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कहानी उस आदमी की जिसने हाथ कुचलकर पूछा था, 'बता हिंदू का ख़ून कौन सा और मुसलमान का कौन सा?'

पहली ही फिल्म में मिला था रेपिस्ट का रोल.

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अपनी मुंहफट अदा और साधारण लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं नाना.
नाना पाटेकर. एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक कमाल की शख्सियत. जिसने 'गुड लुक्स' और 'गुड बुक्स' जैसे सिनेमा जगत के सबसे चलायमान फॉर्मूलों को धता बताते हुए इंडस्ट्री में अपने लिए एक अलग जगह बनाई. फिर उसी जगह में उमड़-घुमड़ कर बेस्ट एक्टर समेत तीन नेशनल अवॉर्ड अपने खाते में जमा कर लिए. बचपन गरीबी में बीता और जवानी स्ट्रगल में. जब सब कुछ मिला तब तक तलब ही जाती रही. सिनेमा जिसे करने की भूख जगजानी है उसको उसने पेट की भूख की मजबूरी बता दी. 'विश्वनाथ' नाम से पैदा हुआ ये इंसान, किसानों और जरूरतमंदों की मदद से अब उसे चरितार्थ कर रहा है. नाना के फिल्मों में आने से लेकर और यहां तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. उनके इसी सफर को किस्सों की जुबानी हम आपके सामने पेश कर रहे हैं.
नाना पाटेकर आजकल मराठी फिल्म 'आपला मानूस' की शूटिंग में व्यस्त हैं.
नाना पाटेकर आजकल मराठी फिल्म 'आपला माणूस' की शूटिंग में व्यस्त हैं.

#1. धोखे से पापा की सारी संपत्ति छिन गई
नाना एक महाराष्ट्र के एक मराठी परिवार में 1 जनवरी, 1951 को पैदा हुए. पापा गजानन पाटेकर कपड़ा रंगने का बिजनेस करते थे. फिर एक समय आया जब उनके ही एक साथी ने धोखे से सारा धंधा और संपत्ति हड़प कर ली. उस वक्त नाना 13 के थे. ड्रामा में शुरू से इंट्रेस्ट था इसलिए स्कूल के दिनों से ही नाटक-नौटंकी में भाग लिया करते थे. लेकिन आर्थिक हालत बिगड़ने के बाद परिवार के लिए रोटी कमाने का काम पापा के सिर से छिटक इनके कंधों पर भी आ गया. जो उम्र बच्चों के खेलने-कूदने की होती है उसमें वो आठ किलोमीटर तय कर 35 रुपए महीने की कमाई करते थे. पेंटिंग करके. जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता था.
फिल्म 'यशवंत' के एक सीन में नाना पाटेकर.
फिल्म 'यशवंत' (1997) के एक सीन में नाना पाटेकर.

#2. खाना खाने के वक्त दोस्तों के घर चले जाते थे
अपने एक इंटरव्यू में नाना ने बताया कि पापा के पास से सब कुछ छिन जाने के बाद उनके घर में बहुत कड़की रहती थी. इसलिए कई बार वो खाने के वक्त पर अपने दोस्तों के घर चले जाते. इस आस में कि शायद वो खाने को पूछ ले और पेट भर जाए. उनके पापा हमेशा ये कहते थे, 'बच्चों के दिन आए खाने के और मेरे पास कुछ नहीं है'. शायद यही वजह रही जिसके चलते 1979 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. तब नाना 28 के थे और फिल्मों में आने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे.
फिल्म 'खामोशी' के एक सीन में नाना पाटेकर और सीमा विश्वास.
फिल्म 'खामोशी' के एक सीन में नाना पाटेकर और सीमा विश्वास.

#3. फिल्म में रेपिस्ट का रोल देने वाले डायरेक्टर से लड़ गए
मराठी फिल्मों में काम कर रहे नाना हिंदी फिल्मों के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे थे. एक हिन्दी फिल्म (गमन, 1978) कर चुके थे. लेकिन दूसरी नहीं मिल रही थी. ऐसे में नाना की दोस्त और मशहूर हिरोइन स्मिता पाटिल ने उनकी मदद की और फिल्ममेकर रवि चोपड़ा के पास लेकर गईं. रवि उस वक्त फिल्म 'आज की आवाज' (1984) की कास्टिंग कर रहे थे. उस फिल्म में नाना को एक रेपिस्ट का रोल ऑफर किया गया, जिससे नाराज होकर नाना वहां से जाने लगे. स्मिता ने उन्हें रोका और दोबारा से उन्हें रवि के पास लेकर गईं. इस बार नाना ने रवि से लड़-झगड़कर फिल्म में 'जगमोहनदास' का रोल ले लिया. ये रोल भी कुछ खास बड़ा नहीं था लेकिन नाना को उनकी एक्टिंग की वजह से नोटिस किया गया. इस फिल्म में स्मिता पाटिल और राज बब्बर लीड रोल निभा रहे थे.
फिल्म 'क्रांतिवीर' के दो दृश्यों में नाना.
फिल्म 'क्रांतिवीर' के दो दृश्यों में नाना.

#4. बेटे की मौत से हिल गए थे नाना
नाना ने साल 1978 में नीलकंठी नाम की एक लड़की से शादी कर ली जो एक बैंक में काम करती थीं. शादी के बाद नाना को एक बेटा हुआ जिसके होठ कटे होने के साथ और भी कई दिक्कतें थीं. नाना भी उस बच्चे से प्यार नहीं करते थे. उन्हें लगता था कि उनका बच्चा ऐसा कैसे हो सकता है. साथ ही उन्हें इस बात का भी डर था कि बच्चे को देखकर लोग क्या बोलेंगे. कुछ दिनों बाद उस बच्चे की मौत हो गई. इस मौत ने नाना को हिलाकर रख दिया. उन्हें अपनी सोच पर बहुत अफसोस हुआ और जिसके बाद नाना का जीने का तरीका बदल गया. नाना एक बेटे के पिता हैं जिसका नाम मल्हार पाटेकर है.
अपने बेटे मल्हार के साथ नाना पाटेकर.
अपने बेटे मल्हार के साथ नाना पाटेकर.

#5. एक दिन में साठ सिगरेट पीने वाले नाना ने इसलिए छोड़ दी सिगरेट
नाना की सिगरेट पीने की बहुत बुरी आदत थी. वो दिन की साठ सिगरेट पी जाया करते थे. लेकिन अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया. हुआ यूं कि नाना के बहुत ही अजीज़ दोस्त के इकलौते लड़के की मौत हो गई. उनकी पत्नी नाना की मुंहबोली बहन थीं. एक बार जब नाना बैठे खांस रहे थे तो उन्होंने कहा 'पता नहीं मुझे अभी क्या क्या देखना है?'. 2007 में हुए इस वाकए के बाद नाना ने सिगरेट को कभी हाथ तक नहीं लगाई.
फिल्म 'प्रहार' के एक सीन में नाना पाटेकर.
फिल्म 'प्रहार' के एक सीन में नाना पाटेकर.



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