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कहां से आया 'छलरे छलरे वाला' गाना, जो पूरे इंडिया की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है?

क्या 'छलरे छलरे वाल' पाकिस्तानी गाना है? क्या ये 'न कजरे की धार' की नकल है? पढ़िए इस गाने की पूरी कहानी.

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'न कजरे की धार' गाना सुनील शेट्टी के जन्म से पहले ही बन गया था.

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  • लोकगीत 'छलरे छलरे वाल' पाकिस्तान की सरायकी भाषा का सैकड़ों साल पुराना गाना है, जिसके लिरिक्स समय के साथ बदले लेकिन धुन में कोई बदलाव नहीं आया है।
  • यह गाना खास पहचान 2016 में पाकिस्तान के सरायकी गायक मुहम्मद हुसैन बंदियालवी के संस्करण से मिलने लगा, जिसकी लोकप्रियता 2018 में और बढ़ गई।
  • इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से यह गाना नई पीढ़ी तक पहुंचा और भारत में पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा ने इसे रिकॉर्ड कर वायरल होने में सहायता की।

महिलाओं की खूबसूरती की तारीफ में गाने सैकड़ों सालों से लिखे जा रहे हैं. मगर ऐसे गीत कम ही बने, जिसमें पुरुष की सुंदरता का ज़िक्र हो. उन चुनिंदा गानों में से एक Chalre Chalre Waal (Chhalrey Chhalrey Waal), जो इन दिनों इंटरनेट पर भयंकर वायरल हो रहा है. एक औरत के नज़रिए से लिखा गया ये गाना दशकों पुराना है. रोचक बात ये है कि इंस्टाग्राम पर आने से पहले इसकी धुन पाकिस्तान से होते हुए बॉलीवुड का सफ़र भी तय कर चुकी है.

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# क्या है ‘छलरे छलरे वाल’ का मतलब?

'छलरे-छलरे वाल' का सरल मतलब छल्ले जैसे घुंघराले बालों से है. इसलिए गाने के डिटेल में जाने से पहले इसके लिरिक्स समझते हैं, जो कुछ ऐसा है-

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तू सांवल फूल कस्तूरी
(तुम सांवले रंग के ऐसे खूबसूरत फूल हो, जिसमें कस्तूरी जैसी खुशबू है)
तेरी थी गई बहु मशहूरी
(तुम्हारी खूबसूरती की शोहरत बहुत दूर तक फैल गई है)
झा-झा ते, हर झा ते, पाए देंदे लोक मिसाल
(जहां-जहां भी लोग तुम्हें देखते हैं, तुम्हारे हुस्न की मिसाल देते हैं)
छलरे-छलरे वाल, मोंढे रखदैं काली शॉल
(तुम्हारे घुंघराले और लहराते हुए बाल हैं, कंधों पर काली शॉल है)
हथ चेनै रत्ता रुमाल, तेरियां रीसां कौन करे?
(हाथों में लाल रुमाल है, तुम्हारी बराबरी कौन करेगा?)

जो वर्जन इन दिनों सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा वायरल है, उसे आप यहां सुन सकते हैं-

# पाकिस्तान से है खास नाता

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गाने का अकेले यही हिस्सा काफी है ये बताने के लिए इसमें एक प्रेमिका अपने प्रेमी की सुंदरता की तारीफ़ कर रही है. आगे इस तरह के और स्टैंजा हैं, जहां लड़के के रंग-रूप पर बात की गई है. ऊपरी-ऊपर से देखें, तो लोगों को ये भ्रम हो सकता है कि ये पंजाबी लिरिक्स हैं. मगर ये पूरा सच नहीं. असल में ये पाकिस्तान की सरायकी भाषा का लोकगीत है. चूंकि इसे वहां के पंजाब प्रांत में बोला जाता है, इसलिए इसमें पंजाबी, पश्तो और उर्दू का मिक्स देखने को मिलता है. भारत में भी राजस्थान और पंजाब के कुछ बॉर्डर वाले इलाकों में भी सरायकी बोलने वाले लोग मिल जाते हैं.

# सैकड़ों साल पुरानी धुन

'छलरे छलरे वाल' सरायकी भाषा का एक ऐसा लोकगीत है, जिसके लिरिक्स तो समय के साथ बदलते रहे. मगर धुन बिल्कुल वैसी ही रही. लोकगीतों के साथ अक्सर ऐसा होता है. यही कारण है कि आपको ऐसी मिलती-जुलती धुन कुछ अन्य गानों में भी सुनाई देगी. कहते हैं कि ये मेलडी सरायकी भाषी इलाकों में सैकड़ों सालों से चली आ रही है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग इस धुन को आगे बढ़ाते रहे. लेकिन 'छलरे छलरे वाल' गाने का अस्तित्व करीब 60 पुराना है.

