन में कभी चीन की वुहान लेबोरेट्री में काम नहीं किया है. वायरल मेसेज में दावा किया जा रहा है कि टासुकु होंजो ने चार साल तक वुहान की लैब में काम किया. ये सरासर ग़लत है.

होंजो ने कभी चीन की किसी लैब में काम नहीं किया है.(स्रोत- क्योटो यूनिवर्सिटी)
होंजो ने कभी चीन की किसी लैब में काम नहीं किया है.(स्रोत- क्योटो यूनिवर्सिटी)

'दी लल्लनटॉप' ने ईमेल के ज़रिए डॉ. होंजो से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि कोरोना के चीन की लैब में बनने की बात उन्होंने नहीं कही.
इसके अलावा टासुकु होंजो का सबसे हालिया बयान क्योडो न्यूज़
(आर्काइव लिंक)
ने 18 अप्रैल को पब्लिश किया था. होंजो ने एक टीवी प्रोग्राम में कहा था कि जापान को अपने यहां PCR टेस्टिंग की संख्या बढ़ानी होगी. साथ ही, उन्होंने टोक्यो, ओसाका और नगोया में रहनेवाले लोगों को एक महीने तक बाहर न निकलने की सलाह भी दी थी.
टासुकु होंजो ने जापान के बड़े शहरों में रहनेवाले लोगों को एक महीने तक बाहर न निकलने की सलाह दी थी.
टासुकु होंजो ने जापान के बड़े शहरों में रहनेवाले लोगों को एक महीने तक बाहर न निकलने की सलाह दी थी.

इंटरनेट पर सर्च करने पर हमें टासुकु होंजो के कथित वायरल बयान से संबंधित कोई भी प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं मिली. ये स्पष्ट है कि टासुकु होंजो को 2018 में मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला. लेकिन, उन्होंने कभी वुहान की लैब में काम नहीं किया. उन्होंने न तो कोरोना वायरस के लैब में बनने का दावा किया और न ही वुहान लैब के टेक्नीशियंस की मौत का ज़िक्र किया है. उन्होंने अपनी बात ग़लत साबित होने पर नोबेल प्राइज़ वापस लेने का चैलेंज भी नहीं दिया है.
हमने आगे और सर्च किया. 19 अप्रैल की ‘द वीक’ की रिपोर्ट
(आर्काइव लिंक)
के अनुसार, नोबेल विजेता फ़्रांसीसी वैज्ञानिक ल्यूक मोंटेनियर ने आरोप लगाया था कि नोबेल कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है और इसे वुहान के एक लैब में बनाया गया. मोंटेनियर को HIV की खोज के लिए, 2008 का नोबेल पुरस्कार मिला था.
18 अप्रैल, 2020 की ‘लाइव साइंस’ की रिपोर्ट
है. इस रिपोर्ट में वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (WIV) के उप-प्रमुख युआन झिमिंग का बयान प्रकाशित किया गया है. उन्होंने वुहान की लैब से नोबेल कोरोना वायरस शुरू होने के दावों को सिरे से ख़ारिज़ कर दिया. एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट
के मुताबिक़, युआन झिमिंग ने बताया कि उनकी लैब में रिसर्च के दिशा-निर्देश काफ़ी सख्त हैं. ऐसे में लैब से नोबेल कोरोना वायरस के फैलने की बातें बेबुनियाद हैं.
वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी ने लैब से नोवेल कोरोना वायरस के फैलने के दावों का खंडन किया.
वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी ने लैब से नोबेल कोरोना वायरस के फैलने के दावों का खंडन किया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), ने लगातार कहा है कि नोबेल कोरोना वायरस के लैब से लीक होने का दावा
ग़लत है. वैज्ञानिक इस बिंदु पर रिसर्च कर रहे हैं कि ये नया जानलेवा वायरस इंसानों तक कैसे पहुंचा. शुरुआती रिसर्च में, शक की सुई चमगादड़ और पैंगोलिन पर टिकी हुई है.
नतीजा
जापान के नोबेल प्राइज़ विनर साइंटिस्ट टासुकु होंजो का कथित वायरल बयान झूठा है. टासुकु होंजो ने नोबेल कोरोना वायरस के लैब में बनने का दावा नहीं किया है और न ही अपना प्राइज़ लौटाने के लिए कोई शर्त रखी है. हमसे बातचीत में डॉ. टासुकु होंजो ने ऐसे दावे को ग़लत करार दिया.
हालांकि, नोबेल विजेता फ़्रांसीसी वैज्ञानिक ल्यूक मोंटेनियर ने कोरोना वायरस के मानव-निर्मित होने का दावा ज़रूर किया. लेकिन वुहान की लैब के उप-प्रमुख और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन दावों का खंडन किया है.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

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