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अक्टूबर से डेढ़ करोड़ राशन कार्ड होंगे रद्द, वापस पाने का एक तरीका है

यह कदम सरकार के पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) डेटाबेस को 'साफ' करने की कवायद का हिस्सा है. इसके तहत निष्क्रिय, डुप्लीकेट और अपात्र लाभार्थियों की छंटनी की जाएगी.

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नवंबर 2024 में खाद्य मंत्रालय ने पीडीएस सिस्टम से लगभग 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए थे (Courtesy: Aaj Tak)

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  • केंद्र सरकार ने अक्टूबर से डेढ़ करोड़ से अधिक राशन कार्ड रद्द करने का अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है, जिनका पिछले छह महीने से कोई उपयोग नहीं हुआ है।
  • यह कार्रवाई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के डेटाबेस को साफ करने और निष्क्रिय, डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
  • लाभार्थियों को तीन महीने का समय दिया जाएगा ताकि वे ई-केवाईसी कराकर अपने राशन कार्ड को पुनः सक्रिय कर सकें, अन्यथा उनका कार्ड स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।

केंद्र सरकार अक्टूबर से डेढ़ करोड़ से ज्यादा राशन कार्ड रद्द करने का अभियान शुरू करेगी. ये ऐसे राशन कार्ड हैं जिनका पिछले 6 महीने से इस्तेमाल नहीं किया गया है. इन कुल संख्या करीब एक करोड़ 58 लाख बताई जा रही है. यह कदम सरकार के पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) डेटाबेस को 'साफ' करने की कवायद का हिस्सा है. इसके तहत निष्क्रिय, डुप्लीकेट और अपात्र लाभार्थियों की छंटनी की जाएगी.

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3 महीने के भीतर ई-केवाईसी कराने पर राशन कार्ड बंद नहीं होगा 

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक हालांकि लाभार्थियों के नाम डेटाबेस से तुरंत नहीं हटाए जाएंगे. पहले उनके राशन कार्ड अस्थायी रूप से निष्क्रिय किए जाएंगे. इसके बाद उन्हें यह साबित करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा कि वे वास्तविक लाभार्थी हैं. 

अगर वे इस अवधि के भीतर ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो उनके कार्ड फिर से सक्रिय कर दिए जाएंगे. सरकार का तर्क है कि यह पूरी कवायद यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि राशन वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे.  

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सरकार की मंशा पर सवाल 

हालांकि, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने सरकार के इस फैसले को लेकर चिंता जताई है. नारायणन ने कहा, “किसी लाभार्थी का नाम हटाकर उसे ई-केवाईसी या अन्य तरीकों से सिस्टम में फिर से शामिल होने के लिए कहना, जवाबदेही का बोझ नागरिकों पर डालने का उदाहरण है.” उन्होंने आगे कहा, "राशन का लाभ कौन ले रहा है, इसका समय-समय पर आकलन करना जरूरी है, लेकिन इसे पंचायत स्तर पर समितियों के माध्यम से जमीनी स्तर से किया जाना चाहिए."

ऐसी समितियों को यह पता लगाना चाहिए कि किसी व्यक्ति ने राशन लेना क्यों बंद कर दिया है? फिर चाहे वह तकनीकी बाधाओं, राशन विक्रेता से संबंधित चिंताओं, किसी दूसरे शहर में बस जाने या किसी की मौत की वजह से हो. उन्होंने कहा, "लेकिन पहले लाभार्थियों का नाम डिलीट करना और फिर उन पर ही तकनीकी जरूरतों के अनुरूप ढलने का बोझ डालना अनुचित है."

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सरकार ने इससे पहले पीडीएस डेटाबेस को साफ करने के लिए डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग और ई-केवाईसी का इस्तेमाल किया है. नवंबर 2024 में खाद्य मंत्रालय ने पीडीएस सिस्टम से लगभग 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए थे.

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