#1. पैरेडाइज़ पेपर्स - इंडियन एक्सप्रेस
जैसे बरम्यूडा का ट्राएंगल रहस्यमयी है, वैसे ही वहां एक रहस्यमयी लॉ फर्म है एप्पलबी जो बड़े-बड़े रईसों और कंपनियों को टैक्स बचाने के उपाय बताती है. कानूनी भी, गैर कानूनी भी. इसके 1,34,00,000 दस्तावेज़ लीक हुए जो हाथ लग गए एक जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung के. अखबार ने ये डेटा International Consortium for Investigative Journalism को दे दिया और फिर सालभर की जांच पड़ताल के बाद ICIJ ने अपनी जांच के आधार पर दुनियाभर की कंपनियों और रईसों की संभावित टैक्स चोरी का खुलासा किया.

डॉनल्ड ट्रंप, अमिताभ बच्चन और क्वीन एलिज़ाबेथ पर पैरेडाइज़ पेपर सामने आने के बाद आरोप लगे.
इनमें इंग्लैंड की रानी क्वीन एलिज़ाबेथ, डॉनल्ड ट्रंप और जस्टिन ट्रूडो के करीबी के साथ-साथ मैक्डॉनल्ड्स, नाइकी, एप्पल, वॉलमार्ट, याहू और सीमेन्स जैसी कंपनियों के नाम थे. इस लीक में हिंदुस्तान सें संबंधित जानकारी की छंटनी की थी इंडियन एक्सप्रेस ने. एक्सप्रेस की लिस्ट में विजय माल्या, अमिताभ बच्चन, जयंत सिन्हा के साथ-साथ जीएमआर समूह, अपोलो टायर्स और हेवेल्स जैसी बड़ी कंपनियों के नाम हैं.
कार्रवाई का फिलहाल कोई अता-पता नही हैं. जैसे पनामा पेपर्स भुला दिए गए थे, वैसे ही पैरेडाइज़ पेपर्स भी लोगों की याद से गायब होते जा रहे हैं.
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पैराडाइज़ पेपर्स लीकः भारत के कौन से ताकतवर लोगों का नाम सामने आया है?

जय शाह, नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटोः भाजपा)
#2. जय अमितभाई शाह की संपत्ति में 16,000 गुना की वृद्धि - द वायर
अमित शाह की छवि ऐसी है कि पत्रकार उनसे सवाल पूछते हुए कुछ असहज रहते हैं. वो पत्रकारों पर नाराज़ भी हो जाते हैं. लेकिन 8 अक्टूबर, 2017 को वायर ने एक रिपोर्ट छापकर अमित शाह और मीडिया दोनों को असहज कर दिया. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जय शाह की कंपनी टेंपल एंटरप्राइज़ का मुनाफा एक ही साल (2015-16) में 50,000 सालाना से बढ़कर 80 करोड़ हो गया. ये 16,000 गुना की बढ़ोत्तरी थी. इस कंपनी का मुख्य काम स्टॉक ट्रेडिंग था, लेकिन एक सरकारी कंपनी से लोन लेकर इस कंपनी ने विंडमिल (पवन चक्की) बनाना शुरू कर दिया था. इसके ठीक एक साल बाद जय शाह की कंपनी ने काम बंद करना बंद कर दिया. द वायर ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि कि जय शाह के वकील ने उन्हें ये स्टोरी करने के खिलाफ धमकाया था. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से जय शाह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

