देश का शायद ही कोई परिवार होगा, जहां कोई न कोई गोदरेज के प्रोडक्ट साबुन या सेविंग क्रीम इस्तेमाल न करता हो. कई घरों में गोदरेज का फ्रिज सालों से जगह बनाए हुए है. कुछ परिवार ऐसे हैं, जो गोदरेज समूह की तरफ से बनाए गए घरों में रहते हैं. इससे पता चलता है कि गोदरेज समूह का भारतीय परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी नाता है. इस समूह की बुनियाद पड़े 100 से ज्यादा साल बीत गए हैं. अब इस ग्रुप की कमान चौथी पीढ़ी को मिल गई है.
बिजनेस से ज्यादा पॉलिटिक्स पसंद थी, अब 2 लाख करोड़ की गोदरेज कंपनी संभालेंगे, कौन हैं पिरोजशा?
पिरोजशा गोदरेज गोदरेज समूह को अगले पांच साल में 5 लाख करोड़ रुपये का कारोबारी घराना बनाना चाहते हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 45 साल के पिरोजशा गोदरेज अब गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह के चेयरमैन बन रहे हैं. पिरोजशा गोदरेज फैमिली के चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं. उन्हें अब गोदरेज इंडस्ट्रीज की सभी प्रमुख 6 कंपनियों का जिम्मा सौंपा गया है. ये कंपनियां कंज्यूमर गुड़्स, रियल एस्टेट, केमिकल, एग्रो फूड, फाइनेंशियल सर्विसेज और प्राइवेट रियल एस्टेट इन्वेस्टेमेंट तक फैली हैं. आइए जानते हैं कि पिरोजशा गोदरेज कौन हैं?
कौन हैं पिरोजशा गोदरेज ?पिरोजशा गोदरेज आदि गोदरेज और परमेश्वर गोदरेज के बेटे हैं. वे अपने माता-पिता के तीन बच्चों में सबसे छोटे हैं. पिरोजशा ने व्हार्टन स्कूल से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया है. उसके बाद कोलंबिया यूनीवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय मामलों में पोस्ट ग्रेजुएट और कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए किया. हालांकि, जब वो जवान थे तो उनका रुझान कॉर्पोरेट जीवन की तुलना में राजनीति में ज्यादा था. उन्होंने साल 2002 में हिलेरी क्लिंटन के अमेरिकी सीनेट ऑफिस में और भारत के विदेश मंत्रालय में इंटर्नशिप की थी. साल 2005 में इकोनॉमिक टाइम्स ने रिपोर्ट किया था कि उन्होंने दो दशक बाद चुनाव लड़ने पर भी विचार किया था. लेकिन उनकी ये इच्छा परवान नहीं चढ़ सकी.
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साल 2004 में फैमिली बिजनेस जॉइन कियाउन्होंने साल 2004 में फैमिली बिजनेस में कदम रखा और गोदरेज प्रॉपर्टीज को चुना. अपने एमबीए के लिए दो साल के ब्रेक को छोड़कर वो 2004 से ही कंपनी के साथ जुड़ गए. 31 साल की आयु तक वे गोदरेज इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) और सीईओ बन गए थे. पिरोजशा ने अपने शुरुआती दिनों में ही यह संकेत दे दिया था कि वो किस तरह के बिजनेसमैन बनेंगे. साल 2012 में फोर्ब्स में छपे एक लेख में उन्होंने गोदरेज प्रॉपर्टीज के एसेट-लाइट मॉडल का समर्थन किया.
इसमें कंपनी ने जमीन खरीदकर खुद अपने पास रखने के बजाय जमीन मालिकों के साथ साझेदारी की थी. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गोदरेज नाम ने खरीदारों को भरोसा दिलाया क्योंकि कंपनी का विस्तार मुंबई से बाहर भी हुआ.
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गोदरेज प्रॉपर्टीज को लगे पंखप्रॉपर्टी बिजनेस पिरोजशा के लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित हुआ. उनके नेतृत्व में गोदरेज प्रॉपर्टीज ने तेजी से विस्तार किया. वित्त वर्ष 2020-2021 में घरों की बिक्री के मामले में भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर बन गई. कंपनी का दावा है कि वह आज भी देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर है.
उन्होंने गोदरेज कैपिटल और गोदरेज वेंचर्स की भी स्थापना की. पिरोजशा सिर्फ बिजनेस ही नहीं खाली समय में जेट स्कीइंग, ट्रैवलिंग और महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए पत्रों सहित दुर्लभ पुस्तकों, पांडुलिपियों और यादगार वस्तुओं को कलेक्ट करते हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में पिरोजशा गोदरेज के हवाले से लिखा गया है कि फिलहाल गोदरेज इंडस्ट्रीज की 6 कंपनियों की कुल वैल्यू करीब 2 लाख करोड़ रुपये है. वह इसे अगले पांच साल में बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये करना चाहते हैं.
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