केंद्र सरकार ने 24 अगस्त को बिना किसी शर्त के गेहूं के निर्यात (Export) की अनुमति दे दी. सरकार के इस फैसले के बाद से यह प्रतिबंधित श्रेणी से फ्री एक्सपोर्ट कैटेगरी में आ गया. मिंट में छपी एक रिपोर्ट में सरकार के एक आदेश के हवाले से बताया गया है कि गेहूं निर्यात का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा. देश में गेहूं के स्टॉक में कमी की आशंका और इसकी गेहूं की कीमतों में तेजी के डर से सरकार ने मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.
गेहूं के एक्सपोर्ट पर बड़ा फैसला, 4 साल बाद सरकार ने हटाया प्रतिबंध
कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार फसल वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड करीब 12.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है

बाद में इन प्रतिबंधों को गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों तक बढ़ा दिया गया. इस फैसले से गेहूं से बने उत्पाद जैसे आटा, मैदा, सूजी (रवा), होलमील आटा (wholemeal atta) और गेहूं या मिश्रित आटा भी शामिल है.
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घरेलू सप्लाई में सुधार होने के बाद सरकार ने इस साल प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया. जनवरी 2026 में सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी. इसके बाद 5 लाख टन गेहूं से बने उत्पादों और 2.5 करोड़ टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी. फिर अप्रैल में 2.5 करोड़ टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी. इससे गेहूं की अनुमति निर्यात मात्रा बढ़कर 50 लाख टन और गेहूं उत्पादों की अनुमति निर्यात मात्रा 10 लाख टन हो गई.
कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार फसल वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड करीब 12.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है. यह एक वर्ष पहले के करीब 11.79 करोड़ टन से अधिक है. फसल वर्ष एक जुलाई से 30 जून के बीच का समय होता है. वहीं, फसल वर्ष 2025-26 में कुल खाद्यान्न उत्पादन भी रिकॉर्ड करीब 37.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है. आमतौर पर भारतीय गेहूं के प्रमुख खरीदारों में बांग्लादेश (सबसे बड़ा खरीदार), साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देश शामिल हैं.
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