अनुराधा बियानी हरगोपाल लोया की बहन हैं. उन्होंने 'द कारवां' से बातचीत में अपने भाई की मौत से जुड़े कई सनसनीखेज़ सवाल उठाए हैं.
#3. सीबीआई जज लोया की संदिग्ध मौत - कारवां
सवा महीने में अमित शाह पर दूसरी तगड़ी चोट की अंग्रेज़ी न्यूज़ मैगज़ीन कारवां ने. सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई कर रहे जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की मौत एक दिसंबर, 2014 को दिल का दौरा पड़ने से हो गई थी. तब इस मौत के संदिग्ध होने की तरफ इशारा किया गया था लेकिन कोई जांच नहीं हुई. लोया के जाने के तकरीबन तीन साल बाद न्यूज़ मैग्ज़ीन कारवां ने एक रिपोर्ट छापी. 20 नवंबर, 2017 को छपी इस रिपोर्ट में लोया की मौत पर कई गंभीर सवाल उठाए थे. जैसे उन्हें ऑटो में अस्पताल ले जाना, अस्पताल की ईसीजी मशीन का खराब होना, लोया के कपड़ों पर खून के धब्बे होना और सबसे सनसनीखेज़ लोया की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर किसी अजनबी के दस्तखत होना, जो खुद को लोया का चचेरा भाई बताता था.
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अमित शाह का भी नाम आया था. इसलिए गुजरात चुनाव से ऐन पहले आई कारवां की रिपोर्ट ने ज़बरदस्त हलचल पैदा की. इंडियन एकस्प्रेस ने बाद में लोया की मौत के दिन और रात का एक-एक वाकया मालूम कर के एक रिपोर्ट में छापा. इसके मुताबिक लोया की मौत या उसके बाद उनके शव के साथ बर्ताव में कुछ भी संदिग्ध नहीं है. लेकिन कारवां अपनी रिपोर्ट पर कायम है.

इंडिया टुडे का नईम खान पर किया स्टिंग
कश्मीर में पत्थरबाज़ी को पाकिस्तानी मदद - इंडिया टुडे टीवी
16 मई, 2017 को इंडिया टुडे टीवी ने कश्मीर घाटी में पत्थरबाज़ी कराने वालों पर एक स्टिंग जारी किया. इसमें जम्मू कश्मीर नेश्नल फ्रंट के अध्यक्ष और ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष नईम खान को कैमरे पर ये कहते हुए देखा गया कि घाटी में पत्थरबाज़ी कराने के लिए पैसे पाकिस्तान से आते हैं. स्टिंग में ये आरोप लगा कि ये पैसा पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापर और हवाला के ज़रिए लश्कर ए तैयबा जैसे संगठन भेजते हैं. इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे थे, लेकिन इस बात के पक्के सबूत कम थे. इंडिया टुडे के खुलासे के तीन दिन बाद नेश्नल इंवेस्टिगेटिव एजेंसी (NIA) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नईम खान से पूछताछ की थी और मामला दर्ज किया था. फिलहाल इस मामले में जांच चल रही है.

रवीश कुमार एनडीटीवी इंडिया में सीनियर एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं
देश भर के विश्वविद्यालयों पर रवीश कुमार की यूनिवर्सिटी सीरीज़ - एनडीटीवी इंडिया
खबरों की दुनिया में अपराधों और बड़े खुलासों को प्राथमिकता मिलती है. शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे सॉफ्ट-स्टोरी का विषय ही बन पाते हैं क्योंकि इनमें तात्कालिकता वाली शर्त अमूमन नहीं रहती. इसलिए मीडिया संस्थान इन्हें कवर करने में कोताही बरतते हैं और पाठक-दर्शक इन्हें पढ़ने-देखने में. लेकिन एनडीटीवी ने टीआरपी की परवाह को किनारे रखकर देशभर के विश्वविद्यालयों के हालात पर यूनिवर्सिटी सीरीज़ शुरू की. इसमें दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों के अलावा देश के दूरदराज़ के इलाकों के विश्विद्यालयों पर कवरेज की गई जिनमें चौंकाने वाली बातें सामने आईं. जैसे उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में 35,000 छात्रों पर केवल चार पक्के कर्मचारी मिले. ये चार भी क्लर्क थे. इस सीरीज़ में अब तक 27 अंक आ चुके हैं.
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