समाचार प्लेटफ़ॉर्म ‘न्यूज़स्टेट’ ने अपनी एक रिपोर्ट
में दावा किया है कि जर्मनी ने कोरोना वायरस से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 149 बिलियन यूरो (लगभग 12.4 लाख करोड़ रुपये) का बिल भेजा है. इस रिपोर्ट में जर्मनी में कोरोना वायरस की वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में हुए नुकसान का ब्योरा दिया गया है.(आर्काइव लिंक
)

इस आर्टिकल में दावा किया गया है कि जर्मनी ने चीन से 149 बिलियन यूरो की रकम मांगी है.
दैनिक भास्कर
(आर्काइव लिंक)
ने भी इसी हेडलाइन से ये दावा किया है. ऐसा ही दावा सोशल मीडिया
पर भी किया जा रहा है.
पड़ताल
‘दी लल्लनटॉप’ ने इस दावे की विस्तृत पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावा भ्रामक निकला.
गूगल पर कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें जर्मन न्यूज़ चैनल ‘डॉयचे वेले’ (DW) की एक रिपोर्ट
मिली. 18 अप्रैल, 2020 को पब्लिश रिपोर्ट का टाइटल है,
German tabloid Bild demands China pay billions in coronavirus damages (जर्मन टैबलॉयड बिल्ड ने कोरोना वायरस से हुए अरबों के नुकसान का हर्ज़ाना चीन से मांगा)इसके मुताबिक़, ‘बिल्ड’ जर्मनी का सबसे बड़ा टैबलॉयड है. बिल्ड ने 15 अप्रैल को अपनी एक रिपोर्ट में जर्मनी में कोरोना वायरस से हुए नुकसान की लिस्ट बनाई थी. इसमें पर्यटन, सिनेमा, हवाई सेवा देने वाली कंपनी लुफ्थांज़ा, छोटे व्यापारी आदि को हुए नुकसान को शामिल किया गया था. साथ ही रिपोर्ट में ये भी मांग की गई कि चीन इस नुकसान की भरपाई करे.

बिल्ड के इसी आर्टिकल पर बवाल मचा है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने ‘बिल्ड’ के इस आर्टिकल
को नस्लभेदी बताया था.
हमें यूट्यूब पर DW न्यूज़ की 18 अप्रैल की एक वीडियो रिपोर्ट भी मिली. इसमें ‘बिल्ड’ के आर्टिकल पर मचे बवाल का तिया-पांचा समझाया गया था. साथ ही DW ने इस विवाद पर बिल्ड के एडिटर-इन-चीफ़ ‘जूलियन राइख़ट’ से भी बात की.
जूलियन राइख़ट ने 18 अप्रैल को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति और चीन की सरकार पर निशाना साधा. जूलियन ने चीन में सर्विलांस, अभिव्यक्ति पर पहरा और कोरोना वायरस को छिपाने के लिए चीनी सरकार की कड़ी आलोचना की थी.
China‘s embassy in Berlin wrote me an open letter because they weren‘t too happy with our Corona coverage. I responded.
Posted by Julian Reichelt
on Saturday, 18 April 2020
किया कि जर्मनी ने चीन को
कोरोना वायरस से संबंधित हर्ज़ाने वाला
है. ये एक अख़बार में प्रकाशित काल्पनिक बिल था. जिसे कई न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म्स ने सच मानकर अपने यहां प्रकाशित किया.
नतीजा
जर्मनी द्वारा चीन को 149 बिलियन यूरो के हर्ज़ाने वाला बिल भेजने का दावा भ्रामक है. असल में ये बिल एक जर्मन टैबलॉयड ने तैयार किया था, जिसमें जर्मनी में कोरोना वायरस से हुए कुल नुकसान का गणित लगाया गया था. आधिकारिक तौर पर जर्मनी ने ऐसा कोई बिल चीन को नहीं भेजा है.
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