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पड़ताल: क्या लॉकडाउन खुलने के बाद यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए 4 घंटे पहले स्टेशन आना होगा?

दावा किया जा रहा है, रेलवे स्टेशनों पर पैसेंजर्स की थर्मल स्क्रीनिंग भी होगी.

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रेलवे ने प्रेस रिलीज़ जारी कर सच बताया है.

दावा

सोशल मीडिया पर 15 अप्रैल से रेलगाड़ियां चलाने और प्रोटोकॉल्स के दावे वाले पोस्ट धड़ल्ले से शेयर हो रहे हैं. इसमें दावा किया जा रहा है कि यात्रियों को चार घंटे पहले स्टेशन आना होगा. और, स्टेशन पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग होगी. यात्रियों को 12 घंटे अपने सेहत की जानकारी देनी होगी. बीमार पाए जाने पर जबरन ट्रेन से उतार दिया जाएगा. बुजुर्गों को सफ़र न करने की सलाह दी जाएगी.. आदि आदि. फ़ेसबुक पेज समस्तीपुर लाइव ने एक आर्टिकल पोस्ट करते हुए लिखा,
Breaking News: 15 अप्रैल से ट्रेनें को चलाने की तैयारियां तेज, चार घंटे पहले आना होगा स्टेशन, जानें… नीचे लिंक पर क्लिक करके पुरी ख़बर पढ़ें 👇👇
Breaking News: 15 अप्रैल से ट्रेनें को चलाने की तैयारियां तेज, चार घंटे पहले आना होगा स्टेशन, जानें… नीचे लिंक पर क्लिक करके पुरी ख़बर पढ़ें 👇👇 Posted by Samastipur Live on Wednesday, 8 April 2020
यहां क्लिक करके आप आर्काइव लिंक देख सकते हैं- 1, 2 
इस पोस्ट को लगभग 900 बार शेयर किया जा चुका है. लाइव हिंदुस्तान (आर्काइव लिंक) ने भी इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया. कई फ़ेसबुक यूजर्स ने पूरे रिपोर्ट को अपनी टाइमलाइन पर पोस्ट किया है. कई और भी मीडिया रिपोर्ट्स में नए प्रोटोकॉल का ज़िक्र किया गया था.
15 अप्रैल से ट्रेनें चलाने की तैयारियां तेज, चार घंटे पहले आना होगा स्टेशन रेलवे मंत्रालय ने 15 अप्रैल से संभावित ट्रेन... Posted by Faheem Qarar on Thursday, 9 April 2020

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने इस दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावा भ्रामक निकला. कीवर्ड्स की मदद से ढूंढ़ने पर हमें 24 मार्च, 2020 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट मिली. इस रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से सभी पैसेंजर ट्रेनें 14 अप्रैल, 2020, तक बंद रहेंगी. रेलवे ने रेल म्यूजियम, हेरिटेज गैलरी और हेरिटेज पार्क को 15 अप्रैल तक बंद रखने का फैसला किया था. हमने इंडियन रेलवे की वेबसाइट को भी खंगाला. यहां भी हमें कोई ऐसा नोटिफिकेशन नहीं मिला, जिसमें 15 अप्रैल से नए प्रोटोकॉल लागू होने की बात कही गई हो. तब हमने रेल मंत्रालय के सोशल मीडिया अकाउंट्स का रुख किया. यहां हमें 10 अप्रैल का एक पोस्ट मिला. रेल मंत्रालय ने अपने फ़ेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर एक प्रेस रिलीज़ पोस्ट किया था. टाइटल पढ़िए,
‘ट्रेन सेवाओं के शुरू होने के बाद यात्रियों के लिए जारी प्रोटोकॉल्स संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स से संबंधित : मीडिया के लिए एडवायजरी.’
प्रेस रिलीज़ में भारतीय रेलवे ने कहा,
जैसा कि रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है, इस संबंध में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. कई मीडिया संस्थान ट्रेनों की संख्या और उनकी टाइमिंग का का ज़िक्र भी कर रहे हैं, जो बिल्कुल ही झूठ है. इससे लोगों के मन में ग़लत धारणाएं बन रही हैं. जब भी इस संबंध में कोई फैसला लिया जाएगा, सभी संबंधित लोगों को इसकी विधिवत सूचना दी जाएगी.
इससे पहले पीआईबी की फ़ैक्ट-चेक विंग ने भी ट्रेन के प्रोटोकॉल्स से संबंधित वायरल मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया था,
अफ़वाहों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रेल मंत्रालय ने लॉकडाउन के बाद यात्रा करने वाले पैसेंजर्स के लिए प्रोटोकॉल जारी किए हैं. ये दावे पूरी तरह से झूठे और भ्रामक हैं. कृप्या मंत्रालय की तरफ़ से जारी होने वाली प्रमाणित सूचनाओं पर ही भरोसा रखें.

नतीजा

15 अप्रैल से ट्रेनों के चलने और यात्रियों के लिए प्रोटोकॉल से संबंधित दावा पूरी तरह से ग़लत और भ्रामक निकला. रेल मंत्रालय ने लॉकडाउन खुलने के बाद रेलगाड़ियों में सफ़र करनेवाले यात्रियों के लिए कोई प्रोटोकॉल जारी नहीं किया है. रेल मंत्रालय ने भी प्रेस रिलीज़ जारी कर ऐसा दावा करने वाली मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है. 14 अप्रैल को 21 दिनों का लॉकडाउन खत्म होने जा रहा है. आगे क्या होगा, इसपर फ़ैसला लिया जाना अभी बाकी है. 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ लॉकडाउन खोलने या जारी रखने पर मीटिंग करने वाले हैं.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर. हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

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कोरोना वायरस से जुड़ी हर बड़ी वायरल जानकारी की पड़ताल हम कर रहे हैं. इस लिंक पर क्लिक करके जानिए वायरल दावों की सच्चाई.

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