# पाकिस्तान में कैसे पहचान मिली?

शुरुआत में ये गाना किसी अन्य लोकगीत की तरह एक सीमित दायरे में ही पॉपुलर हुआ. मगर पाकिस्तान में इसे बड़ी पहचान तब मिली, जब 2016 में वेटरन सरायकी सिंगर मुहम्मद हुसैन बंदियालवी ने 'छलरे छलरे वाल' का अपना वर्जन रिलीज़ किया. हालांकि वीडियो की क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं थी. मगर इसके लिरिक्स और धुन ने लोगों का खूब ध्यान खींचा. पाकिस्तान में इस गाने को अगली ख्याति मिली 2018 में. तब वेटरन सिंगर सफाउल्लाह खान रोखरी ने इसका स्टूडियो वर्जन रिलीज़ किया. उसे भी लोगों ने काफी पसंद किया. अगर आप इन दोनों वर्जन की तुलना करें, तो उनके लिरिक्स में थोड़ा फर्क नज़र आएगा. यही इस गाने की सबसे खास बात है. हर पीढ़ी इसे अलग नज़रिए से देखती है. इसलिए धुन सेम रहते हुए भी इसके बोल बदल जाते हैं.

# अब क्यों वायरल हुआ ‘छलरे छलरे वाल’? 

'छलरे छलरे वाल' नई पीढ़ी तक पहुंची, इसका सबसे बड़ा क्रेडिट इंस्टाग्राम को जाता है. दरअसल, पाकिस्तानी सिंगर शेंजी सिबल ने ये गाना गाते हुए एक रील शेयर की थी, जो पहले पाकिस्तान में फटा. धीरे-धीरे ये रील भारत पहुंची. मगर इंडिया में ये गाना तब वायरल हुआ, जब पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा ने अपनी आवाज़ में इसे रिकॉर्ड किया. उसके बाद से तो हर रील में यही गाना सुनाई पड़ने लगा.

# ये गाना कहीं सुनेला लगता है…

‘छलरे छलरे वाल’ सुनते हुए अचानक जनता को आभास हुआ कि ये धुन तो सुनी-सुनी लग रही है. मस्तिष्क मंथन में सामने आया कि सुनील शेट्टी और अक्षय कुमार की क्लासिक फिल्म 'मोहरा' का 'न कजरे की धार' की धुन भी कुछ ऐसी ही है. 1994 में रिलीज़ हुई उस मूवी में इसे सुनील शेट्टी और पूनम झावर पर फिल्माया गया था. पंकज उधास और साधना सरगम की आवाज़ में ये गाना खूब पॉपुलर हुआ. ऐसे में नई जेनरेशनल ने ये कहना शुरू कर दिया कि ‘छलरे छलरे वाल’ असल में 'न कजरे की धार' की कॉपी है. लेकिन ये सच नहीं है.

पढ़ें: 'धुरंधर 2' के 'आरी आरी' गाने की पूरी कहानी, जिसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है!

# अक्षय-सुनील शेट्टी की फिल्म से कनेक्शन

दरअसल, 'न कजरे की धार' भी 1994 का गाना नहीं है. इसे तो उस दौर में तैयार कर लिया गया था, जब सुनील शेट्टी का जन्म भी नहीं हुआ था. ये गाना ओरिजिनली आइकॉनिक म्यूजिक कम्पोजर जोड़ी कल्याण जी-आनंद जी का है. उन्होंने 'डॉन', 'ज़ंजीर' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए म्यूज़िक बनाया है. 1960 में जब वो इंडस्ट्री में नए-नए आए थे, तब उन्होंने एक फिल्म के लिए कुछ गाने तैयार किए थे. 'न कजरे की धार' भी उनमें से एक था. इंदीवर ने उसी दौर में इसके लिरिक्स लिखे थे. वहीं इसे ओरिजिनली मुकेश की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया था. मगर मामला तब फंसा, जब वो फिल्म बनी ही नहीं. ऐसे में ये गाना करीब 34 सालों तक धूल फांकता रहा.

# 34 साल बाद नया जीवनदान मिला

फिर आया 1993-94 का दौर. राजीव राय 'मोहरा' बना रहे थे. इसके गानों के लिए उन्होंने कल्याण जी के बेटे वीजू शाह को अप्रोच किया. वीजू ‘न कजरे की धार’ वाली धुन भूले नहीं थे. इसलिए उन्होंने 34 साल बाद उस पुरानी रिकॉर्डिंग को झाड़-पोंछकर बाहर निकाला. फिर उसे पंकज उधास और साधना सरगम की आवाज़ में दोबारा रिकॉर्ड करवाया. उन्होंने गाने के सिंगर्स ज़रूर बदले. मगर इस बात का ध्यान रखा कि इसकी आत्मा जस-की-तस रहे. इंट्रेस्टिंग बात ये है कि 'छलरे छलरे वाल' जहां एक लड़की के नज़रिए से लिखा गया है, वहीं ‘न कजरे की धार' को पुरुषों के नज़रिए से तैयार किया गया. 

# पहले मुर्गी आई या अंडा?

तो बात घूम-फिरकर वहीं आ जाती है कि पहले मुर्गी आई या अंडा? यानी 'न कजरे की धार' और 'छलरे छलरे वाल' में से किसने दूसरे की नकल की है? तो जवाब है- “किसी ने नहीं.” असल में दोनों की प्रेरणा सैकड़ों साल पुरानी वही सरायकी धुन है, जिसे गुनगुनाते हुए हर पीढ़ी ने पन्ने पर अपना नज़रिया लिखा. संभव है कि 50 साल बाद जब अगली पीढ़ी सोशल मीडिया पर डूम स्क्रॉलिंग कर रही होगी, तब शायद उन्हें भी इसका कोई अलग वर्जन सुनने को मिले. 

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