किसी भी तरह के इंश्योरेंस जैसे कार, बाइक, हेल्थ के लिए आमतौर हम ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाली वेबसाइट या ऐप का रुख करते हैं. लेकिन यहां कुछ भी पता चलने से पहले हमें अपने से जुड़ी कुछ जानकारी देनी होती है. माने मोबाइल नंबर या ईमेल से लॉगिन करना होता है. वैसे तो हर कंपनी आपका मोबाइल नंबर लेने से पहले स्क्रीन पर लिखती है कि इस जानकारी का उपयोग प्रोडक्ट प्रमोशन में नहीं होगा, लेकिन असल में फिर एसएमएस और व्हाट्सऐप की बाढ़ आ जाती है. काश बिना लॉगिन किए ही बेसिक डिटेल्स मिल जाते तो कितना अच्छा होता.
अब बिना मोबाइल नंबर-ईमेल दिए मिलेगी बीमा की जानकारी, रूल सख्त होने जा रहे
बीमा रेगुलेटर IRDAI (भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण) ने इंश्योरेंस सेक्टर में कई बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इसमें सबसे बड़ा प्रपोजल वेबसाइट्स पर ऐसे ‘डार्क पैटर्न’ को रोकने का है, जो ग्राहकों से जबरन निजी जानकारी लेते हैं. ग्राहक बिना पर्सनल जानकारी शेयर किए पॉलिसी की कीमत, फीचर्स, परफॉर्मेंस और दूसरी जरूरी जानकारी देख सकेंगे.

जल्द ही ऐसा होगा क्योंकि बीमा रेगुलेटर IRDAI (भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण) ने इंश्योरेंस सेक्टर में कई बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इसमें सबसे बड़ा प्रपोजल वेबसाइट्स पर ऐसे ‘डार्क पैटर्न’ को रोकने का है, जो ग्राहकों से जबरन निजी जानकारी लेते हैं.
जानकारी लेने के लिए जानकारी नहीं देना होगीIRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कई नए बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इनमें कंपनियों के खर्च को कम करने, कमीशन पर लिमिट तय करने और बीमा वेबसाइट्स पर ग्राहकों से उनकी पर्सनल जानकारी लेने के तरीके में बदलाव शामिल हैं. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ किसी पॉलिसी का प्रीमियम या फीचर्स देखना चाहता है, तो प्रस्ताव के मुताबिक उसे पहले अपना नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल देने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
ग्राहक बिना पर्सनल जानकारी शेयर किए पॉलिसी की कीमत, फीचर्स, परफॉर्मेंस और दूसरी जरूरी जानकारी देख सकेंगे. IRDAI का कहना है कि सिर्फ जानकारी हासिल करने के लिए ग्राहक की डिटेल लेकर उसे बिक्री के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. IRDAI ने ऐसी प्रैक्टिस को डार्क पैटर्न के तौर पर देखा है. प्रपोजल में ऐसी व्यवस्था पर रोक लगाने की बात कही गई है.
ये भी पढ़ें: गाड़ी का बीमा सस्ता होने वाला है, IRDAI ऐसे खत्म करेगा कमीशनबाजी
क्या होता है डार्क पैटर्न?'डार्क पैटर्न' मतलब किसी भी प्लेटफॉर्म्स का कस्टमर को बरगलाने का तरीका या तरीके. वेबसाइट या ऐप के यूजर इंटरफ़ेस के साथ ऐसा महीन खेल जिसमें यूजर कब फंस जाता है, उसे पता ही नहीं चलता. और जब तक पता चलता है तब तक जेब खाली हो चुकी है. आसान करते हैं. फर्ज कीजिए आप एक ऐप पर जूते सर्च करने गए. ऐप ने आपके मन मुताबिक प्रोडक्ट दिखा दिए. मगर इसी दरमियान उसी जूते के साथ या उसी पैटर्न वाले जूते के साथ आपको कोई अच्छी ड्रेस वाला प्रोडक्ट भी स्क्रीन पर नजर आ जाए.
बीमा तो कर दिया लेकिन उस कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड कैसा है, इसकी कोई पुख्ता जानकारी ग्राहक को नहीं होती है. IRDAI ने ऐसी जानकारी को आसान और कंप्येर करने योग्य तरीके से उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इससे ग्राहक अलग-अलग कंपनियों और पॉलिसियों की जानकारी एक जगह देखकर फैसला ले सकेंगे.
Expense of Management को कम करोIRDAI ने बीमा कंपनियों के Expense of Management (EoM) को कम करने का प्रस्ताव दिया है. कंपनियों को अपने ऑपरेशनल और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च को और कंट्रोल करना होगा. कमीशन और दूसरे बिक्री खर्च भी इसी दायरे में आते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस में नई पॉलिसी और रिन्यूअल पर कमीशन कम करने की बात कही गई है. प्रस्ताव के मुताबिक कुछ डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों के लिए यह कमीशन नई पॉलिसी पर 15 फीसदी और रिन्यूअल पर 5 फीसदी तक हो सकता है. टर्म इंश्योरेंस और मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में भी कमीशन को सीमित करने का प्रस्ताव है. मोटर (थर्ड पार्टी) इंश्योरेंस कमीशन भी 15 फीसदी से घटेगा और पुराने वाहनों के लिए इसे 2.5 फीसदी तक रखने की बात कही गई है.
हालांकि, अभी यह पूरा बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है. नियम जारी होने के बाद ही साफ होगा कि कौन-कौन से प्रावधान किस रूप में लागू होंगे.
वीडियो: खर्चा-पानी: FSSAI ने कौन सी क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर लिया एक्शन?











